महानगरों में चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या में इजाफा देखकर छोटे शहरों के लोग भी भयभीत हैं। सिरसा में अभी तक चिकनगुनिया से ग्रस्त एक संभावित मरीज ही सामने आया है, जिसका निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। वहीं डेंगू ग्रस्त रोगियों की संख्या छह तक पहुंच चुकी है, जिसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। हल्का सा बुखार होने पर लोग तुरंत अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में सिरसा जिले में चिकनगुनियां और डेंगू तो नियंत्रण में हैं। मरीजों से सरकारी, निजी अस्पताल फुल हैं। स्थिति ये हैं हर रोज 200 से 300 मरीज वायरल बुखार के आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार चिकनगुनियां डेथ रेशियों बहुत कम होता है। निजी अस्पताल में चिकनगुनियां संभावित एक मरीज दाखिल है। अस्पताल में जितने भी बुखार के केस आ रहे हैं वह सब वायरल-बुखार से पीड़ित हैं। वायरल के लक्षण भी चिकनगुनियां जैसे ही होते हैं। बुखार से पीड़ित प्रत्येक मरीज की जांच करने पर 99 प्रतिशत रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। चिकनगुनिया व डेंगू के डर से हर कोई साधारण बुखार से भी भयभीत हो जाता है। सिविल अस्पताल में चिकनगुनियां व डेंगू रोगियों के उपचार के लिए दो वार्ड स्थापित किए गए हैं।
ऐसे फैलता है चिकनगुनियां
एक बीमार व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद फिर स्वस्थ व्यक्ति को काटने से इस बीमारी का संक्रमण फैलता है। इसमें बुखार, खांसी, जुकाम, बदन में दर्द और जोड़ों में दर्द से पीड़ित हो जाता है। चिकनगुनियां बुखार जानलेवा नहीं कहा जाता। लेकिन इलाज व आराम न लेने पर यह कई मामलों में जानलेवा भी हो सकता है। यह मच्छर दिन में काटता है, इससे बचना चाहिए। जोड़ों में तेज दर्द होता है। इससे वे बेहद कमजोर महसूस करता है।
चिकनगुनियां का उपचार
चिकनगुनियां होने पर लगातार डाक्टर से परामर्श व इलाज लेते रहे।
रोगी को आराम करना चाहिए और पेय पदार्थ खूब लेने चाहिए।
चिकनगुनियां के लक्षण
मच्छर काटने के दो से सात दिनों के बाद चिकनगुनियां के लक्षण नजर आते हैं।
इसमें तेज बुखार के साथ जोड़ों, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द।
जी मचलना, भूख कम लगना और कमजोरी आना।
मच्छरों से बचाव एवं शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाएं
चिकनगुनियां और डेंगू एक खतरनाक वायरल रोग है जो की संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। अकेला एक संक्रमित मच्छर ही अनेक लोगों को डेंगू या चिकनगुनियां रोग से ग्रसित कर सकता है। अपने घर के हर कोने-कोने में साफ-सफाई रखें और गंदे पानी को एक जगह जमने न दें। रात में सोते वक्त मच्छरदानी, कंबल इत्यादि का जरूर प्रयोग करें। याद रखें डेंगू की कोई विशिष्ट चिकित्सा अभी तक उपलब्ध नहीं है। सिर्फ शुरुआती लक्षणों के वक्त ही इलाज कर व्यक्ति को बचाया जा सकता है। बुखार कैसा भी हो इन दिनों में यदि जल्दी आराम ना मिले तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और मच्छरों से बचाव एवं शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढांए। यही डेंगू से बचने का सबसे अच्छा उपाय है।
जागरूक रहें लोग
मौसम बदलने के चलते वायरल बुखार के मरीजों की काफी संख्या बढ़ रही हैं। ऐसे में लोग जागरूक रहें। जागरूकता से ही बीमारियों से बचा जा सकता है। घर में कीटनाशक दवा का छिडक़ाव करें। आजकल मार्केट में इस तरह के स्प्रे आ रहे हैं। इसके अलावा मच्छरों से बचाव के लोशन लगाएं। फुल आस्तीन वाले कपड़े पहने। बुखार होने पर तुरंत जांच कराएं और इलाज लें।
डॉक्टर सुभाषिणी चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल सिरसा।