फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहर को पिलाया जा रहा है सीवर का पानी

Thu, 14 Apr 2016 01:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
विज्ञापन
पानी की सप्‍लाई - फोटो : Desk
विज्ञापन
यदि आप नहरी पानी की आपूर्ति से खुश हो रहे हैं तो सावधान हो जाए। आपके घर में आ रहे पानी में सीवर का गंदा पानी मिक्स है। इससे शहर में बीमारियां फैलने का भय बना हुआ है। जल घर के साथ लगती कॉलोनी से सीवर का पानी नहरी खाले में जाता है और यह पानी टैंक के नहरी पानी में मिक्स हो जाता है। विभाग की नाक तले बनी यह गंभीर समस्या कोई आज की नहीं है बल्कि पिछले 25 वर्षों से लोगों को विभाग द्वारा सीवर मिक्स पानी की आपूर्ति दी जा रही है। इस समस्या को लेकर कॉलोनी के लोगों ने कई बार अधिकारियों को शिकायत भी की है पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। लोगों की सेहत से हो रहे खिलवाड़ को लेकर अब तक शहर के जागरूक लोगों ने भी आवाज नहीं उठाई है। पाइन लाइन लीकेज होने से सीवर का पानी पेयजल में मिक्स होने की समस्या तो कई बार आती है पर चतरगढ़ पट्टी में सीवर का नाला ही पेयजल में जा रहा है।
विज्ञापन


चतरगढ़पट्टी स्थित मुख्य जल घर के पास में ही सीवर का पानी पेयजल में मिक्स हो रहा है। यह सिलसिला पिछले 25 वर्षों से जारी है। अब तक किसी भी अधिकारी की आंखें नहीं खुली हैं। नतीजा लोगों को साफ पानी की बजाय सीवर युक्त पानी पीने के लिए मिल रहा है। इस समस्या को लेकर किसी अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की। न ही शहर के लोगों ने कभी एतराज जताया है। जल घर से सटी कॉलोनी चतरगढ़ पट्टी के एक बड़े हिस्से में सीवर लाइन नहीं है। लोगों के घरों का सीवर का पानी खाले में आता है। इस खाले से नहर का पानी जल  घर में पहुंचाया जाता है। पिछले करीब 25 वर्षों से सीवर का पानी मिक्स होकर टैंकों में आ रहा है।

विभाग के नाक तले से पेयजल में सीवर का पानी मिक्स हो रहा है पर विभाग ने कभी भी कोई कदम नहीं उठाया। कॉलोनी निवासी सरस्ती बिश्नोई, सुरेश कुमार, रामनाथ, माया देवी, तीजा देवी, जसवंती देवी, महेंद्र सिंह, रामकुमार आदि ने बताया कि पांच सौ से आठ घरों के सीवर का पानी रोजाना इस खाले में आता है और यह पानी जल घर के टैंकों में मिक्स हो जाता है। उन्होंने बताया कि वर्षों से सीवर का पानी नहरी पानी के खाले में डल रहा है पर किसी ने अब तक इस और ध्यान ही नहीं दिया। उन्होंने बताया कि शहर के लोगों की सेहत की चिंता करते हुए हमने कई बार इसकी शिकायत सीएमओ को की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता को भी लोगों ने कार्यालय जाकर समस्या से अवगत करवाया पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि जल घर के ठीक पास से सीवर का पानी मिक्स हो रहा है पर विभाग की नींद टूटने का नाम ही नहीं ले रही है। खास बात यह है कि सीवर का पानी मिक्स होकर पूरे शहर में दिया जा रहा है पर अब तक शहर के लोगों ने इसका विरोध तक नहीं जताया। लोगों ने कहा कि गर्मियों में लोग प्याऊ लगा कर जल सेवा करते हैं और हमारी आंखों के सामने सीवर का पानी मिक्स हो रहा है। ऐसे में हम विरोध करेंगे और समस्या का समाधान न होने तक विभाग के कार्यालय में धरने देंगे। लोगों ने कहा कि शहर वासियों की सेहत के लिए हम अधिकारियों को जगाएंगे क्योंकि हमारी आंखों के सामने गंदा पानी पेयजल में मिक्स हो रहा है। उन्होंने मांग भी की है कि क्षेत्र में सीवरेज लाइन डाली जाए ताकि इस समस्या से स्थायी तौर पर छुटकारा मिल सके। इस मामले में विभाग के अधिकारियों से संपर्क करना चाहा तो छुट्टी के कारण संपर्क नहीं हो पाया न ही दूरभाष से संपर्क हो सका।

डॉ. वेद बैनीवाल ने बताया कि पीने के पानी में सीवर का गंदा पानी मिक्स हो जाए तो पेट के रोगों के अलावा अन्य कई प्रकार की गंभीर बीमारियां व्यक्ति को लग सकती हैं। उन्होंने बताया कि बहुत सी बीमारियां गंदे पानी से ही होती हैं।

अप्रैल में बंद रहेंगी नहरें
पूरे अप्रैल माह में शहर के दो लाख 10 हजार लोगों के लिए पेयजल आपूर्ति के लिए ट्यूबवेलों के ही सहारे रहेगी। जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रकाशवीर ने बताया कि अब पानी का जितना स्टॉक है। उससे एक टाइम आपूर्ति देकर 26 से 27 दिन तक काम चलाया जा सकेगा। उसके बाद भी नहरों में पानी नहीं आया तो केवल ट्यूबवेलों द्वारा ही सप्लाई दी सकेगी। उन्होंने बताया कि ट्यूबवेल द्वारा दोनों टाइम के अलावा जरूरत पड़ने पर दिन में कभी भी सप्लाई दी जा सकती है। सिंचाई विभाग की ओर से फिलहाल 22 दिन के लिए नहरें बंद रहने की सूचना आई है यह अवधि बढ़ भी सकती है क्योंकि नहरों की सफाई और मरम्मत का कार्य होना है।

आठ ट्यूबवेलों का पानी खराब
जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा ट्यूबवेलों के पानी की टेस्टिंग करने के बाद रिपोर्ट में आठ ट्यूबवेलों का पानी पीने लायक नहीं है। इनमें से चार ट्यूबवेलों की सप्लाई तुरंत बंद कर दी गई है जबकि शेष चार की सप्लाई नहरी पानी के साथ मिक्स कर दी जा रही है। विभाग के अनुसार इससे पूर्व में 22 ट्यूबवेलों के पानी की रिपोर्ट में पानी पीने लायक नहीं था पर साल में दो बार टेस्टिंग होती है। दूसरी बार रिपोर्ट में यह संख्या 22 से कम हो कर आठ रह गई क्योंकि 14 ट्यूबवेलों का पानी सेहत के लिए मापदंड सें से थोड़ा ही अधिक खराब था।

84 ट्यूबवेल के सहारे रहेगी अप्रैल माह में सप्लाई
नहरें बंद होने के कारण पूरे अप्रैल माह में शहर की पेयजल आपूर्ति ट्यूबवेलों पर ही निर्भर रहेगी। विभाग ने सभी ट्यूबवेलों को तकनीकी जांच भी करवा ली है ताकि अचानक ट्यूबवेल खराब होने से पेयजल किल्लत न हो। नहरी पानी की आपूर्ति के दौरान इन ट्यूबवेलों को जरूरत अनुसार ही चलाया जाता था पर अब नहरों की बंदी के दौरान आपूर्ति का दारोमदार इन्हीं ट्यूबवेलों पर रहेगा।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें