प्रदेश में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की मांग को लेकर 21 फरवरी से भूख हड़ताल पर डटे आंदोलनकारियों ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।
सांसद अशोक तंवर के आवास के सामने अनशन पर बैठे सिखों ने फिलहाल भूख हड़ताल को स्थगित कर दिया है। एचएसजीपीसी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि चुनावों के बाद भूख हड़ताल फिर से शुरू कर दी जाएगी और मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखा जाएगा। भूख हड़ताल का समापन अरदास के बाद किया गया।
सांसद आवास के बाहर धरनास्थल पर बृहस्पतिवार को सिख समुदाय की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें अलग कमेटी की मांग को लेकर प्रदेश के सभी सिखों से कांग्रेस का चुनावों में बहिष्कार करने का ऐलान किया गया। एचएसजीपीसी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि कांग्रेस ने पिछले चुनावों में अपने चुनावी एजेंडे में अलग कमेटी की मांग को शामिल कर प्रदेश के सिखों को गुमराह किया था।
सरकार बनने के बाद इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष में कई उतार-चढ़ाव आते हैं, जिससे कोई असर नहीं पड़ता, बल्कि एकजुट होकर लड़ी जाने वाली लड़ाई में आखिर जीत अवश्य होती है। एसजीपीसी सदस्य बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही सिखों के साथ गद्दारी करती आई है।
उन्होंने कहा कि अब सिख इसे बर्दास्त नहीं करेंगे, बल्कि चुनावों में इसका जवाब दिया जाएगा। यह लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का विरोध किया है और अब भी करेंगे, क्योंकि बादल सिख होने के बावजूद नहीं चाहते कि प्रदेश में अलग कमेटी बने
इस अवसर पर की गई अरदास के बाद भूख हड़ताल समाप्त करने का ऐलान किया गया और चुनाव के बाद फिर से संघर्ष की बात कही। इस अवसर पर सुखविंद्र सिंह खालसा, मालक सिंह, गुरचरण सिंह संधु, बलि सिंह, स्वर्ण सिंह विर्क, जसबीर सिंह खालसा, हरमन सिंह, करनैल सिंह, अपार सिंह, सुरजीत सिंह और संपूर्ण सिंह रानियां आदि ने संघर्ष में साथ देने वालों का आभार किया।
यह पड़ेगा असर
प्रदेश में लगभग साढ़े 16 लाख सिख हैं। वहीं, यहां पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की 11 सीटें हैं। इनमें से एचएसजीपीसी से बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला विजयी हुए थे।
एचएसजीपीसी के महासचिव गुरचरण सिंह संधू ने कहा कि तीन लाख सिख अलग कमेटी के लिए शपथपत्र दे चुके हैं और अब यह संख्या और ज्यादा बढ़ चुकी है। प्रदेश में अंबाला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सिरसा, फतेहाबाद और जींद आदि जिलों में सिखों की तादाद अच्छी है। इस बार लोकसभा चुनाव में कांटे की टक्कर को देखते हुए एचएसजीपीसी का विरोध भी कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन सकता है।
क्यों है विरोध
जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि जब तक हरियाणा के लिए अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नहीं होगी तब तक यहां के गुरुद्वारा का पूरी तरह विकास नहीं हो सकेगा। यहां के चढ़ावे को पंजाब में भेजा जाता रहेगा।
यूं चला सिरसा में आंदोलन
12 फरवरी को सिख समुदाय के लोग सांसद के आवास के बाहर धरने पर बैठे। सांसद अशोक तंवर ने धरनास्थल पर जाकर हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहॉक) के प्रधान जगदीश झींडा से मुलाकात की, लेकिन सिख नहीं माने। दो मार्च को सांसद फिर उनसे मिले।
21 फरवरी को सिख युवक जरनैल सिंह धरनास्थल पर आमरण-अनशन पर बैठे। 26 फरवरी की रात प्रशासन के आदेश पर पुलिस उन्हें जबरन उठा ले गई और सामान्य अस्पताल के बीच निजी वार्ड में रखा। उपचार लेने से मना करने पर चिकित्सकों ने हाथ बांधकर ग्लूकोज की बोतल लगाई।
27 फरवरी को जरनैल सिंह के स्थान पर रतिया निवासी स्वर्ण सिंह अनशन पर बैठ गए। इसी बीच जरनैल सिंह ने मीडिया कर्मियों को बताया कि उन्हें नशे के टीके लगाए जा रहे हैं ताकि वे सोते रहे और कुछ बोले न।
04 मार्च को सिखों ने उपायुक्त कार्यालय घेरा, जरनैल सिंह को अस्पताल से छुट्टी, फिर धरने पर बैठे
05 मार्च को सिख दिल्ली में तंवर के साथ सोनिया गांधी से मिले, लेकिन अब लग चुकी है आचार संहिता, मुद्दा फिर लटका