संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एसएलएसए) के निर्देशानुसार शनिवार को न्यायालय परिसर सिरसा, ऐलनाबाद और डबवाली में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। विभिन्न न्यायालयों में पंजीकृत 24,917 केसों में से 22,339 केसों का निपटारा किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश वाणी गोपाल शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में छह बेंचों का गठन किया गया था। 22,339 केसों का निपटान कर पीड़ितों को 6.15 करोड़ रुपये क्लेम राशि दी गई। लोक अदालत में चेक बाउंस, बैंक वसूली, मोटर वाहन दुर्घटना, घरेलू विवाद, बिजली और पानी से संबंधित विवाद, ववानी विवाद से जुड़े मामले शामिल थे।
अध्यक्ष वाणी गोपाल शर्मा ने बताया कि इसमें फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश सुमित गर्ग, जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन किनरा, सीजेएम मुनीश नागर, सिविल जज रिचू, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी डबवाली सुमन पाटलेन और सिविल जज ऐलनाबाद आशीष आर्य ने केसों की सुनवाई की।
डीएलएसए के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रवेश सिंगला ने बताया कि लोक अदालत की प्रक्रिया बड़ी सरल है क्योंकि इसमें दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत से समझौता करवाया जाता है, जिससे उनका आपसी मनमुटाव समाप्त हो जाता है। इस फैसले को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
कैदियों को दी जा रही सहायता
डीएलएसए की ओर से विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता भी दी जाती है। इसके लिए जेल परिसर में मुफ्त कानूनी सहायता केंद्र की व्यवस्था की गई है, जिसमें पैनल अधिवक्ता जेल के अंदर जाकर कानून की जानकारी और केस लड़ने के लिए वकीलों की सेवाओं की अर्जी लेकर सेवाएं प्रदान की जाती हैं। वहीं, एसएलएसए ग्रामीण स्तर पर निशुल्क कानूनी साक्षरता शिविर भी आयोजित करता है। इनमें ग्रामीणों को उनके कानूनी अधिकार बताए जाते हैं। जिला बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एडवोकेट लक्की दुग्गल ने बताया कि मुफ्त कानूनी सहायता कोई दान नहीं बल्कि यह आपका संविधानिक और कानूनी अधिकार है। आम जनता को जागरूक करने के लिए राज्य के पिछड़े एवं दूरदराज के इलाकों में कानूनी शिविर लगाए जा रहे हैं।
लोक अदालत में लाए जाने वाले मामले
लोक अदालत में वैवाहिक, सिविल पेंशन और अन्य सेवा संबंधी मामले जैसे कि रेलवे, श्रम विवाद भूमि अधिग्रहण, मनरेगा, बिजली, पानी, बैंक, आपदा मुआवजा जैसे कि फसल में आग लगने इत्यादि मामले लाए जा सकते हैं।