संवाद न्यूज एजेंसी
कालांवाली। पंजाब के साथ लगती कालांवाली की अनाज मंडी में धान खरीद हमेशा से विवादों में रही है। आढ़तियों से लेकर अधिकारियों पर निरंतर आरोप लगते रहे हैं। इस बार धान का रकबा ज्यादा होने के साथ खरीद में हेराफेरी की आशंकाएं ज्यादा बढ़ गई है। खरीद में गड़बड़ी के आरोप में मजदूर धरने पर बैठे हैं।
मजदूर यूनियन के प्रधान मुकेश कुमार, प्रधान केवल, सुखदेव डाबला, रमेश, सूरजभान, चन सिंह, सन्नी, सोमनाथ, चांदी राम व अन्यों आरोप लगाते हुए कहा कि मंडी में धान की खरीद सरकार व एजेंसियों की जगह पर शेलर संचालकों के द्वारा की जाती है। शेलर संचालक राजस्थान या अन्य राज्यों से 1600 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल से धान खरीदकर आगे सरकार को करीब 2300 रुपये में बेचकर सीधे तौर पर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
इतना ही नहीं, मंडी में किसानों से भी नमी के नाम पर 2 से 10 किलोग्राम तक की काट काटी जा रही है। इस बारे में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाएगी, हमारा धरना जारी रहेगा। सरकार से मांग है कि मंडी खरीद की ईमानदार अधिकारियों से जांच करवाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ये मुुद्दे उठाए
1.किस किसान ने धान का कितना पंजीकरण करवाया हुआ है। उसका भौतिक सत्यापन हो।
2.आढ़ती के पास किस किसान का माल आया है और उसके धान के रकबे की जांच हो।
3.धान को बोरियां में सफाई के साथ भरा गया है या नहीं उसकी जांच हो।
4. हलके के कुछ धान के रकबा कितना है। उसमें से कितना प्रतिशत आ चुका है। उसका खरीदे गए धान के साथ
मिलना हो।
हम मजदूरों की समस्याओं को दूर करने का काम कर रहे हैं। उनकी जो मांग है, उस पर पहले ही कह दिया गया था कि आगे इस पर उचित कार्रवाई की जाएगी। मैं अपने स्तर पर इस मामले को देख रहा हूं। - राहुल कुंडू, डीईएमओ