सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में चल रहे 11वें त्रिवेणी युवा महोत्सव के चौथे दिन भी विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं पर मंचीय प्रस्तुति दी गई। इनमें युवाओं ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति दी। युवाओं ने वन एक्ट प्ले (एकांकी) के माध्यम से सभी का ध्यान पर्यावरण प्रदूषण की ओर केंद्रित करने का प्रयास किया।
भौतिक विकास के नाम पर पर्यावरण के साथ होने वाले खिलवाड़ पर आधारित रहा। इसमें हर उस मुद्दे को उठाया गया, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। वाहनों से लेकर औद्योगिक प्रदूषण और कचरा प्रबंधन जैसे सभी मुद्दे शामिल किए गए हैं। दूसरी एकांकी में घर पर होने वाली महिला हिंसा को दर्शाया गया। तीसरी एकांकी में भोपाल गैस त्रासदी के मुद्दे को दर्शाया गया। हालांकि इस स्पर्धा में इस बार सबसे कम कॉलेजों ने भाग लिया।
भारतीय आर्केस्ट्रा के माध्यम से सितार वादकों ने बड़े ही बेहतरीन ढंग से भारतीय संस्कृति में संगीत का महत्व बताया। बांसुरी, वीणा, संतूर, तबला, हारमोनियम के माध्यम से प्रस्तुत शास्त्रीय संगीत ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। सामान्य लोक संगीत के माध्यम से हरियाणवी, राजस्थानी और पंजाबी संस्कृति के विभिन्न परंपरागत गीतों का मंचन कलाकारों ने किया।
इश्क-ए-इबादत नाटक के माध्यम से युवाओं को विभिन्न प्रेम गाथाओं की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में बताया गया। मंच दो पर भारतीय समूह गान और हरियाणवी लोक गीत के माध्यम से हरियाणवी परिधान संस्कृति एवं खानपान की विशेषताओं सहित परंपरागत जनमाध्यमों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया गया।
73 पुरुष सुरक्षाकर्मी संभाल रहे व्यवस्था
इस आयोजन में विश्वविद्यालय का सुरक्षा विभाग अहम भूमिका निभा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए विश्वविद्यालय के सुरक्षा प्रमुख, पूर्व कैप्टन हिम्मत सिंह ने बताया कि महोत्सव के कार्यक्रम पांच विभिन्न मंचों पर संचालित हो रहे हैं। इन मंचों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा टीम में एक अधिकारी, तीन पर्यवेक्षक, पांच महिला सुरक्षाकर्मी और 73 पुरुष सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।