नए बजट वर्ष की शुरुआत के बाद महंगाई निरंतर बढ़ती जा रही है। हर घर का बजट गड़बड़ हो गया है। पहले भी महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ रखी थी पर सातवें वेतन आयोग की बढ़ोतरी ने तो लोगों के होश ही उड़ा दिए हैं। खासकर रसोई का बजट। जो कि हर माह बिगड़ता जा रहा है। लोगों को दो वक्त की रोटी जुटाने और बनाने में हालत खराब है। गृहणियां हर माह रसोई का बजट बढ़ाकर मांग करने लगी हैं। लोगों को अपने खर्चों पर नियंत्रण करने के बाद भी राहत नहीं मिल रही है। हर माह खाद्य सामग्री के दाम हर माह बढ़ते जा रहे हैं। यही कारण है कि बड़े व्यापारी स्टॉक का खेलने लगे हैं। डिपो पर मिलने वाली दाल और गेहूं से भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। वहीं सब्जी बेचने वालों का कहना है कि साहब जब हमें इस दाम पर मिलती है तो हम भी तो कुछ फायदा लेकर ही बेचेंगे न।
पिछले दो माह से हर दिन सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं। हमें महंगी सब्जी मिलती है तो बेचनी भी महंगी पड़ती है। दस-बीस रुपये में तो कई भी सब्जी नहीं मिलती। एक परिवार की सब्जी के लिए सौ रुपये अधिक राशि खर्च हो रही हैै। राजस्थान से आने वाली सब्जियों से आपूर्ति हो रही है।
सोनू, सब्जी विक्रे ता
खाद्य सामग्री के हर माह रेट बढ़ रहे हैं। लोगों ने खरीदारी कम कर दी है। हमें भी बड़ी परेशानी हो रही है। खाने की वस्तुओं के रेटों पर नियंत्रण होना चाहिए। कई चीजों के रेट तो इतने बढ़ रहे हैं कि आइटम को रखना ही बंद कर दिया है। बड़ी इलायची एक सौ से डेढ़ रुपये तक प्रति किलो ग्राम के हिसाब से मिल जाती थी पर अब उसका रेट दो हजार रुपये प्रति किलो ग्राम हो गया है। इसलिए इस आइटम को बेचना ही बंद कर दिया है। ग्राहक कितना सहन करेगा?
तिलकराज ग्रोवर, दुकानदार
डेढ़ से दो माह की बात करें तो रसोई का बजट 25 से 30 प्रतिशत बढ़ गया है और आमदन बढ़ी नहीं है। समझ में नहीं आ रहा कि किसी प्रकार रसोई का खर्च पूरा करेंगे। कई वस्तुओं के रेट तो एक महीने में कई बार बढ़ जाते हैं जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। सरकारी रेट पर गेहूं की खरीद बंद होते ही आटा पांच रुपये प्रति किलो ग्राम के हिसाब से बढ़ गया।
भारती सेठी, गृहणी
मेरी समझ में नहीं आ रहा कि रसोई के बजट को किस प्रकार नियंत्रण में रखूं। अब तो खाने में प्रयोग होने वाली आइटमों की मात्रा कम करनी शुरू की है ताकि बजट का बैलेंस बना रहे। मान लिया कि सब्जियां मौसम के कारण खराब हो गई जिससे रेट बढ़ गए पर दालों और अन्य सामग्री आए दिन क्यों बढ़ रही है? बड़े लोग स्टॉक कर कमाई करते हैं जिससे गरीबों और मध्यम वर्ग का शोषण होता है।
ज्योति रानी, गृहणी
पहले तो दाल को सबसे कम खर्च वाली माना जाता था पर अब तो दाल ने भी बजट बिगाड़ कर रखा हुआ है। पिछले महीनों से रसोई का बजट हर माह बढ़ने का सिलसिला जारी है। इसी प्रकार महंगाई बढ़ती रही तो परिवारों की कमाई खाने पर ही खर्च हो जाया करेगी। एक परिवार में एक आदमी कमाने वाला है तो बजट कम पड़ेगा। अब तो सरकार को इस महंगाई पर रोक लगाने के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए अन्यथा किसी भी अच्छे दिन नहीं रहने वाले।
बबली रानी, गृहणी
फुटकर रेट
नाम रेट अब एक माह पूर्व
आलू 20 15
प्याज 15 8
टमाटर 60 50
लोकी 40 30
बैंगन 40 25
तोरी 50 30
मटर 100 75
शिमला मिर्च 80 60
गोभी 60 40
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थोक रेट पहले अब
आलू 11 15
प्याज 7 10
टमाटर 20 30
लोकी 10 20
बैंगन 15 25
तोरी 14 30
मटर 65 80
शिमला मिर्च 25 40
गोभी 25 40
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नाम अब पहले
अरहर 150 150
उड़द 150 150
चना 100 60
मलका 100 100
राजमा 85 85
सरसों तेल 100 95
रिफाइंड 80 80
वनस्पति घी 75 75
देसी घी 380 350
चीनी 40 35
गुड़ 40 35
आटा 22 17
काले चने 100 60
सफेद चने 120 60
बेसन 120 60