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अध्यक्ष पद के लिए गोटियां फिट करने में जुटे दावेदार

Sat, 26 Nov 2016 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सिरसा। गत 27 अक्तूबर को नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव होने निश्चित हुए थे पर कोर्म पूरा न होने के कारण एक बार चुनाव टल गए। अब 12 दिसंबर को चुनाव होने निश्चित हैं। ऐसे में प्रधान पद के लिए चाहवान सभी पार्टियों के उम्मीदवार गोटियां फिट में लगे हुए हैं। हालांकि बीजेपी के सबसे अधिक 15 पार्षद बने हैं पर एकजुटता की कमी के कारण दूसरी पार्टियां मैदान मारने की फिराक में दिख रही हैं।
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नप अध्यक्ष कौन बनेगा इसका फैसला 12 दिसंबर को होगा पर अपने पक्ष को मजबूत करने में दावेदार कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। फिलहाल बीजेपी की संभावना ज्यादा दिखाई पड़ रही है क्योंकि बीजेपी के सबसे अधिक 15 पार्षद चुनाव जीते हैं। यदि बीजेपी में गुटबाजी हावी नहीं रही तो बीजेपी का अध्यक्ष बन सकता है क्योंकि अध्यक्ष बनने के लिए 16 पार्षदों की जरूरत है। परंतु पिछले कुछ दिनों से बीजेपी में चल रही खींचातान इस परिणाम को बदल भी सकते हैं। बीजेपी में दो उम्मीदवार हैं और दोनों ही अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। ऐेसे में बीजेपी की गुटबाजी का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस और हलोपा की आजकल एक दांत रोटी टूट रही है। दोनों पार्टियों के मिला कर 11 पार्षद बनते हैं। कांग्रेस के छह और हलोपा के पांच पार्षद हैं। यही वजह है कि पिछले काफी दिनों से हलोपा के सर्वोसर्वा कांडा बंधुओं और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष ताल मिला रहे हैं। कभी इनके बीच 36 का आंकड़ा होता था। बीजेपी का खेल बिगाडने में दोनों पार्टियां इन दिनों खूब कसरत करती दिखाई दे रही हैं। बीजेपी में राहुत सेतिया अपने गुट की अध्यक्ष बनाने में अड़े हुए हैं तो पुरानी भाजपा अपने पाले में इस पद को लाना चाह रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रो. गणेशी लाल का झुकाव किधर होगा यह भी इस चुनाव के परिणाम पर प्रभाव डालेगा। जो भी हो पर इनेलो के हाथ में सबकी डोर दिखाई पड़ रही है। इनेलो के दो पार्षद जीते हुए हैं तो विधायक और सांसद का वोट मिला कर चार वोट इनेलो के बनते हैं। ऐसे में स्पष्ट बहुमत न होने के कारण इनेलो के सहारे बिना कोई भी पार्टी अपना अध्यक्ष नहीं बना पाएगी। बता दें कि 25 सितंबर को सिरसा नगर परिषद के चुनाव हुए थे। अध्यक्ष पद के लिए खींचातान होने के कारण अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए लंबे समय पर 27 अक्तूबर को बैठक बुलाई गई जिसमें भाजपा के पार्षद नहीं पहुंचने से चुनाव 12 दिसंबर को निश्चित किए गए। इस बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होना निश्चित है। नप अध्यक्ष का पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित है। बहरहाल ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा पर अध्यक्ष पद के दावेदार अपनी-अपनी गोटियां फिट करने में जुटे हुए हैं।
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परिषद चुनाव में विकल्प क्यों नहीं?
आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 27 सितंबर 2013 को दिए गए फैसले(सीडब्ल्यूपी-161/04)का हवाला देते हुए सिरसा नगर परिषद के चुनाव में भी मतदाताओं को नोटा बटन का विकल्प न देने को चुनौती दी थी। उन्होंने दलील दी कि जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को नोटा का विकल्प प्रदान किया जाता है, तब नगर परिषद के चुनाव में मतदाताओं को इस अधिकार से वंचित क्यों किया गया? मतदाताओं के अधिकार के लिए ही उन्होंने सीएम विंडो पर शिकायत की।
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विकल्प की आस बंधी
सीएम विंडो पर नोटा विकल्प देने की आवाज उठाए जाने से निकट भविष्य में होने वाले चुनाव में वोटरों को विकल्प मिलने की आस बंधी है। चुनाव आयोग से इस बारे में जवाब तलबी हुई है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में हाथों हाथ नोटा का विकल्प देने वाला चुनाव आयोग पंचायतीराज व नगर परिषद के चुनाव में नोटा का विकल्प देने के लिए पिछले तीन वर्षों से विचार ही कर रहा है? उम्मीद की जाती है कि विचार पूरा हो जाएगा और अगली बार वोटरों को नोटा बटन इस्तेमाल करने का विकल्प मिल पाएगा।
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