एनएच-54 (डबवाली से चौटाला रोड) पर हादसे रोकने के लिए नेशनल हाईवे ने करीब 28 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। जिस पर काम शुरू हो चुका है। हादसे रोकने के लिए कैट आइज, डेजिनेटर सहित बोलार्ड लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विभाग वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए साईन बोर्ड भी लगाएगा। उम्मीद बंधी है कि काम पूरा होने के बाद हादसों पर कंट्रोल होगा। लेकिन मुख्य वजह रोड़ की कम चौड़ाई है। जब तक रोड़ की चौड़ाई नहीं बढ़ेगी, तब तक यह प्रयास भी नाकाफी हैं।
चौटाला रोड को हादसा मुक्त बनाने के लिए हिसार की एक कंपनी को टेंडर जारी हुआ है। कंपनी ने डबवाली के गोल चौक से लेकर गांव चौटाला तक काम शुरू कर दिया है। जिसके तहत 28 किलोमीटर एरिया में चार जगहों पर डायरेक्शन बोर्ड लगाए जाएंगे। जिसके जरिए वाहन चालकों को डबवाली से पंजाब, राजस्थान या फिर गुजरात के मुख्य शहरों की दूरी पता चल सकेगी। डबवाली में प्रत्येक डिवाइडर कट पर बोलार्ड लगाए जा रहे हैं।
जिसके जरिए वाहन चालक को डिवाइडर शुरू तथा समाप्त होने का आसानी से पता चल सकेगा। बोलार्ड संगरिया साइड से शहर में प्रवेश पाने वाले लंबी दूरी के वाहन चालकों के लिए लाभप्रद साबित होंगे। अक्सर लघुसचिवालय के सामने डिवाइडर पर वाहन चढ़कर पलट जाता था। कारण साफ था कि डिवाइडर दिखाई नहीं देता था। ऐसे में एक हफ्ते में ही दो से तीन हादसे हो जाते थे।
लेकिन बोलार्ड लगने से वाहन चालकों को समस्या से निजात मिलेगी। इसके साथ ही रात को वाहन चालक सड़क को सही ढंग से देख सकेंगे। सड़क की भीतरी पट्टी तथा साईड पट्टी पर केट आइज लगाई जा रही हैं। एनएच-54 पर यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। चूंकि सड़क की साईड की पट्टी लगभग समाप्त हो चुकी है। ऐसे में केट आइज लगाए जाने से वाहन चालक को सड़क की सीमा का अंदाजा हो जाएगा। इससे भी हादसों पर नियंत्रण संभव है।
आसाखेड़ा के नजदीक लगेंगे डेजिनेटर
अबूबशहर से आसाखेड़ा के बीच का हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय में इस जगह पर सबसे ज्यादा हादसे हुए हैं। इस जगह पर हादसे रोकने के लिए कंपनी रोड़ के किनारे डेजिनेटर लगाएगी। इससे वाहन चालकों को मोड़ के बारे में जानकारी मिल जाएगी। वाहन चालक सतर्क होकर गाड़ी चलाएगा। जिससे हादसा होने से बच जाएगा।
रोजाना हो रहे हादसे
शायद ही कोई दिन ऐसा हो कि डबवाली-चौटाला रोड पर हादसा न हो। हर दिन हादसा होता है। चाहे छोटा हो या फिर बड़ा। बड़े हादसों की बात करें तो 19 जून 2016 को गांव अबूबशहर-आसाखेड़ा के मध्य हादसे में नवदंपति की मौत हो गई थी। गांव चौटाला के नजदीक 16 मई को हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले राजस्थान निवासी एक दंपति की भी हादसे में मौत हो गई थी।
जागरूक भी करेगा
हादसों की सबसे बड़ी वजह रहती है, जागरूकता का अभाव। ऐसे में नेशनल हाईवे वाहन चालकों को जागरूक भी करेगा। सीट बेल्ट लगाकर गाड़ी चलाएं, आगे मोड है, शराब पीकर गाड़ी न चलाएं, ऐसे स्लोगन बोर्ड पर लिखवाएगा। इसके अतिरिक्त वाहन मुताबिक स्पीड कितनी होनी चाहिए, पूरी डिटेल के साथ बोर्ड लगाए जाएंगे।
मुख्य वजह का समाधान जरूरी
बेशक नेशनल हाईवे 28 लाख रुपये का भारी भरकम बजट लगाकर रोड़ को हादसा मुक्त करने का प्रयत्न कर रहा है। लेकिन हादसे की मुख्य वजह है रोड़ का कम चौड़ा होना। सामरिक तथा व्यापारिक दृष्टि से देश का महत्वपूर्ण रोड़ होने के बावजूद इसी चौड़ाई महज सात मीटर है। यह उत्तर भारत का सबसे कम चौड़ा नेशनल हाईवे है। रोड़ को चौड़ा करने में वन्य प्राणी अभ्यारण क्षेत्र आड़े आ रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर हादसे रोकने हैं तो चौड़ाई बढ़ानी होगी।
चौटाला रोड़ पर हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए विभाग टेंडर के जरिए बोलार्ड, आइज कैट, डायरेक्शन बोर्ड, डेजिनेटर लगा रहा है। डबवाली से काम शुरू हो चुका है। पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 28 लाख रुपये खर्च आने की उम्मीद है। वैसे हादसों की मुख्य वजह रोड का कम चौड़ा होना है। अधिकतर क्षेत्र वाइल्ड लाइफ में होने के कारण इसमें दिक्कत आ रही है।
-रवि मोंगा, एसडीई, नेशनल हाईवे, सिरसा