जिला शिक्षा विभाग के पास अभी तक पहली से आठवीं कक्षा तक के 98 हजार 987 विद्यार्थियों की पुस्तकों के आदान प्रदान का रिकार्ड नहीं पहुंचा है। राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई खराब न हो इसलिए निदेशालय ने प्रमोट हो चुके विद्यार्थियों की किताबें जूनियर विद्यार्थियों को देने के आदेश दिए थे। शिक्षा अधिकारी के अनुसार 80 फीसदी किताबों को आदान प्रदान हो चुका है, लेकिन किसी भी खंड के सभी स्कूलों की किताबों से संबंधित रिपोर्ट अभी भी जिला शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में नहीं है।
राजकीय स्कूलों में सत्र 2020-21 में पहली से आठवीं तक के 98987 विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट किया गया था। विद्यार्थियों की किताबें न छपने के चलते निदेशालय ने विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसलिए पुस्तकें आदान प्रदान की प्रक्रिया से अगली कक्षा में प्रमोट हो चुके विद्यार्थियों की पुस्तकें जूनियर को देने के आदेश दिए थे। जिला शिक्षा विभाग को स्कूल मुखियाओं द्वारा मौखिक तौर पर दी जानकारी के अनुसार 70 फीसदी विद्यार्थियों को पुस्तकें दी जा चुकी हैं, लेकिन विभागीय गूगल फार्म रिकार्ड के अनुसार 50 फीसदी विद्यार्थियों के पास ही किताबें पहुंच पाई है। इसलिए विभाग ने एक बार फिर पाठ्य पुस्तकों के पारस्परिक आदान-प्रदान के संदर्भ में 10 दिवसीय विशेष अभियान चलाकर 5 जुलाई तक हर हाल में गूगल फॉर्म में पुस्तकों संबंधी डाटा भरकर विभाग को भेजने के निर्देश दिए है। पत्र के माध्यम से विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर फिर भी कोई ढिलाई बरती गई तो स्कूल मुखिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रिकॉर्ड भेजने के नाम पर स्कूल साधे हुए हैं चुप्पी
जूनियर बच्चों के लिए सीनियर बच्चों के पास से लाई गई किताबों का रिकॉर्ड गूगल फार्म पर अपलोड नहीं किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने बीती 28 जून को पत्र जारी कर आदान-प्रदान प्रक्रिया के तहत बच्चों तक पहुंचाई गई पुस्तकों की जानकारी 15 जुलाई तक गूगल फॉर्म पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे, लेकिन स्कूलों ने अभी तक सही जानकारी अपलोड नहीं की है। हालांकि विभाग ने पांच बार स्मरण पत्र भेजा जा चुका है, पर रिकॉर्ड भेजने के नाम पर स्कूल मुखिया चुप्पी साधे है।
बाजार में भी नहीं उपलब्ध है किताबें
राजकीय स्कूलों में पढ़ाने वाले विद्यार्थियों को पहली बार सत्र 2021-22 में शिक्षा निदेशालय द्वारा एनसीआरटी की किताबें नहीं दी गई है। किताबों के बदले में उनके खातों में पैसे दिए जाने है, वो भी अभी तक विद्यार्थियों के खाते में नहीं डाले गए। विद्यार्थी जब स्कूल की किताबें लेने पुस्तक विक्रेता के पास जाता है तो उसके पास भी किताबें उपलब्ध नहीं है। पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हो चुकी है लेकिन विद्यार्थियों के पास पढ़ने के लिए पुस्तकें नहीं हैं।
शिक्षा निदेशालय द्वारा पाठ्य पुस्तकों के परस्पर आदान-प्रदान को लेकर विशेष अभियान चलाने के लिए विभागीय आदेश मिले हैं। जिसे अध्यापकों व स्कूल मुखियाओं को भेज दिया गया है। अभियान के तहत 15 जुलाई तक किताबों की पूरी जानकारी गूगल फार्म पर अपलोड करनी है। अगर कोई लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- आत्म प्रकाश मेहरा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, सिरसा।