संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। सरकार पंचायती राज सिस्टम को खत्म कर अपने चहेतों को लाभ देना चाहती है। ये लड़ाई चौधर की नहीं, अपितु गांवों की छोटी सरकार को बचाने की है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि सरकार से भीख नहीं, बल्कि अपने अधिकार मांग रहे हैं। यह बात सरपंच एसोसिएशन की प्रदेश उपप्रधान संतोष बैनीवाल ने वीरवार को सिरसा में एक निजी प्रतिष्ठान में की।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सरपंच एसोसिएशन से बातचीत किए बिना ही अपनी मर्जी से सरपंचों व पंचों के मानदेय बढ़ाने संबंधी जानकारी मीडिया में देकर जनता को गुमराह करने का काम किया है। इसका वे पूर्णतया बहिष्कार करते हैं और 17 मार्च को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
उनकी मांग थी कि 73वें पंचायतीराज एक्ट में संशोधन कर उनके 29 अधिकार दिए जाएं, लेकिन सरकार बिना किसी से बातचीत किए अपनी मर्जी से ही नीतियां बनाकर जबरन थोप रही है। बैनीवाल ने कहा कि जिस प्रदेश का मुखिया जनता को गुमराह करने में लगा हुआ है, उससे विकास की उम्मीद भी क्या की जा सकती है। उन्होंने बताया कि देश की जनता ने देखा कि किस प्रकार जनप्रतिनिधियों की बात सुनने के बजाय लाठियां भांजी गईं। उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन अब प्रदेश की जागरूक जनता जाग चुकी है और सरकार की शातिर चालों को भलीभांति समझ चुकी है।
सरकार कर रही जनता को गुमराह : कंग
सरपंच एसोसिएशन के जिला प्रधान जसकरण सिंह कंग ने कहा कि सरकार बार-बार एक सप्ताह में काम शुरू न करने पर पेमेंट लेप्स की धमकियां दे रही हैं। उन्होंने कहा कि सिरसा ब्लॉक की कुछ ग्राम पंचायतों के खाते में पेमेंट आए एक से डेढ़ साल बीतने के बाद भी टेंडर नहीं हुए। सरकार जनता को गुमराह कर एसोसिएशन को तोड़ना चाहती है। इस मौके पर सचिव सुभाष माखोसरानी, फरवाई सरपंच भूपिंद्र सिंह बराड़, कंगनपुर सरपंच दलबीर सिंह गिल, बनसुधार सरपंच मनोज कसवां, नंदलाल बैनीवाल, किसान यूनियन से भूपिंद्र नंबरदार, अजीत सिंह बैनीवाल, वेद सिरसा, अरविंद गोदारा, शेर सिंह गोदारा, जयपाल सहित अन्य उपस्थित थे।