सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां अफगानिस्तान से भारत लाने की कवायद के बारे में आरटीआई में मांगी गई जानकारी का मामला केंद्रीय सूचना आयोग में पहुंच गया है। मुख्य सूचना आयुक्त राधाकृष्ण माथुर मामले की सुनवाई करेंगे। अपील पर 22 फरवरी को सुनवाई होगी। आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट ने केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल की थी।
पवन पारिक एडवोकेट ने केंद्रीय जनसूचना अधिकारी से 5 नवंबर 2014 को सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां अफगानिस्तान से भारत लाए जाने बारे जानकारी मांगी थी। भारत सरकार द्वारा उनकी अस्थियां लाए जाने बारे किए गए प्रयासों का भी विवरण मांगा था।
इस बारे में काबुल स्थित भारतीय दूतावास की ओर से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया था कि अफगानिस्तान में सम्राट पृथ्वीराज चौहान के बारे में कोई सूचना नहीं है। अफगान अधिकारियों की ओर से इतिहासकारों और इतिहास पुस्तकों का हवाला देते हुए इनकार किया गया है।
आरटीआई में मिले इस जवाब से असंतुष्ट पवन पारिक की ओर से 29 जनवरी 2015 को प्रथम अपील दाखिल की गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला जिस पर 23 अप्रैल 2015 को केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील दाखिल की। लगभग दो साल के बाद केंद्रीय सूचना आयोग में उनकी अपील पर सुनवाई होगी।
वीडियो कान्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई
आरटीआई के इस मामले में सुनवाई के लिए वीडियो कान्फ्रेंसिंग की सुविधा मुहैया करवाई गई है। केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त राधाकृष्ण माथुर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपीलकर्ता व जनसूचना अधिकारियों से मुखातिब होंगे। आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक को सिरसा में ही लघु सचिवालय स्थित वीडियो कान्फ्रेंसिंग स्टूडियो में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। जबकि जनसूचना अधिकारी भीकाजीकामा पैलेस दिल्ली से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए अपना पक्ष रखेंगे।
अफगानिस्तान में है मजार
सम्राट पृथ्वीराज चौहान की मजार अफगानिस्तान में है, जिसे शैतान की मजार के नाम से जाना जाता है। पृथ्वीराज चौहान का मोहम्मद गौरी से दो बार युद्ध हुआ था। पहले युद्ध में चौहान ने गौरी को पराजित किया और उसे माफ कर दिया। लेकिन दूसरे युद्ध में गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना लिया और अपने साथ काबुल ले गया जहां उनकी आंखें निकाल ली।
इतिहासकारों के अनुसार चौहान की मृत्यु कारागार में ही हुई। उनकी मौत के बाद उन्हें काबुल में ही दफनाया गया और उनकी मजार को शैतान की मजार का नाम दिया गया। सम्राट पृथ्वीराज चौहान की मजार को वहां अपमानित किया जाता है और वहां पर मजार पर जूते मारे जाते हैं। इसी वजह से सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां ससम्मान भारत लाने और उनका सम्मानजनक तरीके से संस्कार करने को लेकर ही आरटीआई मांगी गई है।