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50 लाख का सरकारी चावल मार्केेट में बेचा, स्टॉक पूरा दिखाने के लिए कट्टों में भर दिया भूसा

Tue, 06 Dec 2016 12:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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डबवाली (सिरसा)। गांव सकताखेड़ा स्थित खालसा राइस मिल से पचास लाख रुपये की कीमत का चावल तथा धान गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार शैलर मालिक ने चावल को बेचने के बाद उसकी जगह भूसा भर दिया। पुलिस ने शैलर मालिक सहित तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज करके आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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    अक्तूबर 2016 में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने धान की फसल का भंडारण करने तथा धान में से चावल निकलाने के लिए शैलर के साथ करार किया था। विभाग ने गांव अबूबशहर तथा मौजगढ़ के खरीद केंद्रों से 26 लाख 66 हजार 325 क्विंटल धान खालसा राइस मिल को दिया। करार अनुसार 30 नवंबर 2016 तक भंडारण किए गए धान में से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को बीस फीसदी धान का चावल सौंपा जाना था। ऐसा न होने पर 21 नवंबर 2016 को विभाग ने शैलर को नोटिस जारी करके चावल देने की हिदायत दी। शैलर की ओर से न तो नोटिस का जवाब आया और न ही चावल पहुंचा। एक दिसंबर 2016 को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक बलकरण सिंह राइस मिल पहुंचे। उन्होंने वहां पड़े धान तथा चावल का निरीक्षण किया। चावल के कट्टों के नीचे भूसा के कट्टे सैट किए हुए मिले। धान का स्टॉक भी जांचा गया। धान की कमी को पूरा करने के लिए स्टैग में भूसे के कट्टे लगे मिले। अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में जांच अधिकारी ने बताया है कि शैलर में 1830 क्विंटल चावल कम मिला है। जांच अधिकारी के अनुसार संभव है कि उपरोक्त चावल को मार्केट में सेल कर दिया गया है। मामला सामने आने के बाद शैलर पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का कड़ा पहरा है। सदर थाना पुलिस ने निरीक्षक बलकरण सिंह की शिकायत पर शैलर मालिक मनजीत सिंह निवासी गांव फतेहपुर जिला मानसा, सिरसा की जवाहर नाथ ट्रेनिंग कंपनी के सोनू, गणेश ट्रेनिंग के पवन कुमार के खिलाफ केस दर्ज करके आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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एग्रीमेंट भी फर्जी!
करीब 50 लाख रुपये कीमत का सरकारी चावल मार्केट में बेचे जाने का मामला सामने आने के बाद एग्रीमेंट पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार एग्रीमेंट के लिए जो साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं, उनसे छेड़छाड़ होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। विभाग के उच्च अधिकारी एग्रीमेंट को वेरिफाई करने में लगे हैं। जबकि यह काम आरंभ में होता है। जिला स्तर पर उपायुक्त के नेतृत्व में बनी मिलिंग कमेटी के पास जब शैलर आवेदन करता है तो उसके कागजों की पड़ताल होती है। स्थानीय अधिकारियों की वेरिफिकेशन के बाद जिला स्तरीय अधिकारी एग्रीमेंट साइन करते हैं। विभाग के उच्च अधिकारियों ने एग्रीमेंट पर रिपोर्ट तलब की है। उसके फर्जी पाए जाने की आशंका है। अगर ऐसा होता है तो विभाग के कई स्थानीय अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है।
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खालसा राइस मिल मालिक सहित दो गारंटर के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया है। एग्रीमेंट की जांच भी चल रही है। अगर वह फर्जी पाया जाता है तो केस दर्ज करवाया जाएगा।
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-सुभाष सिहाग, डीएफएससी, सिरसा
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