बेघर होने के निकट पहुंच चुके 25 हजार थेहड़वासियों को अदालत से जोरदार झटका मिला है। स्थानीय सत्र अदालत ने सरकारी अपील पर फैसला सुनाते हुए थेहड़ पर स्टे हटा दिया है। ऐसे में अब प्रशासन के लिए 13 जून के नोटिस पर अमल करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। प्रशासन की तरफ थेहड़ पर बसे 3040 परिवारों 13 जून तक अपने मकान खाली करने का नोटिस दे रखा है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगभूषण गुप्ता की अदालत में शुक्रवार सुबह थेहड़ पर स्टे को लेकर डेढ़ घंटे तक वकीलों में बहस का दौर चला। अदालत का कहना है कि उसे इस बात से अनजान रखा गया कि थेहड़ पर हाईकोर्ट का फैसला आया हुआ है। जिला प्रशासन की तरफ से डीआरओ अमीचंद हाईकोर्ट के ऑर्डर कॉपी अदालत में पेश की। ऑर्डर कॉपी देखने के बाद अदालत ने थेहड़ पर पहले दिए स्टे को हटा लिया। अब थेहड़वासियों के पास प्रशासन के नोटिस पर अमल करने के लिए नौ दिन शेष बचे हैं। जैसे-जैसे 13 तारीख नजदीक आ रही है थेहड़वासियों के चेहरे पर चिंता लकीरें बढ़ती जा रही है।
जान दे देंगे लेकिन घर नहीं
थेहड़वासियों का कहना है कि पाई-पाई जमाकर उन्हें अपने आशियाने बनाए हैं। सरकार इसे अनाधिकृत निर्माण घोषित करके उन्हें उजाड़ने पर तुली है। जान दे देंगे लेकिन अपने घर छोड़कर नहीं जाएंगे। थेहड़ संघर्ष समिति की प्रधान एडवोकेट संजू बाला कहना है कि बीजेपी खुद को गरीबों का हितैषी बताती है परंतु थेहड़वासियों को बेघर होने से बचाने की दिशा में बीजेपी सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। सरकार को चाहिए की वो पहले हजारों थेहड़वासियों के पुनर्वास करे। उन्होंने कहा कि थेहड़ संघर्ष समिति को बदनाम करने व फूट डालने के इरादे से अफवाह फैलाई जा रही है कि संघर्ष समिति थेहड़वासियों से हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की एवज में रुपये वसूल रही है।
शरारती तत्व लोगों से वसूल रहे रुपये
एडवोकेट संजू बाला ने कहा कि कुछ शरारती तत्व हैं जो लोगों से रुपये ऐंठने में लगे हैं लेकिन संघर्ष समिति का उनसे कोई संबंध नहीं है। थेहड़वासी ऐसे लोगों की बातों में न आएं। उन्होंने कहा कि 13 जून के नोटिस पर अमल करने से पहले प्रशासन जनभावनाओं पर जरूर ध्यान दे। प्रशासन की तरफ से डीआरओ अमीचंद का कहना है कि अदालत द्वारा स्टे हटा लिए जाने के बाद 13 तारीख के नोटिस को लेकर किसी प्रकार की बाधा नहीं है।
इनेलो विधायकों ने की सीएम से मुलाकात
थेहड़वासियों को बेघर होने से बचाने के लिए इनेलो विधायकों ने वीरवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की। इनेलो विधायकों ने मुख्यमंत्री से कहा थेहड़वासियों को बसाने का काम करें ताकि उन्हें उजड़ने से बचाया जा सके। सरकार कम से कम 3040 परिवारों को जमीन अलॉट करके दो-दो कमरे बनाकर तो दे ही सकती है। इनेलो हर स्थिति में थेहड़वासियों के साथ खड़ी रहेगी। 13 जून को प्रशासन जबरन थेहड़ खाली करने का प्रयास करेगा तो इनेलो थेहड़वासियों के साथ मिलकर जोरदार ढंग से विरोध करेगी। पुनर्वास से पहले किसी भी सूरत में हजारों गरीब परिवार को बेघर होने नहीं दिया जाएगा।
पदम जैन, जिलाध्यक्ष इनेलो
मुख्यमंत्री ने अपने हाथ मिले लिया मामला
कुछ नेता राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए थेहड़वासियों को भ्रमित करते रहे। स्थानीय अदालत ने स्टे हटाने का आदेश दिया है लेकिन बीजेपी थेहड़वासियों को बेघर होने से बचाने के लिए जी जान से प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल थेहड़ मामले को खुद गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से इस बारे में चर्चा की। बीजेपी चाहती है कि कानून के मुताबिक हाईकोर्ट के माध्यम से ही इस समस्या का समाधान किया जाए। सोमवार को हाईकोर्ट में थेहड़ को लेकर याचिका दायर की जाएगी। अगर अदालत के माध्यम से राहत नहीं मिलती तो भी पहले थेहड़वासियों का पुनर्वास होगा।
-यतिंद्र सिंह, बीजेपी जिलाध्यक्ष
कांग्रेेस हर कदम पर थेहड़वासियों के साथ
स्थानीय बीजेपी नेता केवल थेहड़ पर फोटो खिंचाकर झूठी बयानबाजी में लगे हैं। अभी तक बीजेपी सरकार थेहड़वासियों को राहत देने का कोई फैसला नहीं ले पाई। बीजेपी सरकार थेहड़ पर रहने वाले हजारों परिवारों को सड़कों पर लाना चाहती है। ऐसा लग रहा है कि इस सरकार को गरीबों की कोई चिंता नहीं। कांग्रेस हर कदम पर थेहड़वासियों के साथ खड़ी रहेगी। थेहड़वासियों के साथ बैठक करके आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने सिरसा दौर के दौरान थेहड़ पर जाकर लोगों से मिलेंगे। बीजेपी सरकार गरीबों को उजाड़ने वाली अपनी सोच बदले।
होशियारी लाल शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष कांग्रेस एवं प्रदेश प्रवक्ता