अब मास्टर जी जींस पैंट में दिखाई नहीं देंगे। यदि ऐसा किया तो उनके खिलाफ विभाग कार्रवाई करेगा। जी हां शिक्षकों पर प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में जींस पैंट पहनने पर पाबंदी लग चुकी है। स्कूलों के अलावा वह कार्यालय में भी जींस पैंट पहनकर नहीं जा सकेंगे। शिक्षकों को अब फॉर्मल पैंट ही पहनी होगी। इसके लिए मौलिक शिक्षा निदेशालय से निर्देश जारी किए जा चुके हैं। सभी स्कूलों में इस बारे सूचित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार मौलिक शिक्षा विभाग ने तुरंत प्रभाव से शिक्षकों की जींस पैंट पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। आदेश पर अमल करने के लिए जिला के सभी मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र निदेशालय द्वारा भेजा गया है। साथ ही निर्देशों की अवहेलना करने पर कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी गई है। मौलिक शिक्षा विभाग की ओर से सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को भेजे गए पत्र क्रमांक 04/42-2014प्रशि.(1) के माध्यम से कहा गया है कि प्राय: देखने में आया है कि राजकीय प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापक विद्यालयों में जब जींस पैंट पहन कर आते हैं। जो उचित नहीं है।
इस पर रोक लगाई जाए। अब स्कूलों में फैशन को बढ़ावा देने वाले शिक्षकों की मनमानी पर शिकंजा कसा जाएगा। केवल पुरुष शिक्षक ही नहीं कई शिक्षिकाएं भी स्कूल में जींस व टी-शर्ट पहनकर आती देखी गई हैं। मनो विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि शिक्षक को तहजीब वाले कपड़े पहनने चाहिए। कपड़े समय और स्थान के अनुरूप होने चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शोध के अनुसार फॉर्मल और मर्यादित वस्त्र पहनने वाले शिक्षक की बात का बच्चों पर अधिक प्रभाव पड़ता है।
कार्यालय में भी जींस पैंट पहनकर आने पर रोक
निदेशालय ने कहा है कि ऐसा देखने में आया है कि प्राय: किसी कार्य से शिक्षक निदेशालय आते रहते हैं और ये जींस पैंट पहनकर आते हैं। इस पर भी रोक लगाई जाए। अब न तो स्कूलों में और न ही कार्यालयों में शिक्षक जींस पैंट में नजर आएंगे।
फॉर्मल कपड़े पहने की दी गई नसीहत
मौलिक शिक्षा विभाग के प्रशासनिक शाखा की ओर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि शिक्षक फॉर्मल कपड़े पहन कर स्कूल आएं और कार्यालय में भी फॉर्मल वस्त्र पहनकर ही आएं। दरअसल ऐसा देखने में आ रहा था कि अधिकतर स्कूलों में स्कूली शिक्षक जींस पैंट व टीशर्ट पहनकर स्कूल आते थे। कई स्कूलों शिक्षिकाएं भी कभी-कभी इसी प्रकार के वस्त्र पहन कर आती हैं। जहां स्कूली विद्यार्थियों को ड्रेस कोड अनिवार्य किया जा रहा है और इसके लिए हर साल लाखों रुपये की राशि जारी की जा रही है वहीं स्कूली शिक्षकों द्वारा इस प्रकार के वस्त्र पहने से स्कूल का माहौल बिगड़ रहा था।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी यज्ञदत्त वर्मा ने कहा कि आदेश की कॉपी सभी स्कूल मुखिया व खंड शिक्षा अधिकारी को भेज दी गई है। साथ ही अनिवार्य रूप से इसका पालन करने को कहा गया है।