पिछले तीन दिन से जाट आरक्षण मामले में धरना-प्रदर्शन को लेकर पुलिस प्रशासन ही नहीं जाट समुदाय के लोग असमंजस में थे। रामपुरा ढिल्लो की पंचायत के विरोध में उठ खड़े होने से जाटों के समक्ष विकट स्थिति पैदा हो गई थी। धरने के लिए तीन गांवों का भी चयन कर लिया गया था। थेहड़ मामले को लेकर सभी की नींद उड़ी हुई है ऐसे में एसडीएम जाट प्रतिनिधिमंडल को मनाने में सफल रहे और जाट नेताओं ने उपायुक्त को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए थेहड़ के हालात को लेकर अनिश्चितकाल के लिए धरना स्थगित कर दिया। पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस जरूर ली है बावजूद इसके हाई अलर्ट जारी रखे हुए है।
जाट आरक्षण समिति के आह्वान पर प्रदेश के 125 जिलों में पांच जून से जाट आरक्षण को लेकर धरने शुरू हुए। थेहड़ का मुद्दा ज्यादा गंभीर बना हुआ था जहां पर तीन हजार से अधिक परिवारों पर बेघर होने की तलवार लटकी हुई थी। उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ और एसडीएम परमजीत सिंह चहल ने जाट नेताओं को समझाया तो उन्होंने पांच जून का धरना स्थगित करते हुए आठ जून को रामपुरा ढिल्लों में धरने का ऐलान कर दिया। सात जून को जाट आरक्षण संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल एसडीएम के पास धरना की अनुमति लेने के लिए पहुंचा और एसडीएम ने अवकाश का हवाला देकर इनकार दिया और अगले दिल आने का कहा।
उधर चोपटा के पुलिस प्रशासनिक अधिकारी गांव रामपुरा ढिल्लों में ग्रामीणों से मिले और उन्हें बताया कि अगर धरने के दौरान कुछ अनहोनी हो गई तो गांव के युवाओं को सरकारी नौकरी तक नहीं मिल पाएगी ऐसे में पंचायत ने अधिकारियों को लिख कर दे दिया कि गांव में किसी भी सूरत में धरना नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद जाट समुदाय के लोगों के समक्ष असमंजस की स्थिति पैदा हो गई और वे किसी अन्य गांव में धरना देेने पर विचार करने लगे इस बीच समिति के कोषाध्यक्ष की ताई का निधन हो गया जिसके कारण धरना के कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।
‘भाईचारे से होगा हर कार्य’
धरना स्थगित होने पर युवा वर्ग में गुस्सा देखा गया तो बुधवार को समिति के जिला प्रधान शीशपाल झोरड ने युवाओं की जाट धर्मशाला में बैठक लेकर साफ कर दिया कि शांति और भाई चारे के साथ हर कार्य होगा। धरना की अनुमति को लेकर वीरवार सुबह जाट धर्मशाला में फिर बैठक हुई और तीन गांवों का चयन किया गया जहां पर धरना दिया जाना था इनमें से किसी एक गांव में धरना देने के लिए प्रशासन से अनुमति लेने के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया जिसमें जिला प्रधान शीशपाल झोरड, कृष्ण कुमार ढाका, विकल पचार, दलीप सिंह कस्वां और धर्मवीर सिंह को शामिल किया गया। प्रतिनिधिमंडल सबसे पहले एसडीएम परमजीत सिंह चहल के कार्यालय में पहुंचा और उनके समक्ष धरने की अनुमति को लेकर फाइल रख दी गई जिसमें सभी शर्तों को मानते हुए शपथ पत्र तक दिए गए थे।
बताए थेहड़ के हालात
प्रशासन की ओर से जाट प्रतिनिधि मंडल को बताया गया कि थेहड़ का मामला इतना गंभीर है और इसके साथ-साथ यह आंदोलन किया तो काफी दिक्कत आएगी। चहल ने उनके समक्ष थेहड़ को लेकर उपजे हालात रखे और अनुरोध किया कि ऐसी स्थिति में धरना उचित नहीं है। आधा घंटा तक एसडीएम ने प्रशासन के पक्ष से उन्हें अवगत करवाया और समाज हित में अच्छा फैसला करने को कहा। इस पर जाट प्रतिनिधि मंडल धरना स्थगित करने के लिए राजी हो गया। बाद में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की प्रतिनिधि मंडल उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ से मिला। उपायुक्त ने भी उनक समक्ष थेहड़ को लेकर उपजे हालत रखे।
36 बिरादरी पर विपदा, बाद में होगा आंदोलन
समिति के जिला प्रधान शीशपाल झोरड़ ने कहा कि 36 बिरादरी के हजारों परिवारों पर थेहड़ मामले को लेकर जो विपदा आई है उसके चलते वे जिला सिरसा में अपना आंदोलन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हैं। उन्होंने बताया कि थेहड़ मामले के सुलझने के बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। शीशपाल झोरड़ ने लोगों से शांति व भाईचारा बनाए रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने उपायुक्त को मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने मांग की कि हरियाणा सरकार केंद्र को जाट आरक्षण के सेक्शन-9 में शामिल करने के बारे में पत्र लिखे। उच्च न्यायालय में जाट आरक्षण की उचित पैरवी करें और जाट आरक्षण के दौरान दर्ज हुए मामले वापस लिए जाए। इसके साथ ही जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मारे गए सभी बिरादरियों के युवकों को मुआवजा और उनके परिवार में सरकारी नौकरी दी जाए तथा जाट समाज के अधिकारियों के खिलाफ अनुचित कार्यवाही बंद की जाए।