भारतीय प्रशासनिक सेवा में 136वीं रैंक प्राप्त करने वाली सिरसा की यशिका मेहता ने कहा कि उसका आईएएस बनने का सपना तो पूरा हो गया है अब इस पद पर रह कर देश की सेवा करना ही मेरा मकसद है। जो भी पोस्ट मिलेगी उस पर रहते हुए महिलाओं और जरूरतमंदों की खासतौर पर मदद करेंगी।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में सी ब्लॉक निवासी यशिका ने बताया कि उसके भाई ने डॉक्टर बनकर उसे प्रेरित किया और उसी को वह अपना आदर्श मानकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ती रही। बात शिक्षा की करें तो यशिका की दादी विद्या देवी सेवा निवृत्त शिक्षिका हैं और उसकी मां सुमन मेहता डीएवी स्कूल में टीचर हैं। पिता देवेंद्र मेहता व्यवसायी हैं। उसने बताया कि भाई निखिल मेहता ने मेडीकल साइंस की रिसर्च में गोल्ड मेडल लेकर उसे प्रोत्साहित किया है। इससे पूर्व वह 2012 में बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन) में गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी है। इसके बाद आईएएस की तैयारी में जुट गई। दिल्ली में रह कर तैयारी की। उसने बताया कि मां-बाप, दादी व भाई की ओर से हमेशा उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रही है और हर संभव सहयोग भी।
उसने बताया कि अंतिम वर्ष भी उसने साक्षात्कार तक का रास्ता तय किया था पर रैंक न आने के कारण वह सफल नहीं हो पाई। 25 वर्षीय इस बेटी ने भी महिलाओं की बात कर महिला उत्थान का समर्थन किया है। सपना है कि सिस्टम में पारदर्शिता आए और आम लोगों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। उसने कहा कि जहां भी ड्यूटी करेगी पूरी ईमानदारी से करेगी। उसमें कुछ नया करके दिखाने का जज्बा है।
रिजल्ट आने के बाद यशिका के घर में बधाइयां देने वालों का तांता लगा रहा। यशिका के पिता देवेंद्र मेहता ने बताया कि उसे अपनी बेटी से स्कूली समय से ही काफी उम्मीदें थी क्योंकि वह काफी होशियार है। मां सुमन ने बताया कि जब यशिका नौंवीं कक्षा में थी तभी से इसके मन में आईएएस करने की इच्छा थी। यशिका ने बताया कि दिल्ली में कोचिंग लेकर इस सफर को तय किया है। यशिका ने स्कूली पढ़ाई सेंट जेवियर से की और उसके बाद बीटेक फरीदाबाद से की।