कई वर्षों से जन स्वास्थ्य विभाग के सीवर व्यवस्था को सही करने के
दावों की हवा निकल रही है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद शहर में
सीवरेज व्यवस्था पंगु ही है।
खासकर बरसात के दिनों में पूरा शहर जलमग्न हो
उठता है। अधिकतर कॉलोनियों में सीवरेज ओवरफ्लो की समस्या रहती है। आए दिन
लोग सीवरेज व्यवस्था को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करते नजर आते हैं। इतना ही
नहीं काई कॉलोनियों में तो अब तक सीवरेज ही नहीं है। अब शहर के लोगों की
सबसे बड़ी समस्या सीवरेज की है।
शहर में सीवरेज व्यवस्था लचर हो चुकी है। मानसून से पूर्व सीवरेज की सफाई
और इसके अलावा साल भर सीवरेज पर जो राशि खर्च होती है, वह करोड़ों में है।
जनता की मेहनत की कमाई को कुछ ठेकेदार और अधिकारी डकार रहे हैं, जिससे
लोगों को बेहतर सीवरेज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। लोग सीवरेज जाम होने
पर सड़कों पर जाम लगाते हैं। यह कहानी एक बार नहीं बल्कि बार-बार दोहराई
जाती है फिर भी प्रशासन पर कोई असर नहीं होता। सीएम विंडो पर आई शिकायतों
में से काफी संख्या में शिकायतें भी सीवरेज से संबंधित होती हैं। जन
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपने चहेतों को काम देकर गड़बड़ करने से गुरेज
नहीं कर रहे।
इन कॉलोनियों में सीवरेज बेहाल
शहर की अग्रसेन कॉलोनी, हुडा कॉलोनी, एमसी कॉलोनी, खन्ना कॉलोनी, मेला
ग्राउंड, पटेल बस्ती, बाजीगर मोहल्ला, चतरगढ़पट्टी, प्रेमनगर, खैरपुर,
रेलवे कॉलोनी, शक्ति नगर, बाटा कॉलोनी सहित अनेक कॉलोनियों में सीवरेज की
समस्या सबसे बड़ी है।
लोगों को राहत देने के नाम पर दो सीवरेज ट्रीटमेंट
प्लांट तो लगा दिए, पर शहर की वर्षों पुरानी सीवरेज पाइप लाइन को बड़ी नहीं
किया गया जिस कारण समस्या ज्यों की त्यों पड़ी है।
लोग बोले, कागजों में सिर्फ सीवरेज की सफाई
चुनाव चाहे एमसी के हो या फिर विधानसभा और लोकसभा के, इस दौरान छुटभैया
नेता लोगों को सीवरेज की समस्या का समाधान करने का आश्वासन देते दिखाई देते
हैं और जैसे ही चुनाव हो जाते हैं तो इस समस्या के समाधान के लिए कोई आगे
नहीं आता। लोगों ने अनदेखी के मामले में जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों
के खिलाफ भी बहुत शिकायतें की हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।
अब एक
बार फिर जन स्वास्थ्य सीवरेज की सफाई के नाम पर टेंडर देने की तैयारी में
है। बता दें कि कागजों में हर वर्ष सीवरेज की सफाई होती, जिसके लिए मोटी
राशि ठेकेदारों को जारी होती है। लोगों का कहना है कि शहर में सीवरेज की
लाइन वर्षों पहले डाली गई थी जो अब आबादी के अनुसार छोटी पड़ रही है। शहर
के आउटर एरिया में कॉलोनियों में अब तक सीवरेज पाइप लाइन डाली ही नहीं गई
है।
2025 तक नहीं डलेगी पाइप लाइन
जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता पीके पूनिया ने बताया कि सीवरेज
की जो पाइप लाइन डली हुई है, वह 2025 तक के प्लान के अनुसार डाली गई हैं।
अब इसके बाद ही पाइप लाइन डालने का प्लान बनेगा। उन्होंने बताया कि जिन
स्थानों पर सीवरेज की समस्या आती है, वहां पर तुरंत सफाई करवाई जाती है।
आज
भी शहर में कई स्थानों पर मशीनों द्वारा सफाई करवाई जा रही है। उन्होंने
बताया कि रूटीन में शहर में सीवरेज की सफाई का कार्य चलता रहता है। बरसात
के पानी की निकासी के लिए अलग से लाइन नहीं है, इस लिए सीवरेज पर लोड बढ़
जाता है। उन्होंने कहा कि कहीं भी सीवरेज की समस्या हो तो पब्लिक को तुरंत
शिकायत करनी चाहिए, ताकि विभाग द्वारा वहां पर सीवरेज की सफाई की जा सके।
हुडा सेक्टरों में सीवर व्यवस्था पंगु
सिरसा। भले ही हुडा के सेक्टर पॉश कॉलोनियों में शामिल हैं, लेकिन यहां पर
अब तक हुडा विभाग ने सीवर के पानी की निकासी का प्रबंध नहीं किया है। लोगों
के प्लॉटों में सीवर का पानी बहता रहता है। इसके अलावा सेक्टर की सड़कों
पर भी सीवर का पानी भरा रहता है।
हुडा विभाग के नियमों के अनुसार जब सेक्टर
को विकसित किया जाता है तो वहां के घरों के सीवर के पानी की निकासी का
प्रबंध उसी समय करना जरूरी होता है, लेकिन सिरसा के सेक्टरों को आबाद हुए
25 वर्ष से अधिक हो चुके हैं, लेकिन यहां पर सीवर के पानी की निकासी के लिए
विभाग कुछ नहीं कर पाया है।
यहां के लोगों को इससे भारी परेशानी का सामना
करना पड़ता है। जो भी प्लॉट खाली दिखाई पड़ते हैं, वहीं पर सीवर के पानी की
निकासी विभाग द्वारा कर दी जाती है। आसपास रहने वाले लोगों के लिए सीवर का
पानी परेशानी का सबब बना हुआ है। इसके अलावा सीवर का पानी सड़कों पर
छोड़ने के कारण सड़कें भी टूट रही हैं।
सेक्टर के सीवर के पानी की निकासी का अस्थायी प्रबंध करने के लिए पाइप लाइन
डाली जाएगी, जिसके लिए प्रपोजल मुख्यालय में भेजा हुआ है। उन्होंने बताया
कि सेक्टरों का अलग से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा, जिसके प्रस्ताव को
भी मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा हुआ है। उन्होंने बताया कि सीवरेज
ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण की जा चुकी है।
पन्नुराम, एसडीई हुडा