हिसार से डबवाली तक बनाए जा रहे फोरलेन के निर्माण के लिए सरकार की ओर से अनेक गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहण की गई है। इस भूमि का अधिकतर किसानों को मुआवजा मिल चुका है, पर वैदवाला और बाजेकां के अनेक किसान ऐसे हैं, जिन्हें अभी तक जमीन का मुआवजा नहीं मिला है।
इस स्थिति में अनेक किसानों ने अपने खेतों में मिट्टी भी नहीं डालने दी, जिसके कारण काम प्रभावित भी हुआ है। प्रशासन की ओर से किसानों को मुआवजा देने की बात कही जा रही है, लेकिन हकीकत ये है कि अनेक किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। बताया गया कि उन किसानों के किला नंबर ही नहीं लिए गए। जमीन एक्वायर होने के बावजूद मुआवजा नहीं मिलने से किसान पशोपेश की स्थिति में हैं।
ऐसे में प्रशासन द्वारा उन्हें मुआवजा देने की बात करना बेमानी है। जिन किसानों को मुआवजा नहीं मिला, उनमें बाजेकां निवासी चार भाई संतोष, त्रिलोक सिंह, हरबंस सिंह, गुरचरण सिंह पुत्र अमर सिंह, गांव वैदवाला निवासी सर्वजीत पुत्र रेशम सिंह, अमरजीत पुत्र रेशम सिंह, निर्मल सिंह, नरेंद्र सिंह मास्टर, सुखविंद्र सिंह, निर्मल सिंह, रामसिंह पुत्र गुरमुख सिंह, अजीत सिंह पुत्र रामसिंह, बिट्टू सहित आदि शामिल हैं। दूसरी ओर फोरलेन निर्माण के दौरान आठ गांवों का शहर से लिंक टूट गया है। इन गांवों के लोगों को शहर व खेतों में जाने के लिए अभी तक कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं दिया गया है।
हालांकि हिसार रोड स्थित मंगलम पैलेस के निकट अंडर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन वहां से गांवों की शहर व खेतों की दूरी कम से कम 10 से 12 किलोमीटर है, जिससे उन्हें धन के साथ समय की भी हानि है। अनेक गांवों के लोग इस समस्या को लेकर उपायुक्त से भी मिले थे, लेकिन उपायुक्त ने उन्हें हिसार जाने की बात कही थी। उधर इस संबंध में डीआरओ अमीचंद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से सभी किसानों को अधिग्रहण की गई भूमि का मुआवजा दे दिया गया है। अगर कोई किसान रह गया है तो वह उनसे आकर मिल सकता है।