जिले में अगर कोई हादसा होता है तो करीब दो घंटे तक लोगों को एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है। जिले में सोमवार रात हुए दो हादसों में राहगीर एंबुलेंस के लिए फोन करते रहे, लेकिन मौके पर एंबुलेंस नहीं पहुंची और घायलों को निजी वाहनों में अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।
जिला स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय में करीब 29 एंबुलेंस हैं, जो लोगों की सुविधाओं के लिए लगाई गई हैं। इसके लिए प्रशासन द्वारा एक टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है, लेकिन शाम ढलने के साथ ही एंबुलेंस चालकों और टोल फ्री नंबर पर बात करने वालों का कोई पता तक नहीं होता। इस दौरान कोई भी हादसा क्यों ना हो जाए, लेकिन विभाग द्वारा जारी नंबर 108 पर बात नहीं होगी।
जिले में सोमवार देर रात गांव दड़बी और रसूलपुर की बीच बाइक और ट्रैक्टर में टक्कर हो गई। हादसा इतना भयंकर था कि बाइक चालक कुलदीप का एक पैर कट गया। ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया। हादसे के दौरान मौके पर मौजूद कुलदीप के चचेरे भाई पवन ने बताया कि आठ बजे हादसा हुआ। जब बाइक सवार कुलदीप का ट्रैक्टर के साथ हादसा हुआ तो वह मौके पर पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने करीब एक घंटे के दौरान कई बार टोल फ्री नंबर पर फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। हादसे के दौरान मौके पर पहुंचे लोगों ने दड़बी गांव के सरकारी अस्पताल में फोन कर सूचना दी कि हादसा हो गया है और एंबुलेंस भेजी जाए, लेकिन वहां से जवाब आया कि 20 मिनट में एंबुलेंस उन तक पहुंच जाएगी, जबकि हादसे और अस्पताल के बीच दूरी करीब पांच से सात किलोमीटर ही है। बावजूद इसके एक घंटे के इंतजार के बाद राहगीरों ने घायल युवक के घर पर फोन किया और गाड़ी मंगवाकर निजी वाहन से उसे इलाज के लिए भेज दिया। हादसे में घायल कुलदीप ने अपना एक पैर गंवा दिया। ग्रामवासी पवन ने बताया कि उन्होंने पुलिस को भी फोन किया, लेकिन पूरे हादसे के बाद भी कोई पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।
गोवंश सामने आने से बाइक चालक घायल
वहीं दूसरे मामले में रात करीब आठ बजे भंभूर गांव में रोड पर गोवंश आगे आ जाने से एक बाइक सवार घायल हो गया। बाइक सवार की टक्कर इतनी भयंकर थी कि करीब पांच मिनट तक चालक होश में ही नहीं आया। वहीं, गोवंश ने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस दौरान अमर उजाला टीम मौके पर ही मौजूद थी, जब एंबुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 108 पर कॉल की गई तो नंबर व्यस्त मिला, जिसके करीब दो घंटे तक नंबर व्यस्त ही रहा। रात को करीब 10 बजे टोल फ्री नंबर पर बात हुई तो जवाब आया कि वे कोरोना संक्रमण के दौरान व्यस्त थे, जिस कारण फोन का जवाब नहीं दे पाए। इस बात से साफ पता लग रहा है कि अगर रात को कोई हादसा हो जाता है उसका जिम्मेदार चालक ही है, क्योंकि सरकार ने सुविधा के नाम पर नंबर जारी कर दिया है, जो कभी काम नहीं आने वाला।
प्रशासन के साथ सरपंच भी नहीं ले रहे सुध
प्रशासन द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं कि शहर को पशु मुक्त बनाया जाए, लेकिन रात के समय सांगवान चौक से लेकर रानियां चुंगी तक सड़क पर लावारिस पशु ही मिल रहे हैं, जो हादसे को बुलावा दे रहे हैं। भंभूर और मंगाला गांव में गोवंश सड़कों पर घूमते रहते हैं और रात को अंधेरा होने के कारण वे किसी चालक को दिखाई नहीं देते, जिस कारण बड़े हादसे हो जाते हैं और किसी न किसी को इसमें अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
मेरे संज्ञान में मामला नहीं है। जांच कराई जाएगी कि रात के समय कौन ड्यूटी पर था और फोन क्यों नहीं उठाया गया। जांच के बाद ही कुछ पता लगेगा कि क्या मामला है।
- डॉ. बुधराम, डिप्टी सिविल सर्जन स्वास्थ्य विभाग सिरसा