आज अक्षय तृतीया है। जोकि बहुत खास है। आगामी दो माह में एक भी शुभ मुहूर्त नहीं है। पंडितों के अनुसार जुलाई में भी महज तीन ही शुभ मुहूर्त हैं। अक्षय तृतीय पर शहनाइयां गूंजेंगी। डबवाली क्षेत्र में स्थित सभी मैरिज पैलेस बुक हैं। इस बीच प्रशासन भी सख्त है। प्रशासन ने बाल विवाह रोकने के लिए पंचायतों के साथ-साथ मैरिज पैलेस मालिकों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। पैलेस बुक करते समय लड़का-लड़की के आयु प्रमाण पत्र को देखना अनिवार्य किया है। पंडित घनश्याम वेदपाठी, मुरारी लाल तथा मनीष शास्त्री ने बताया कि 27-28 अप्रैल को शुक्र ग्रह अस्त होने की वजह से लग्न शुभ नहीं था। यह अवस्था 10 जुलाई तक रहनी है। ऐसे में नौ मई को अक्षय तृतीया के मौके पर ही शुभ कार्य आरंभ किए जा सकते हैं।
अन्यथा दो माह की अवधि के बाद 13 तथा 14 जुलाई को शुभ कार्य संभव है। जुलाई में तीन तारीखों के बाद पुन: एक माह के लिए गुरु ग्रह अस्त हो जाएगा। इसके बाद अक्तूबर, नवंबर तथा दिसंबर में ही शुभ योग बन सकेगा। ऐसे में अक्षय तृतीया पर होने वाले शुभ कार्यों के लिए पंडितों की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। विवाह समारोह की बात करें तो डबवाली क्षेत्र का प्रत्येक मैरिज पैलेस बुक हो चुका है। कई मैरिज पैलेस के पास दिन और रात की बुकिंग हैं।
इनको जारी हुए निर्देश
जिले के सामुदायिक केंद्र, सार्वजनिक भवन, बैंकेट हाल, मैरिज पैलेस इत्यादि के मालिकों अथवा प्रभारी को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने बैंकेट हाल में आयोजित विवाह समारोह में बुकिंग करने से पहले लड़के व लड़की की जन्म अथवा आयु प्रमाण-पत्र की कॉपी अवश्य ले तथा अपने भवनों में बाल विवाह का आयोजन होने से रोके।
झूठी शिकायत करने पर होगी कार्रवाई
जिला बाल संरक्षण अधिकारी रेखा अग्रवाल ने बाल विवाह से संबंधित झूठी शिकायत करके जनता व प्रशासन को परेशान करने वाले चेताया है। उनके अनुसार अगर कोई भी व्यक्ति ऐसी झूठी अफवाह फैलाता है तो प्रशासन द्वारा ऐसे व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी।
अक्षय तृतीया का महत्व क्यों है, जानिए।
आज ही के दिन मां गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था ।
महर्षि परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
मां अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था।
द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था ।
कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था ।
कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।
सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था ।
ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था ।
प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्रीनारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोला जाता है।
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रह चरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो वस्त्र से ढके रहते है ।
इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था ।
अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य का प्रारंभ किया जा सकता है।