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Sirsa News: सखी ने अबलाओं की मदद कर बनाया सुखी

Tue, 05 May 2026 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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सिरसा। लघु सचिवालय स्थित वन स्टॉप सेंटर।
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उत्पीड़न की शिकार महिलाओं का सहारा बना वन स्टॉप सेंटर, 24 घंटे सातों दिन मिलता है आश्रय
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181 पर कॉल करती हैं महिलाएं, वर्ष 2019 से आज तक आज चुकी हैं 1830 शिकायतें

एसिड अटैक पीड़िता को दिलाई साढ़े 7 लाख रुपये की सहायता, घरेलू हिंसा की शिकार 800 महिलाओं ने की कॉल

फोटो 18




सिरसा। वन स्टॉप सेंटर उत्पीड़न का दंश झेल रहीं महिलाओं के लिए सहारा बन रहा है। इस सेंटर के माध्यम से अब तक 1830 महिलाओं को न्याय मिला है। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से वन स्टॉप सेंटर यानी सखी को 8 मार्च 2019 में शुरू किया गया था।

सखी के तहत हिंसा पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर अस्थायी आश्रय, पुलिस डेस्क, विधि सहायता, चिकित्सा और काउंसिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सेंटर के माध्यम से बाल विवाह, साइबर अपराध, घरेलू हिंसा, एसिड विक्टिम, गुमशुदा, दहेज, दुष्कर्म जैसे मामलों में पीड़ितों की मदद की जाती है। अब तक घरेलू हिंसा से प्रभावित 800 महिलाएं वन स्टॉप सेंटर से सहायता ले चुकी हैं।
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वन स्टॉप सेंटर इंचार्ज मंजू रानी ने बताया कि अधिकतर शिकायतों का समाधान काउंसिलिंग के माध्यम से हो गया। उत्पीड़न की शिकार 500 महिलाओं को सेंटर में आश्रय सुविधा का लाभ मिला। महिलाओं को आश्रय देने के लिए सेंटर में 2 कमरे बने हुए हैं। 215 मामलों में पीड़ित महिलाओं को तुरंत प्रभाव से पुलिस सहायता भी उपलब्ध करवाई गई।


ग्रामीण क्षेत्र से आ रहीं ज्यादा शिकायतें

जितनी भी शिकायतें अब तक वन स्टॉप सेंटर में आई हैं उनमें घरेलू हिंसा का मुख्य कारण नशा रहा है। सबसे ज्यादा शिकायतें ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही हैं। शहर में घरेलू हिंसा के मामले कम हैं। हर शिकायत की पूरी तरह से जांच-पड़ताल की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों के मामले में सरपंच व शहरी क्षेत्र के मामले में एमसी को बुला लिया जाता है। मौअजिज लोगों से बातचीत कर असल कारण जानकर काउंसिलिंग की जाती है।
सरकारी वकील तक मुहैया कराया जाता है
वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं को अस्थायी शेल्टर में पांच दिन तक रहने, खाने, कपड़े, स्वास्थ्य सुविधाएं व कानूनी सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। पांच दिनों के बाद महिला का केस देखते हुए उन्हें नारी निकेतन, महिला छात्रावास या घर भेज दिया जाता है। कोर्ट में चल रहा केस बरकरार रहता है। इसके लिए महिलाओं को सरकारी वकील मुहैया करवाया जाता है। संवाद

कोट्स
उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के लिए सरकार ने वन स्टाॅप सेंटर खोला हुआ है। यहां महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। अब तक 1830 महिलाएं वन स्टाॅप सेंटर से सहायता ले चुकी हैं। कोई भी महिला इमरजेंसी में हेल्पलाइन नंबर 181 पर कॉल करके मदद मांग सकती है।

-मंजू रानी, इंचार्ज, वन स्टॉप सेंटर, सिरसा।



केस-1
पति को दिलाया नशे से छुटकारा
हेल्पलाइन 181 पर एक कॉल आई थी। महिला ने कहा कि उसका पति नशा करके उसके साथ झगड़ा करता है। वन स्टॉप सेंटर टीम ने पति-पत्नी की काउंसिलिंग करने के बाद महिला के पति को नशा से छुटकारा दिलाने के लिए उसका नागरिक अस्पताल में उपचार करवाया। इलाज के बाद उक्त व्यक्ति ठीक हो गया और अब पति-पत्नी सखी की सहायता से सुखी वैवाहिक जीवन जी रहे हैं।
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केस-2
रिश्तेदार ने महिला पर फेंक दिया तेजाब
एक व्यक्ति ने अपनी रिश्तेदार महिला पर एसिड अटैक कर दिया था। पीड़ित महिला ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि वह घर पर अकेली थी। इसी दौरान उसका एक रिश्तेदार आया और जबरन उससे शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करने लगा। पीड़िता ने बताया कि जब उसने विरोध किया तो उक्त रिश्तेदार ने उसके ऊपर तेजाब फेंक दिया। इससे वह 70 प्रतिशत झुलस गई। वन स्टॉप सेंटर ने पीड़िता की हर प्रकार से मदद की और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से साढ़े 7 लाख की आर्थिक सहायता दिलाई गई।
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