सरकारी अधिकारियों की ढिलाई की वजह से सरकारी सुविधाओं से वंचित हजारों गरीब परिवारों का मामला मानवाधिकार आयोग में जा पहुंचा है। आयोग ने मामले में नोटिस जारी कर जिला उपायुक्त से आठ सप्ताह में रिपोर्ट देने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर निर्धारित की है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट कौंसिल के जिला महासचिव अमरजीत सिंह सोहल की शिकायत पर आयोग ने जवाब-तलबी की है।
अमरजीत सिंह ने सिरसा जिले के ग्रामीण गरीब परिवारों से बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए मांगें गए आवेदनों और जांच टीम द्वारा पाए गए पात्र परिवारों को बीपीएल सूची में शामिल न करने को लेकर आयोग में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि जिले के अधिकारियों ने सात ब्लाक में लगभग पांच हजार परिवारों को बीपीएल सूची में शामिल किए जाने का पात्र पाया। अधिकारियों की टीम ने 12 जुलाई 2014 को अपनी अंतिम रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपनी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर इन परिवारों के पीले कार्ड बनने थे, लेकिन अधिकारियों ने इस मामले में दिलचस्पी नहीं दिखाई। दो साल का लंबा अरसा बीतने के बावजूद हजारों गरीब परिवार आज भी बीपीएल सूची में शामिल होने का इंतजार कर रहे हैं। बीपीएल सूची में शामिल होने पर वे सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं का इस्तेमाल कर पाते।
लंबी प्रक्रिया के बाद चयनित किए गए इन परिवारों को बीपीएल सूची में शामिल करने की अनेक बार गुहार भी लगाई गई, लेकिन अधिकारियों के रवैये में कोई सुधार नहीं हुआ। मीटिंग न होने का हवाला देकर अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश करते रहे जबकि आरटीआई में मांगी गई जानकारी में अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय द्वारा मीटिंग आयोजित किए जाने और संबंधित अधिकारियों को हिदायत देने की बात सामने आई।
अधिकारियों की मनमानी आरटीआई से सामने आई
गरीबों को उनके हक से वंचित करने वाले सरकारी अधिकारियों की मनमानी आरटीआई से सामने आ सकी। आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रजीत द्वारा अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय से इस बारे में जानकारी मांगी गई थी। एक दिसंबर 2015 को मांगी गई जानकारी डीडीपीओ के समक्ष दो बार प्रथम अपील होने के बावजूद पूरी नहीं मिल पाई है। सात में से दो ब्लाक ने तो आज तक भी पूरी जानकारी नहीं दी। आरटीआई में ही यह तथ्य सामने आ सका कि सरकारी अधिकारियों ने लगभग 35 हजार गरीब परिवारों में से पांच हजार परिवारों का चयन किया।
कमेटी में कौन कौन रहा शामिल
उपायुक्त के आदेश पर सिरसा ब्लाक के लिए एसडीएम सिरसा की चेयरमैनशिप में कमेटी गठित की गई, जिसमें डीएफएससी, पंचायतीराज विभाग का एसडीओ, जिला कल्याण अधिकारी व बीडीओ सिरसा को सदस्य नियुक्त किया गया। बड़ागुढ़ा व नाथूसरी चोपटा ब्लाक के लिए डीडीपीओ सिरसा को चेयरमैन, एसडीओ पंचायतीराज, खंड शिक्षा अधिकारी, नायब तहसीलदार चोपटा, नायब तहसीलदार कालांवाली, बीडीओ बड़ागुढ़ा व चोपटा को सदस्य बनाया गया। ऐलनाबाद ब्लाक के लिए एसडीएम ऐलनाबाद को चेयरमैन, एसडीओ पंचायतीराज, खंड शिक्षा अधिकारी ऐलनाबाद, टीडब्ल्यूओ व बीडीओ ऐलनाबाद को सदस्य बनाया गया। डबवाली व ओढां ब्लाक के लिए एसडीएम डबवाली को चेयरमैन नियुक्त किया गया। पंचायतीराज विभाग के एसडीओ, बीईओ डबवाली व ओढां, नायब तहसीलदार डबवाली, टीडब्ल्यूओ डबवाली, बीडीपीओ डबवाली व ओढां सदस्य बनाया गया। इसी प्रकार रानियां ब्लाक के लिए जिला राजस्व अधिकारी को चेयरमैन, एसडीओ पंचायतीराज, बीईओ रानियां, नायब तहसीलदार व बीडीपीओ रानियां को सदस्य बनाया गया था।
क्या रही प्रक्रिया
प्रदेश सरकार द्वारा गरीब परिवारों को चिह्नित करने के लिए जून 2014 में सर्वे कार्य किया गया। पात्र-अपात्र की सूची 26 जून को बोर्ड पर चस्पा की गई। 28 जून से तीन जुलाई तक दावे व आपत्तियां प्राप्त की गई तथा तीन जुलाई से 10 जुलाई तक दावे एवं आपत्तियों का निपटान किया गया। आवेदकों की पात्रता-अपात्रता बारे अंतिम रिपोर्ट 12 जुलाई 2014 को उपायुक्त को भेजी जानी थी। इस बारे में अतिरिक्त उपायुक्त की ओर से अंतिम रिपोर्ट भेजने के बारे में बार-बार लिखा गया। 24 मार्च 2015 को अधिकारियों की बैठक भी हुई लेकिन अंतिम सूची उपायुक्त को नहीं भेजी गई।