फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस को झटका : बिना एफआईआर जेल भेजे नशा तस्कर को हाईकोर्ट ने किया रिहा, आरोपी पर मादक पदार्थ तस्करी के 9 केस दर्ज

विज्ञापन
विज्ञापन
हितेश चतुर्वेदी
विज्ञापन



सिरसा। जनहित का हवाला देकर नशा तस्करी के आरोपी को बिना एफआईआर दर्ज किए हिरासत में लेकर जेल भेजने के मामले में पुलिस को बड़ा झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी तस्कर सिरसा जिले के गांव असीर निवासी मक्खन सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए गृह विभाग के आदेश को रद्द कर उसे रिहा करने का निर्देश दिया है।
गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से 24 मार्च 2025 को पारित आदेश के आधार पर पुलिस अधीक्षक ने मक्खन सिंह को 27 मार्च को एनडीपीएस एक्ट के तहत जेल भेजा था। आरोपी पर सिरसा जिले के विभिन्न थानों में मादक पदार्थ अधिनियम के तहत नौ केस दर्ज हैं। मक्खन सिंह ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
विज्ञापन

याचिका पर सुनवाई के दौरान कालांवाली डीएसपी ने हलफनामा प्रस्तुत कर आरोपी के पिछले रिकॉर्ड की जानकारी दी। इसमें कहा गया कि मक्खन सिंह मादक पदार्थ रखने, बेचने और परिवहन में शामिल रहा है। उसके खिलाफ चार पुराने और पांच हालिया मामले दर्ज हैं। आरोपी कई बार रंगे हाथों पकड़ा गया, फिर भी मादक पदार्थ व्यापार में संलिप्त रहा। संवाद








8 केसों में आरोपी से नहीं बरामद हुआ मादक पदार्थ

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि निस्संदेह याचिकाकर्ता नौ अलग-अलग एफआईआर में शामिल है और सभी आपराधिक मामले विचाराधीन हैं। पर, याचिकाकर्ता से केवल एक मामले में वसूली की गई थी, ये केस 26 अगस्त 2019 को एनडीपीएस एक्ट के तहत कालांवाली थाने में दर्ज किया गया था। जहां तक शेष आठ मामलों का संबंध है, सह अभियुक्तों से वसूली की गई थी और याचिकाकर्ता को केवल बयान के आधार पर एक आरोपी के रूप में आरोपित किया गया था। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के आधार पर विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट है कि निरोधक प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत सामग्री याचिकाकर्ता के पिछले आचरण से संबंधित नहीं है। निरोधक प्राधिकारी द्वारा जिस सामग्री पर भरोसा किया गया है, उसका याचिकाकर्ता के पिछले आचरण से कोई निकट संबंध नहीं माना जा सकता है।





कोर्ट ने दिया ये निर्देश

न्यायाधीश सुवीर सहगल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याचिका स्वीकार की जाती है। हरियाणा सरकार गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा पारित आदेश को रद्द कर याचिकाकर्ता को रिहा करने का निर्देश दिया जाता है, जब तक किसी अन्य आपराधिक मामले में उसकी हिरासत आवश्यक न हो।
जेल में बंद हैं 17 आरोपी तस्कर

जिला पुलिस अब तक तस्करी के 17 आरोपियों को बिना एफआईआर के हिरासत में लेकर जेल भेज चुकी है। जिला पुलिस का दावा है कि ये आरोपी अदालत से जमानत पर जेल से बाहर आकर फिर से नशा तस्करी का काम करते हैं, जो कि जमानत के प्रावधानों के विरुद्ध है। जमानत के दौरान आरोपियों को सख्त हिदायत दी गई थी कि वह फिर से नशा तस्करी नहीं करेंगे, परंतु आरोपी अपनी आदतों से बाज नहीं आए और फिर से नशा तस्करी करने लगे। यदि आरोपियों को डिटेन नहीं किया जाता तो ये लगातार नशा तस्करी को अंजाम देते।
विज्ञापन


-

प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिकिंग यानि पिट एनडीपीएस एक्ट 1988 उन गंभीर नशे का कारोबार करने वाले आरोपियों पर लगाया जाता है जो लगातार उस अपराध में शामिल पाए जाते हैं। हाईकोर्ट की ऑर्डर कॉपी देखने के बाद ही इस मामले में कुछ कहना है उचित रहेगा।
- निकिता खट्टर, एसपी, डबवाली।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें