बेशक इन दिनों जिले में कोरोना संक्रमण के मामले कम होते जा रहे हैं लेकिन तीसरी स्टेज को लेकर प्रशासन अब भी अलर्ट है। खुद सिरसा डीसी भी उन दो दिनों में तनाव में रहे जब सिरसा में ऑक्सीजन का संकट आया। प्रशासन ने इस दौरान चिकित्सकों की सहायता से इस संकट को झेला और सिरसा में ऑक्सीजन की कमी से किसी मरीज की मौत का कोई मामला सामने नहीं आया। सिरसा डीसी प्रदीप कुमार ने सोमवार को अमर उजाला के साथ अपने अनुभव साझा किए।
डीसी प्रदीप कुमार ने बताया कि बेशक कोरोना के मामले कम होते जा रहे हैं परंतु प्रशासन अब भी अलर्ट है। जिले को कोराना मुक्त तभी किया जा सकता है जब लोग सहयोग करें, लोग घरों से बाहर ना निकले और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते रहे। डीसी ने माना कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते केसों के बीच दो दिन अति तनाव भरें रहे। जिसे कि जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। मई की शुरूआत में सिरसा में ऑक्सीजन की कमी आ गई, यह कमी तब आई जब कोर्ट के आदेश पर हरियाणा को दिल्ली को ऑक्सीजन आपूर्ति करनी पड़ी। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी आने पर चिकित्सकों की सहायता से मरीजों का ऑक्सीजन लेवल मेंटेन रखा गया। इसी बीच वे हिसार में गैस सप्लाई प्लांट गए और ऑक्सीजन लेकर आए। ऑक्सीजन मिलने के बाद हमनें राहत महसूस की। कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए हम बंदोबस्त कर रहे हैं। जिले में तीन ऑक्सीजन प्लांट लगवा रहे हैं। सिरसा सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण अंतिम चरण में है। इस प्लांट में एक हजार लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट पैदा होगी। जबकि डबवाली में एक एनआईआर की कंपनी सीएसआर फंड से ऑक्सीजन प्लांट लगाने जा रही है। इसी प्रकार से ऐलनाबाद सिविल अस्पताल में भी ऑक्सीजन प्लांट तैयार किया जा रहा है।
समाज सेवी संस्थाओं का रहा बहुत योगदान : डीसी प्रदीप कुमार का कहना है कि कोरोना का मुकाबला हमने अकेले नहीं किया बल्कि समाज सेवी संस्थाओं का बहुत योगदान रहा। संस्थाओं ने मिलजुल कर दवाईयां बांटी। हमने 815 रुपये में किट लोगों को उपलब्ध करवाई। साथ ही दस दिनों की दवाई का पैकेट 117 रुपये में तैयार करके समाज सेवी संस्थाओं के सहयोग से बांटा। सरकार से जो पैसा हमारे पास आया है, वह अब भी हमारे पास बचा हुआ है। जिले के आरएमपी चिकित्सकों ने ग्रामीण स्तर पर कोरोना के मरीजों का इलाज किया, उनका भी बहुत सहयोग रहा। गांवों में बने आइसोलेशन सेंटर में स्टॉफ की कमी पर उपायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में खाली पदों को सरकार द्वारा ही भरा जा सकता है। स्थानीय स्तर पर ही नियुक्ति नहीं की जाती। स्टॉफ की कमी को देखते हुए आईएमए के चिकित्सकों ने सहयोग किया। जेसीडी प्रबंधन की ओर से अस्पताल को कोविड केयर सेंटर में तबदील किया। जिसमें कि आईएमए के चिकित्सकों ने निशुल्क लोगों का इलाज किया। डीसी प्रदीप कुमार ने बताया कि कोरोना में एंबुलेंस, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड तक के रेट प्रशासन ने तय कर दिए है। ताकि लोगों से निजी अस्पताल संचालक व अल्ट्रासांउड संचालक अधिक रेट न वसूल सकें, बाकायदा इसके लिए अस्पतालों के बाहर रेट सूची भी चस्पा की गई।