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जस्टिस विजेंद्र जैन ने किया जेल का निरीक्षण, कैदियों से पूछा-कानूनी मदद मिलती है

Tue, 31 May 2016 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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जेल ‌निरीक्ष्‍ाण्‍ा - फोटो : Bureau
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हरियाणा मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष जस्टिस विजेंद्र जैन व डीजीपी अनंत कुमार ढुल ने सोमवार को जेल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण को लेकर सिरसा जेल प्रशासन के हाथ पांव फूले रहे। सुबह से ही हवालाती व कैदियों ने आयोग अध्यक्ष समक्ष अपनी शिकायतें व फरियाद की तैयारी कर ली थी। जस्टिस विजेंद्र जैन ने हवालातियों व कैदियों से कहा कि बताओ कानूनी सहायता  मिलती है या नहीं? आलम यह था कि जब तक जस्टिस जैन व डीजीपी ढुल निरीक्षण समाप्त करके मुख्य गेट तक नहीं पहुंचे जेल अधिकारियों की जान गले में अटकी रही।
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जानकारी के अनुसार हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विजेंद्र जैन का सोमवार को सिरसा के चौ. देवीलाला विश्वविद्यालय में आने कार्यक्रम था। कार्यक्रम में शिरकत करने पहले ही सिरसा पहुंचे जस्टिस जैन का काफिला जेल की तरफ रवाना हो गया। उनके साथ आयोग के डीजीपी अनंत कुमार ढुल थे।

उनके पहुंचते ही जेल प्रशासन की तरफ से अधीक्षक जेएस सेठी ने उनका स्वागत किया। इसके पश्चात जस्टिस विजेंद्र जैन  ने जेल का निरीक्षण शुरू कर दिया। उन्होंने जैसे ही अंदर प्रवेश किया तो कैदियों की लंबी कतार उम्मीद के साथ उनकी तरफ देख रही थी। हवालातियों व कैदियों ने हाथों में शिकायत व गुहार पत्र लिए हुए थे।
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जस्टिस जैन ने उन्हें निराश नहीं किया और सीधा उनसे कहा पूछा कानूनी सहायता मिलती है या नहीं? इसके बाद उन्होंने उनसे बातचीत करने शुरू की। सूत्रों के अनुसार कई बंदियों ने वकील मुहैया करवाने की गुहार लगाई तो कई बोले की उनकी सजा पूरी हो चुकी लेकिन रिहाई नहीं मिली।

आयोग अध्यक्ष ने अधिकतर शिकायतों का निपटारा मौके पर किया। मानव अधिकार आयोग ने जेल प्रशासन को हिदायत दी कि किसी भी सूरत में मूलभूत सुविधाओं से कैदियों को वंचित नहीं रखा जाए। जेल अधीक्षक जेएस सेठी का कहना है कि जेल निरीक्षण पूर्व से तय कार्यक्रम नहीं था। जस्टिस विजेंद्र जैन ने एक दम से औचक निरीक्षण का मन बनाया था।

महिला बैरकों में बढ़ाई जाए वार्डनों की संख्या
आयोग अध्यक्ष जस्टिस विजेंद्र जैन महिला बंदी बैरकों का निरीक्षण करके उसने उनकी समस्याएं पूछी। उन्होंने जेल अधिकारियों से कहा कि महिला बैरक पर खास ध्यान दिया जाए। सुविधाओं में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। वहां पर महिला जेल वार्डन की संख्या बढ़ाई जाए। जस्टिस जैन ने जेल परिसर में बने धार्मिक स्थलों में जाकर मत्था टेका। जस्टिस जैन यह जानकर खुश हुए कि जेल में बने मंदिर, मस्जिद व गुरुद्वारे का निर्माण कैदियों व हवालातियों द्वारा ही किया गया है।
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