- मौजूदा आवेदनों में सामने आई सच्चाई, कई संस्थाओं के दस्तावेजों में कमी
- नवंबर माह से एक संस्था कर रही है पार्कों की देखभाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर के पार्कों को गोद देने के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इन आवेदनों में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पार्क गोद लेने वाली सोसायटियों की डीडी पर एसआई से लेकर एसडीएम तक के हस्ताक्षर नहीं हैं। फर्जी संस्था की डीड नगर परिषद में जमा करवाई गई हैं।
अधिकारियों की मानें तो कई अन्य संस्थाओं के दस्तावेज भी पूर्ण नहीं पाए गए हैं। पार्कों के दस्तावेज जांच करने वाली कमेटी ने मूल दस्तावेज की मांग इन सोसायटी से की है। यदि मूल दस्तावेज भी बिना हस्ताक्षर के मिलते हैं तो इन सोसायटियों पर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ-साथ पैसे की रिकवरी भी विभाग कर सकता है। अब देखना यह है कि मूल दस्तावेज में क्या सच्चाई सामने आती है।
नवंबर में दे दिए पार्क गोद, संस्थाएं कर रहीं आवेदन
नगर परिषद के पास कुल 84 पार्क व ग्रीन बेल्ट हैं। इन्हें हर साल गोद दिया जाता है। वर्ष 2025 में नवंबर माह में कुछ पार्कों को अधिकारियों ने अपने चहेतों को गोद दे दिया। फरवरी माह में पार्क गोद देने के लिए विज्ञापन जारी किया गया तो इनका कोई जिक्र नहीं किया गया। न ही पार्कों की संख्या विज्ञापन में दर्शाई गई। इतना ही नहीं, किस कार्यालय में यह सूची लगाई गई है, उसका कोई जिक्र नहीं किया गया। सीधेतौर पर संस्थाओं को पूर्ण रूप से धोखे में रखा गया।
हालात ये हुए कि इन गोद दिए गए पार्कों के लिए संस्थाओं ने आवेदन कर दिया है। आवेदन करने वाली संस्थाओं के आवेदन प्रशासन को रद्द करने पड़ेंगे। वहीं, इन पार्कों को गोद किन आधार पर दिया है, इसको लेकर मुख्यमंत्री से लेकर जिला नगर आयुक्त को शिकायत देने की योजनाएं संस्थाएं बना चुकी हैं।
मारुति पार्क के लिए खोला मोर्चा
वहीं, वार्ड नंबर 31 के मारुति पार्क को नवंबर माह में गोद लेने वाली संस्था की कार्यप्रणाली पर लोगों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने अधिकारियों को दी लिखित शिकायत में कहा है कि संस्था बेहतर काम नहीं कर रही है। पार्क की हालत सही नहीं है। लोगों ने आरोप लगाया कि गोद देने से पूर्व पार्क के आसपास के लोगों से कोई स्वीकृति अधिकारियों ने नहीं ली। दूसरे वार्डों के पार्षदों की स्वीकृति पत्र के आधार पर संस्था को पार्क गोद दे दिए, जो सरासर गलत है। संस्था के अनुबंध को निरस्त किया जाए और स्थानीय लोगों को दिया जाए। अधिकारियों के लिए पूर्व में कुछ संस्थाओं का पार्क देना अब गले की फांस बनता जा रहा है।
ये दस्तावेज नहीं करवाए जमा
- फर्जी डीड जमा करवाई।
- सोसायटी से जुड़े दस्तावेज जमा नहीं करवाए।
- बैंक अकाउंट व अन्य डिटेल नहीं जमा करवाई।
- पूर्व अनुभव के बारे में कोई दस्तावेज नहीं जमा करवाया।
संस्था के पदाधिकारी ले गए फाइल
चौंकाने वाली बात यह है कि एक संस्था जहां शहर के पार्कों को गोद लिए हुए है। उसकी पुरानी मूल फाइल कार्यालय से गायब है। कर्मचारियों की मानें तो मूल फाइल संस्था के पदाधिकारी ले गए हैं। जो अब तक कार्यालय में जमा नहीं करवाई है। इसके अलावा, कई अन्य फाइलें भी कार्यालय में मिल नहीं रही हैं।
कोट्स
संस्थाओं के दस्तावेज की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। कमेटी दस्तावेज की जांच कर रही है। यदि इन संस्थाओं के दस्तावेज फर्जी हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। यह जांचा जाएगा कि इन फर्जी दस्तावेज से उन्होंने पहले पार्क गोद तो नहीं लिए थे। मूल कॉपी सभी दस्तावेज की मंगवाई जाएगी। उसके बाद विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। निष्पक्षता के आधार पर पार्क गोद दिए जाएंगे।
-वीर शांति स्वरूप, चेयरमैन, नगर परिषद