सिरसा। जिले में काला हिरण और चिंकारा बड़ी संख्या में रहते हैं। चोपटा से डबवाली तक राजस्थान से सटी 73 किमी लंबी सीमा पर भी इनकी आवाजाही रहती है। इनकी सुरक्षा के लिए वन्यजीव विभाग के अधिकारियों ने वीरवार को चोपटा क्षेत्र में गश्त कर सात शिकारियों को पकड़ा।
इनमें शामिल तीन और चार लोगों के दो समूह शिकार करने की ताक में थे। विभाग की टीम ने इन सभी आरोपियों पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। शिकार करने वालों खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी चेतावनी दी।
यह वन्यजीव राजस्थान से हरियाणा तक आते-जाते रहते हैं। इस कारण इन जीवों की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन और वन्य जीव अधिकारी सप्ताह में तीन दिन संयुक्त गश्त कर रहे हैं। इस दौरान राजस्थान की सीमा से सटे सभी गांवों के ग्रामीणों से मुलाकात कर शिकारियों और जीवों की गतिविधियां परखी जा रहीं हैं। ताकि शिकारियों में विभागों का डर कायम रहे।
काले हिरण और चिंकारा की नहीं हुई गणना
अधिकारियों के अनुसार दुर्लभ प्रजाति होने के कारण काला हिरण और चिकारा की सुरक्षा करना बेहद जरूरी है। हालांकि इनकी गणना नहीं की गई है क्योंकि यह जीव राजस्थान की सीमा से सटे क्षेत्र में पाए जाते हैं। वह राजस्थान से हरियाणा तक विचरण करते हैं। इसलिए इनका सही आंकड़ा नहीं मिल पाता।
वन्य जीवों के संरक्षण के लिए ग्रामीण और अखिल भारतीय बिश्नोई जीव रक्षा जैसी संस्थाएं सजग
वन्यजीवों के शिकार पर पूरे देश में प्रतिबंध है। इसके बावजूद राजस्थान के शिकारी चोरी छिपे सिरसा जिले में आकर गाय, नंदी, नीलगाय और हिरण का शिकार करते हैं। पिछले दो माह में तीन से चार मामले सामने आए हैं। इनमें गिरफ्तार किए गए सभी शिकारी राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों के निवासी थे। हालांकि सिरसा जिले में काले हिरण और चिकारा को बचाने के लिए स्थानीय लोग भी प्रयासरत रहते हैं। आम ग्रामीणों समेत अखिल भारतीय बिश्नोई जीव रक्षा जैसी संस्थाएं हमेशा इनकी रक्षा के लिए लोगों को जागरूक करती रहती हैं। इसी कारण दिसंबर 2024 में गीदड़खेड़ा गांव में काले हिरण का शिकार होने पर ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए धरना-प्रदर्शन किए थे। संस्थाओं ने कई गांवों में शोक सभा की थी। उसके बाद प्रशासन ने आरोपियों को काबू किया था। इससे वन्यजीवों के साथ ही नीलगाय और गो रक्षा भी बढ़ी है।
शिकारियों की तलाश में पुलिस और वन्य जीव विभाग की टीम संयुक्त रूप से गश्त कर रही है। शिकार के मामले बढ़ने के बाद सप्ताह में तीन दिन कभी भी गश्त की जाती है। हरियाणा के चोपटा से डबवाली तक राजस्थान की सीमा से सटे क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों से बातचीत कर शिकारियों के बारे में जानकारी ली जा रही है। ताकि कोई काले हिरण और चिकारा आदि का शिकार न कर सके।
- रामकेश, निरीक्षक, वन्यजीव संरक्षण विभाग, सिरसा।