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नगर परिषद सिरसा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव, इनेलो ने बचाई भाजपा की लाज

Tue, 13 Dec 2016 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सिरसा। नगर परिषद सिरसा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में इनेलो के सांसद और विधायक ने भाजपा के पक्ष में मतदान कर भाजपा की लाज बचा ली। अध्यक्ष पद पर भाजपा की शीला रानी सहगल ने कांग्रेस-हलोपा गठबंधन की रीना सेठी को मात्र एक वोट के अंतर से पराजित किया जबकि उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस के रणधीर सिंह ने 18 मत हासिल की तीन मतों के अंतर से जीत हासिल की। भाजपा और इनेेलो इस पद पर हाथ मलते ही रह गए। भाजपा के तीन पार्षदों ने क्रास वोटिंग की। राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, सिरसा जिला भाजपा प्रभारी संजय भाटिया सिरसा में डेरा डाले हुए थे। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए राहुल सेतिया ने भाजपा को अपनी ताकत का अहसास करवा ही दिया।
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    नगर परिषद के प्रधान के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में पंजाबी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नेता राहुल सेतिया और इनेलो के सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी और विधायक मक्खन सिंगला ने भाजपा की लाज रखने का काम किया। उनके प्रयासों से भाजपा की झोली में प्रधानगी आ सकी। सेतिया समर्थित भाजपा पार्षद शीला रानी सहगल को 17 वोट मिले जबकि कांग्रेस और हलोपा गंठबंधन की संयुक्त उम्मीदवार रीना सेठी को 16 वोट मिले। इस तरह मात्र एक वोट से अध्यक्ष की कुर्सी भाजपा के पास चली गई। चुनाव में 31 पार्षदों सहित इनेलो एमएलए और इनेलो सांसद ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
उल्लेखनीय है कि नगर परिषद के 25 सितंबर को चुनाव हुए थे। इन चुनावों में भाजपा को 15, हलोपा को छह, कांग्रेस को पंाच, इनेलो को एक और चार आजाद उम्मीदवारों ने बाजी मारी थी। भाजपा में गुटबंदी के चलते भाजपा चेयरमैन के चुनाव का सामना करने से कतरा रही थी। चेयरमैन के चुनाव को लेकर पहले 18 नवंबर को बैठक रखीं गई थी, जिसमें भाजपा पार्षद शामिल नहीं हुए थे। बैठक मेें 12 दिसंबर के लिए चुनाव की तिथि घोषित की गई।
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    सोमवार को नगर परिषद में चुनाव की पूरी तैयारी कर ली गई थी- हलोपा और कांग्रेस समर्थक पार्षद हलोपा नेता गोबिंद कांडा, होशियारी लाल शर्मा, नवीन केडिया, शीशपाल केहरवाला, कुलदीप गदराना के साथ परिषद कार्यालय में पहुंच गए थे। काफी हंगामे बीच चुनाव अधिकारी एवं एसडीएम परमजीत सिंह चहल कार्यालय पहुंचे और काफी देर तक चले हंगामे और नारेबाजी के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। भाजपा की ओर से आखिरकर वार्ड 16 की पार्षद शीला रानी सगहल ने नामाकंन दाखिल किया जिनका प्रस्ताव वैशाली रातुसरिया और सुमन शर्मा ने किया जबकि कांग्रेस-हलोपा उम्मीदवार रीना सेठी के नाम का प्रस्ताव राजेश कुमार और विकास जैन ने किया। सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी और विधायक मक्खन लाल पहले ही वोट डालने के लिए कक्ष में पहुंच गए थे। कुल 33 मत डाले गए। वोटिंग ईवीएम से हुई।  प्रधान पद पर शीलारानी को 17 और रीना सेठी को 16 मत मिले इस प्रकार शीला ने एक वोट के अंतर से जीत हासिल की। उप प्रधान पद के लिए कांग्रेस की ओर से रणधीर सिंह और भाजपा-इनेलो की ओर से ममता सैनी ने नामांकन किया। रणधीर को 18 और ममता को 15 वोट मिले। ऐसे में उप प्रधान पद कांग्रेस-हलोपा के खाते में चला गया। दोनों ही पदों पर भाजपा के कुछ पार्षदों ने क्रास वोटिंग की। ममता सैनी पहले कांग्रेस-हलोपा के साथ थी पर आज भाजपा के साथ दिखाई दी।
    इससे पूर्व भाजपा में चेयरमैन के लिए प्रत्याशी चयन को लेकर मैराथन बैठकें हुई लेकिन आज मतदान तक किसी उम्मीदवार के नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई। मतदान की स्थिति आने पर भाजपा की प्रत्याशी वैशाली रातुसरिया और शीला सहगल ने दावेदारी जताई जबकि सांझे विपक्ष की ओर से रीना सेठी चुनाव मैदान में उतरी। अंतिम क्षणों में वैशाली रातुसरिया ने अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद शीला सहगल व रीना सेठी के बीच सीधा मुकाबला हुआ।

