फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

60 की उम्र में 120वीं बार रक्तदान

Mon, 10 Oct 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
विज्ञापन
विज्ञापन
 शिक्षक एक विद्यार्थी के लिए मार्गदर्शक एवं उसे ज्ञान प्रदान करने वाला होता है परंतु अगर कोई शिक्षक खुद अपना उदाहरण प्रस्तुत करके अगर विद्यार्थियों को प्रेरित है तो उनके मानसिक पटल पर उनकी एक अलग मिसाल कायम होती है।  ऐसे में हर कोई उनका अनुसरण करने का प्रयास करता है। इसी कडी में जेसीडी विद्यापीठ में स्थापित मैमोरियल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप स्नेही ने गत 25 सितंबर को जन नायक चौधरी देवीलाल के जन्मदिवस पर जेसीडी सुपरस्पैशलिटी एवं ट्रामा सेंटर में आयोजित मेगा रक्तदान शिविर में 120वीं बार रक्तदान करके शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकार के लिए युवाओं को प्रेरित किया है।
विज्ञापन

रक्तदान में अहम योगदान देने पर डॉ. प्रदीप स्नेही को हरियाणा के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। वहीं उन्होंने 60 वर्ष की आयु में 120वीं बार रक्तदान करके कॉलेज के विद्यार्थियों के समक्ष एक नया उदाहरण पेश किया है। डॉ. स्नेही ने बताया कि वे वर्ष 1977 से लगतार रक्तदान करते आ रहे हैं, जिसके लिए उन्हें हरियाणा के पूर्व शिक्षामंत्री, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, पीजीआई चंडीगढ़, हरियाणा रेडक्रॉस सोसायटी व जिला प्रशासन द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. प्रदीप स्नेही का मानना है कि रक्तदान मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा दान है तथा प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में रक्तदान अवश्य करना चाहिए क्योंकि यही एक ऐसी वस्तु है जो निर्मित नहीं की जा सकती बल्कि प्रदान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आपके रक्त की एक-एक बूंद किसी न किसी मनुष्य का जीवन बचा रही होती है और आपके एक छोटे से प्रयास के माध्यम से यदि किसी व्यक्ति की जान बचती है तो इस संसार में इससे बढ़कर कोई अन्य दान नहीं है। डॉ. स्नेही ने पहली बार रक्तदान करते हुए घबराने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवद्र्धन करते हुए कहा कि रक्तदान करने के पश्चात् जब आपके शरीर में नया रक्त बनता है तो वह आपको नई ऊर्जा प्रदान करता है। बता दें कि डॉ. स्नेही शिक्षा के क्षेत्र में उज्जाला करने के साथ-साथ रक्तदान के क्षेत्र में विशेष पहचान बना चुके हैं जिससे युवा वर्ग को प्रेरणा मिल रही है। उनका मानना है कि जब तक संभव होगा वे लगातार रक्तदान करते रहेंगे। फिलहाल उन्हें जरा भी कमजोरी या संकोच नहीं हो रहा है। वे मानते हैं कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता क्योंकि इससे किसी के प्राण बचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें