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सीवरेज लाइन में गिरे संदीप का 24 घंटे बाद भी पता नहीं

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गांव नटार के पास सीवरेज लाइन में बुधवार रात गिरे व्यक्ति संदीप उर्फ काला का 24 घंटे बाद भी पता नहीं चल सका है। उसकी तलाश के लिए जिला प्रशासन की मौजूदगी में सर्च अभियान वीरवार को देर रात तक जारी रहा। वहीं बुधवार रात को दूसरे व्यक्ति पूर्णचंद की तबीयत बिगड़ने पर उसे हिसार रेफर कर दिया गया, जहां उसकी हालत स्थिर है। उपायुक्त के अनुरोध पर हिसार से सेना का बचाव दल सुबह सात बजे आया और अपना काम शुरू किया। संदीप जहां सीवरेज लाइन में गिरा था, वहां 30 फुट तक खुदाई की गई। उपायुक्त रमेश चंद्र बिढान व डीआईजी डॉ. अरुण सिंह, एसडीएम जयबीर यादव रात को मौके पर मौजूद रहे।
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वीरवार की शाम पांच बजे के बाद आर्मी व प्रशासन के बचाव दल ने 200 फुट की दूरी पर दूसरे मैनहोल को खोलकर उसकी खुदाई की, लेकिन संदीप नहीं मिला। अब तीसरे मैनहोल की खुदाई का काम चल रहा है। बचाव दल ने मैनहोल की खुदाई करके उसमें कुंडियां भी डाली हैं। इस मैनहोल में कपड़े का कुछ हिस्सा बाहर निकला है। सीवरेज पाइप लाइन में मिथेन गैस की मात्रा बहुत ज्यादा है। इसलिए राहत कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। जनस्वास्थ्य विभाग ने गैस मापक यंत्र से सीवरेज की खुदाई वाली जगह पर मिथेन की मात्रा मापी तो यह 6 प्रतिशत तक मिली, जबकि आक्सीजन शून्य थी। जैसे-जैसे गांव स्थित डिस्पोजल के नजदीक सीवरेज लाइन पहुंच रही है, मिथेन गैस की मात्रा बढ़ रही है। संदीप के जीजा सोनू ने बताया कि हमें उसके जीवित होने की उम्मीद नहीं है। लेकिन यही आस है कि कम से कम अंतिम बार उसे देख लें, वहीं पूरे परिवार का बुरा हाल है। संदीप की करीब तीन साल पहले ही शादी हुई थी। संदीप की खोज में पूरा गांव जुटा है। ग्रामीणों ने गांव के गुरुद्वारे से ही प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस कर्मचारियों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की। पूरा गांव रात को सोया नहीं। परिवार की महिलाओं की स्थिति भी खराब है।
गौरतलब है कि बुधवार रात आठ बजे गांव नटार निवासी संदीप व पूर्णचंद अपने खेतों में पानी लगाने गए थे। नटार में भूमि का जलस्तर काफी नीचे जा चुका है, इसलिए किसान सीवरेज लाइन में पाइप डालकर खेतों में पानी लगाते हैं। संदीप अपने खेत में फसल को पानी लगाने के लिए शाम सात बजे पाइप लाइन में उतरा। इस दौरान गैस चढ़ने से दम घुटने पर उसने आवाज लगाई तो बाहर खड़ा पूर्णचंद उसे निकालने के लिए सीवरेज लाइन में उतर गया लेकिन गैस चढ़ने से वह भी बेहोश हो गया। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम जयबीर यादव के नेतृत्व में प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया। उपायुक्त रमेश चंद्र बिढान तथा डीआईजी डॉ. अरुण सिंह बुधवार रात को ही मौके पर पहुंचे और बचाव दल की टीम से पूरी जानकारी ली। उपायुक्त ने बचाव दल को लापता व्यक्ति की तलाश और तेज करने तथा किसी प्रकार की ढील न बरतने के निर्देश दिए। रात को उपायुक्त ने लापता व्यक्ति की तलाश के लिए सेना के उच्च अधिकारियों से बातचीत कर हिसार कैंट से आर्मी की टीम को बुला लिया। आर्मी की टीम ने सुबह सात बजे पहुंचते ही मोर्चा संभाल लिया और संदीप की तलाश शुरू कर दी। सीवर की खुदाई के लिए हिसार से बड़ी जेसीबी मशीनें मंगाई गईं। सुबह से लेकर शाम पांच बजे तक करीब 30 फुट गहरी खुदाई की गई लेकिन संदीप नहीं मिला। वहीं प्रशासन ने पानी के बहाव को कम करने के लिए अन्य जगहों पर किसानों को पंप लगाकर पानी बाहर निकालने के आदेश दिए।
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शहर में दिन भर बंद रखी पानी की सप्लाई
संदीप की तलाश में प्रशासन ने सीवरेज के पानी को कम करने के लिए पूरे दिन शहर में वाटर सप्लाई बंद की। सप्लाई के कारण लोगों के सामने पीने की पानी की समस्या भी पैदा हो गई। शाम पांच बजे पानी सप्लाई बहाल की गई, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।
शहर से नटार जाने वाली सड़क के नीचे है पाइप लाइन
शहर से नटार जाने वाली सड़क के नीचे सीवरेज पाइप लाइन है। सड़क पर ही सीवरेज होल बनाए गए हैं। इसके किनारे से ईंट तोड़कर किसान अपनी फसल को पानी लगाने के लिए पाइप डालता है। पाइप को पंप से जोड़कर सीवरेज के पानी से खेतों में सिंचाई की जाती है।
पूर्णचंद को ग्रामीणों ने देसी तरीका अपनाकर निकाला
नटार के ग्रामीणों ने बताया कि संदीप अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा है। ढाई साल की उसकी बेटी है। खुद की पांच एकड़ जमीन है, जबकि 35 एकड़ जमीन ठेके पर ली हुई है। बुधवार रात को जब संदीप व पूर्णचंद सीवरेज में पंप डालकर पानी निकाल रहे थे तो पाइप में पानी कम आने के चलते वह सीवरेज होल में चला गया। यह सीवरेज होल करीब 30 फुट गहरा है। गैस के कारण वह बेसुध होने लगा तो उसने पूर्णचंद को आवाज लगाई। पूर्णचंद को रस्सा फेंकने के लिए कहा। पूर्णचंद ने रस्सा फेंका और उसे संदीप ने पकड़ लिया। इसके बाद पूर्णचंद उसे निकालने के लिए नीचे उतरा तो संदीप के हाथ से रस्सा छूट गया और वह नीचे सीवरेज की तह में गिर गया। इसी बीच पूर्णचंद भी बेसुध होने लगा तो जोर आजमाइश करते हुए वह नजदीक पहुंच गया। लेकिन अचानक बेसुध होकर गिर पड़ा। इसी दौरान उसका पांव लोहे की सीढ़ी में फंस गया और उसका शरीर पांव के सहारे लटका रहा। ग्रामीणों ने लोहे के सरिये की कुंडी बनाकर उसके साथ रस्सा बनाकर उसके पांव में फंसाया और इस युक्ति से ही उसे बाहर खींच कर निकाला। करीब नौ बजे पूर्णचंद को सीवरेज से बाहर निकाल लिया गया। लेकिन संदीप नीचे सीवरेज की दलदल में फंस गया। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन का जो गोताखोर रात को आया था, वह गैस सिलिंडर लेकर नीचे उतरा, लेकिन सिलिंडर में खामियों के कारण वह भी बेसुध हो गया तो तुरंत उसे बाहर निकाल कर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया।
रात को युवाओं में फैला रोष
प्रशासन ने रात नौ बजे से सर्च अभियान शुरू किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी। इसको लेकर युवाओं में रोष फैल गया। कुछ पुलिस विभाग के कर्मचारियों के साथ युवाओं की बहस हुई। गांव के गणमान्य लोगों और पुलिस अधिकारियों ने युवाओं को शांत किया। रात को आर्मी को सूचना दी गई। आर्मी का बचाव दल सुबह सात बजे सिरसा पहुंचा और उसने सर्च अभियान शुरू किया। बड़ी जेसीबी मशीन से करीब 30 फुट सीवरेज की खुदाई की गई, लेकिन रात सात बजे तक संदीप का उस जगह पर कोई अता-पता नहीं चला।
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