जीत कर भी हार गई भाजपा
सिरसा। नगर परिषद के चुनाव में भले ही शीला सहगल ने जीत हासिल की हो पर इस चुनावों में भजपा अपने आप से ही हार गई। गुटबाजी को लेकर भाजपा के तीन धड़े सक्रिय थे। हर धड़े की ओर से अपने-अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर ताल ठोकी जा रही थी। दशकों से पार्टी से जुड़े निष्ठवान कार्यकर्ता, पार्टी लाइन में रहने वाले, आरएसएस पृष्ठभूमि वाले प्रदीप रातुसरिया की पत्नी वैैशाली रातुसरिया को चेयरमैन बनाने का दवाब डाला जा रहा था पर भाजपा नेता राहुल सेतिया ने उनकी एक नहीं सुनी और अपनी प्रत्याशी शीला सहगल के लिए चेयरमैनी मांगी। भाजपा में सहमति न होने की वजह से चुनाव को टालना भी पड़ा। सोमवार को मतदान के वक्त भी भाजपा की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। दो-दो प्रत्याशियों के चुनाव मैदान में आने से पार्टी को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। शीला सहगल की जीत ने भले ही भाजपा की लाज रख ली, मगर इस जीत के बावजूद पार्टी व संगठन से जुड़े लोग खुश नजर नहीं आए। उन्हें जीत के बाद भी हार का अहसास हुआ।


इनेलो ने किया सरेंडर
सिरसा। राजनीति में कोई स्थायी दोस्त और दुश्मन नहीं होता। राजनीति में कब क्या हो जाए, कुछ कहा भी नहीं जाता। यह नगर परिषद के चेयरमैन के चुनाव में एक बार फिर जाहिर हो गया। चेयरमैन के चुनाव में भाजपा की घोर विरोधी इनेलो ने साथ दिया। भाजपा उम्मीदवार को जिताने के लिए पार्टी के एमएलए और एमपी तक को मतदान करने के लिए नगर परिषद कार्यालय आना पड़ा। इनेलो ने चेयरमैन के चुनाव में भाजपा को समर्थन के बदले उपप्रधान पद मांगा। इनेलो को कोसने वाली भाजपा ने शर्त पर सहमति जताई और उपप्रधान के लिए इनेलो को समर्थन दिया। इनेलो का इन चुनावों अधिकृत एक ही पार्षद सुनील सहारण वार्ड नंबर नौ से विजयी हुआ था और उसने ममता सैनी के लिए समर्थन मांगा।

और झोली रह गई खाली की खाली
सिरसा। कहने को तो नगर परिषद का प्रधान पद भाजपा के खाते में गया है। पर इस भाजपा के बजाए राहुल सेतिया का उम्मीदवार ज्यादा माना जा रहा है। किसने साथ दिया किसने दगा किया अब बाद की बातें हैं पर चुनाव में न भाजपा को कुछ हासिल हुआ और न ही इनेलो व हलोपा को। सेतिया भले ही भाजपा में है लेकिन उनकी पृष्ठभूमि कांग्रेस की रही है। ‘असली’ भाजपा को चुनाव में कुछ हासिल नहीं हुआ। भाजपा को समर्थन देकर उपप्रधान अपना बनाने मंसूबे इनेलो के भी पूरे नहीं हुए। इनेलो भी खाली हाथ रही। हलोपा ने कांग्रेस से समझौता कर खूब ताल ठोकी। हलोपा ने प्रधान पद तो कांग्रेस को उपप्रधान का पद दिया। चुनाव नतीजों में हलोपा की झोली खाली रहीं, जबकि कांग्रेस के रणधीर सिंह विजयी हुए।

हलोपा-कांग्रेस ने किया हंगामा
सिरसा। नगर परिषद के चुनाव एक बार फिर स्थगित किए जाने की आशंका को लेकर हलोपा व कांग्रेस नेताओं ने जमकर हंगामा किया। आज प्रदेश भर में राजकीय अवकाश है, इसलिए हलोपा व कांग्रेस नेताओं ने आज भी चुनावी बैठक टाले जाने की आशंका को लेकर हंगामा किया। ग्यारह बजे तक चुनाव अधिकारी परमजीत सिंह चहल नहीं पहुंचे तो हलोपा-कांगे्रस के पार्षदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। सवा ग्यारह बजे कांग्रेस और हलोपा पार्षद कार्यालय में गए और चुनाव अधिकारी की कुर्सी पर उपायुक्त के नाम संबोधित ज्ञापन रखकर  आज ही चुनाव करवाए जाने की मांग की। नगर परिषद में हंगामे की स्थिति कई घंटे तक बनी रही। इसके चुनाव प्रक्रिया की औपचारिकता शुरू होने पर हंगामा शांत हुआ।

