सिरसा। धान का रकबा लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ पराली प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ती जा रही है। जिले में इस बार 4 लाख 12 हजार एकड़ में धान की खेती हुई है। इससे करीब 82 लाख 44 हजार क्विंटल पराली निकलने का अनुमान है।
प्रशासन ने इस बार 80 से 85 लाख क्विंटल पराली के प्रबंधन का लक्ष्य रखा है। जिले को पूरी तरह ग्रीन जोन बनाने के लिए कृषि विभाग, प्रदूषण बोर्ड और तहसील की टीमें मैदान में उतर चुकी हैं। धान की कटाई का सीजन करीब एक सप्ताह पहले शुरू हुआ है। इसके साथ ही अधिकारियों ने किसानों से संपर्क तेज कर दिया है।
अब तक 54,378 किसान पराली प्रबंधन के लिए पंजीकरण करवा चुके हैं। पंजीकरण के मामले में सिरसा प्रदेश में पहले नंबर पर है। जिले में पिछले तीन वर्षों में धान का रकबा लगातार बढ़ा है। वर्ष 2024 में यह 3 लाख 15 हजार एकड़ था। वर्ष 2025 में बढ़कर 3 लाख 80 हजार एकड़ हो गया। इस वर्ष यह 4 लाख 12 हजार एकड़ पहुंच गया है।
एक एकड़ में औसतन 20 क्विंटल पराली निकलने का अनुमान है। ऐसे में इस बार बड़ी मात्रा में पराली के प्रबंधन की जरूरत है। करीब साढ़े तीन लाख एकड़ की पराली के प्रबंधन के लिए किसान ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं।
इन क्षेत्रों पर विशेष नजर : रोड़ी, रानियां, नरेल खेड़ा और ऐलनाबाद येलो जोन क्षेत्र में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष निगरानी की जाएगी। पराली जलाने पर किसान के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। फर्द में रेड एंट्री की जाएगी। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलेगा।
ड्रोन-सैटेलाइट से हर खेत की निगरानी : पराली जलाने की घटनाओं पर हरसेक के माध्यम से भी नजर रखी जाएगी। सैटेलाइट इमेज से खेतों की निगरानी होगी। इसके अलावा जिले को दो ड्रोन उपलब्ध करवाए गए हैं।
40 पैलेट यूनिट भी कर रहीं मदद
जिले में इस समय 40 पैलेट यूनिट काम कर रही हैं। एक छोटी यूनिट को करीब 1 लाख 20 हजार क्विंटल पराली की जरूरत होती है। बड़ी यूनिटों की मांग इससे अधिक रहती है। ऐसे में इस बार जिले में 80 से 85 लाख क्विंटल पराली की मांग बनी हुई है। पैलेट यूनिट संचालक भी अपनी मशीनरी लेकर किसानों तक पहुंच रहे हैं। इससे किसानों को पराली प्रबंधन में सुविधा मिल रही है। प्रशासन ने 50-50 किसानों की जिम्मेदारी एक कर्मचारी को सौंपी है। सरपंचों और सामाजिक संस्थाओं की भी मदद ली जा रही है।
किसान को मिलते हैं 1200 रुपये प्रति एकड़
पराली प्रबंधन करने वाले किसान को सरकार की ओर से 1200 रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि दी जाती है। इसके लिए किसान को ऑनलाइन पंजीकरण करवाना होता है। पंजीकरण के बाद टीम मौके का सर्वे करती है। प्रबंधन से पहले और बाद का डाटा अपलोड किया जाता है। इसके बाद सरकार की ओर से राशि जारी की जाती है।
ड्रोन-सैटेलाइट से हर खेत की निगरानी
पराली जलाने की घटनाओं पर हरसेक के माध्यम से भी नजर रखी जाएगी। सैटेलाइट इमेज से खेतों की निगरानी होगी। इसके अलावा जिले को दो ड्रोन उपलब्ध करवाए गए हैं। अति संवेदनशील और संभावित घटनाओं वाले क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल किया जाएगा। एक गांव को दो बार स्कैन किया जाएगा।
प्रदेश में पंजीकरण की स्थिति
जिला किसान एकड़ भूमि
सिरसा 54,378 3,87,017.837
जींद 54,134 3,42,552.173
करनाल 53,515 3,93,749.975
कैथल 52,317 4,04,511.141
फतेहाबाद 49,556 3,56,300.927
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पराली प्रबंधन के लिए टीमों का गठन किया जा चुका है। किसान भी बड़े स्तर पर अपना पंजीकरण प्रबंधन को लेकर कर रहा हैं। किसानों से अपील है कि पराली न जलाएं। प्रबंधन को लेकर मशीनरी की कोई कमी नहीं है। - जोगिंदर राणा, तकनीकी सलाहकार, कृषि विभाग।