आज दशहरा हैं। बुराई का प्रतीक रावण जलेगा, सत्य की असत्य पर जीत होगी। लेकिन सबसे पहले तो हमें अपने आस-पास और अपने अंदर मौजूद उन बुराइयों को आज जलाना होगा जो दिन-ब-दिन अहंकार का रूप लेती जा रही हैं। तो आइए आज हम उन अहंकारों और बुराइयों को जड़ से उखाड़ फेंके जो हमारे समाज के लिए बुरी है।
बात करें सिरसा कि तो शहर के लोग 10 बड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनसे निपटने को आए दिन शहर में धरने-प्रदर्शन होते हैं। पर समस्याएं जस की तस पड़ी हैं। चुनाव चाहे लोक सभा के हों या फिर विधान सभा और नगर परिषद के लोगों से हर बार समस्याओं के समाधान को लेकर वादे किए जाते हैं लेकिन बाद में उन पर कोई ध्यान नहीं देता।
ये हैं प्रमुख 10 समस्याएं
1. आवारा सांड
शहर में करीब पांच हजार लावारिस सांड मौत का सबब बन कर घूम रहे हैं। इनके कारण 60 से अधिक जानें जा चुकी हैं और घायलों की संख्या पांच सौ पार है। ये आंकड़े वर्ष 2010 के बाद के हैं। घूम रहे ये आवारा सांड तोड़फोड़ भी कर देते हैं। सांडों को पकड़ने के नाम पर हर साल लाखों खर्च होते हैं पर सांड कम होने की बजाय बढ़ रहे है। इससे साफ जाहिर है कि ये बजट कहां जा रहा है।
2. अतिक्रमण
अतिक्रमण की समस्या हर वर्ष कम होने की बजाय बढ़ रही है। बाजारों में अतिक्रमण से सड़कें संकरी हो गई हैं। नेशनल हाइवे पर डबवाली रोड पर देखें तो आधी से अधिक सड़क पर अतिक्रमण रहता है। इसके अलावा लोगों ने सरकारी रास्ते की जगह में निर्माण कर लिए हैं। इसके अलावा भी कई पार्कों व अन्य स्थलों पर सरेआम कब्जे होते रहते हैं और प्रशासन इस पर कार्रवाई करने की बजाय मौन धारण करके बैठा है।
3. सीवरेज
सीवरेज की समस्या के नाम पर साल में करोड़ों का बजट खर्च किया जाता है। शहर की अधिकतर कॉलोनियों में सीवरेज की समस्या बनी रहती है। कहीं-कहीं तो बरसात के दिनों में सीवरों के कारण जलभराव हो जाता है। 70 के दशक में डाली गई सीवर लाइन को अब तक बड़ा नहीं किया जा सका। जैसे जैसे आबादी बढ़ रही है समस्या भी गंभीर होती जा रही है।
4. पेयजल
आजादी के 70 सालों बाद भी शहर के लोगों को स्वच्छ पानी नसीब नहीं हो पाया है। शहर के करीब सवा सौ ट्यूबवेलों से पेयजल आपूर्ति हो रही है। टीडीएस की मात्रा अधिक होने के कारण लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। नेताओं के बार-बार आश्वासन के बाद भी लोगों को अब तक नहरी पानी की आपूर्ति नहीं मिलने लगी है।
5. सड़कें
सबसे अधिक बजट सड़कों पर खर्च होता है। हर वर्ष सड़कों पर कई करोड़ खर्च होते हैं। इससे ठेकेदारों और अधिकारियों की मौज बनी हुई है पर सड़कें ज्यों की त्यों अपनी हालत पर आंसू बहा रही हैं। शहर की सड़कें जगह-जगह से टूटी पड़ी हैं जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले
6. गलियां
शहर की सड़कों की तरह ही कॉलोनियों की गलियों की दुर्दशा बनी हुई है। नप द्वारा करोड़ों की राशि गलियों के निर्माण पर खर्च की जाती है। हर वर्ष गलियों के निर्माण के लिए बजट आता है। ये बजट कहां जाता है? गलियों के निर्माण मामले में कई घोटाले भी उजागर हुए जिसके बाद कई अधिकारियों ने हाई कोर्ट से जमानत ली है तो कुछ दाल पीनी पड़ी।
7. सफाई
भले ही देश के प्रधान मंत्री स्वच्छता को लेकर काफी गंभीर हैं पर इस शहर में इस बात को कोई असर नहीं है। कुछ तो सफाई कर्मचारियों की कमी पहले से ही है और ऊपर से बड़े अधिकारी अपनी कोठियों के लिए नप से सफाई कर्मी बुला लेते हैं। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा जाना स्वाभाविक है।
8. शिक्षा
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नारे का भी सिरसा में कोई खास असर नहीं हैं। यहां पर बेटियों के लिए कॉलेज की स्थापना तो कर दी गई पर अब तक इस कॉलेज का एक भी कर्मचारी या शिक्षक सरकार ने नियुक्त नहीं किया है। उधार से लिए गए स्टॉफ से काम चलाया जा रहा है।
9. रेलवे
सिरसा के लोगों को लंबी दूरी की ट्रेन पकड़ने के लिए हिसार, भिवानी, बठिंडा या दिल्ली जाना पड़ता है। पिछले 15 वर्षों से यहां के लोग लंबर दूरी की ट्रेनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं पर अब तक सरकार ने यहां के लोगों की इस समस्या का समाधान करना उचित नहीं समझा है।
10. बिजली के खंडे व तार
शहर के लोगों के लिए समस्या पैदा करने में बिजली विभाग भी पिछे नहीं है। लोगों को बिजली विभाग से जो समस्याएं हैं उनके समाधान की कोई आस भी नहीं रही है। शहर में जगह-जहग पर ढिली तारें लोगों के लिए समस्या बनी हुई हैं। कहीं पर खंभे गलियों के बीच में लगे हुए हैं।