गेट तोड़ा, गमले तोडे़, हुई खूब धक्का मुक्की
सेामवार को 11 बजकर 50 मिनट पर सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी, विधायक मक्खन सिंगला, पार्षद ममता सैनी और सुनील सहारण परिषद कार्यालय पहुंचे तो कांग्रेस और हलोपा को लगा कि ये तो भाजपा के साथ चले गए। इसके बाद कांग्रेस और हलोपा नेताओं ने गेट का घेराव कर नारेबाजी शुरू कर दी। जैसे ही भाजपा नेता अपने पार्षदों को लेकर आए तो कांग्रेस और हलोपा नेताओं ने विरोध करते हुए उन्हें अंदर जाने रोक दिया। भाजपा ने भी धक्का मारकर उन्हें गेट से दूर किया और साथ ही पुलिस ने भी धक्का मुक्की तो गेट टूट गया और लोग नीचे आ गिरे इससे कई गमले टूट गए।  बाद में कुछ देर नारेबाजी हुई। फिर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

समान विकास होगा : सहगल
सिरसा। नगर परिषद की चेयरपर्सन शीला सहगल के पति प्रेम सहगल ने जीत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत सभी की सांझी जीत है। उनका लक्ष्य सिरसा का समान विकास करवाना है। वे भाषणबाजी में विश्वास नहीं करते और न ही उन्हें भाषण देने आते। वे काम में विश्वास करते है और अब चेयरमैनी मिलने के बाद सिरसा के सभी वार्डों का समान रूप से विकास करवाया जाएगा। उनके लिए कोई पराया नहीं है।

 पहले चुनाव में झटकी प्रधानगी
सिरसा। नगर परिषद की नवनिर्वाचित चेयरपर्सन शीला सहगल ने पहली ही बार में चेयरमैनी हासिल की। उन्होंने वार्ड नंबर 16 से चुनाव जीता। उन्होंने न केवल चुनाव जीता बल्कि सर्वाधिक मतांतर से जीतने का प्रदेशभर में रिकार्ड बनाया। उन्होंने वार्ड चुनाव में कुल 2793 वोटों में से 2224 वोट हासिल किए थे। उनके रिकार्ड मतों के अंतर से जीत की वजह से ही भाजपा नेता राहुल सेतिया शीला सहगल को चेयरमैन बनाने के लिए दबाव बनाए हुए थे। दरअसल, वार्ड नंबर 16 में शीला सहगल के पति प्रेम सहगल ने जो कार्य किया। वह अपने आप में मिसाल है। उन्होंने वार्ड वासियों से जो रसूख बनाए, उसी की वजह से सहगल परिवार लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने में कामयाब रहा। पेशे से टेलर मास्टर रहे प्रेम सहगल को राहुल सेतिया ने वर्ष 2005 में चुनाव मैदान में उतारा। प्रेम सहगल आसानी से विजयी रहें। इस दौरान उन्हें वार्डवासियों की सेवा की। घर-द्वार पर जाकर लोगों के कार्य किए। इसी कारण वर्ष 2010 में जब वार्ड महिला आरक्षित घोषित कर दिया गया तब उनके छोटे भाई की पत्नी नीरू सहगल को चुनाव मैदान में उतारा गया। वार्डवासियों ने निराश नहीं किया। अब 2016 में प्रेम सहगल की पत्नी शीला सहगल चुनाव मैदान में उतरी। वार्डवासियों ने सहगल परिवार की सेवा के मेवे से उनकी झोली भर दी। रिकार्ड मतों के अंतर से जीतने वाली शीला सहगल राजनीतिक दांवपेंचों के बीच पहली ही बार में चेयरपर्सन का गौरव हासिल करने में कामयाब रही।


 पुलिस ने संभाला मोर्चा
सिरसा। नगर परिषद के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के चुनाव को लेकर पुलिस ने अतिरिक्त सतर्कता बरती। डीएसपी विजय कक्कड़ स्वयं मोर्च पर डटे रहें। किसी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए पुलिस मुस्तैद रही। वर्दी व सादी वर्दी के अलावा महिला पुलिस भी तैनात रहीं। सुबह चुनाव करवाने को लेकर हलोपा-कांग्रेस द्वारा नारेबाजी की गई। कुछ समय के लिए हंगामेदार स्थिति रहीं। असामाजिक तत्वों द्वारा कोई गड़बड़ी न फैला दी जाए इसलिए पुलिस ने अतिरिक्त सतर्कता बरती। पुलिस की मौजूदगी की वजह से चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हो पाए।


और आधा घंटा में बन गई प्रत्याशी
सिरसा। वाइस चेयरमैन के चुनाव लेकर रोचक घटनाक्रम सामने आया। वार्ड नंबर-6 से प्रत्याशी ममता सैनी हलोपा-कांग्रेस के गुट में शुरू से शामिल रहीं। बीती 18 नवंबर की बैठक में भी वह विपक्षी दलों के साथ थी। वे हलोपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ नगर परिषद पहुंची। चुनाव टालने की आशंका को लेकर दिए गए धरने में भी वह शामिल हुए। अचानक संदेश आया और वह भाजपा खेमे में जा पहुंची। इनेलो द्वारा भाजपा को समर्थन देने पर सहमति जताई गई। बाद में ममता सैनी भाजपा पार्षदों के साथ बस में सवार होकर नगर परिषद पहुंची। ममता सैनी को उप प्रधान पद पर उतारा गया। भाजपा और इनेलो ने ममता के पक्ष में वोट डाले। पर ममता को 33 में से मात्र 15 ही वोट मिले।
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