जेल में कैद अपने भाइयों को रखी बांधने पहुंची बहनों ने उनसे वचन लिया कि आगे से वो ऐसा कोई काम न करें जिससे जेल में आना पड़े। नम आंखों से बहनों ने अपने-अपने भाईयों से यह वचन देने का तोहफा मांगा तो भाई इंकार नहीं कर सके। जेल में भाई-बहन का प्यार देखकर जेल अधिकारियों की भी आंखें नम हो गईं।
वीरवार तड़के ही जेल के बाहर महिलाएं कतार लगाकर खड़ी दिखाई दीं। उन्हें बेसब्री से इंतजार था जेल में कैद अपने भाई की कलाई में रखी बांधने का। जेल प्रशासन ने भी इस बार एतिहासिक पहल करते हुए इस पर्व को लेकर खास प्रबंध किए थे।
जैसे ही मुलाकात का समय शुरू हुआ महिलाएं एक-एक करके जेल की डोडी में जाने लगी। जेल कर्मचारियों से सभी मुलाकाती महिलाओं के पहचान पत्र की कॉपी जमा करवाई। डोडी में बंदियों को बुलाया गया और बहनों ने अपने भाईयों का मुंह मीठा करवाकर राखी बांधी। राखी बांधकर जेल से बाहर आई महिलाएं बोली कि खुशी इस बात की है कि भाई के हाथ पर राखी बांधी, लेकिन भाई-बहन का ये मिलन कुछ ही पलों का था।
सुरक्षा के पुख्या प्रबंध
रक्षा बंधन पर पर्व पर जिला जेल में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। महिलाएं अपने साथ जो मिठाईयां व सामान लेकर आई, उन सभी की अच्छी तरह से चेकिंग की गई। पूरी सकर्तता के साथ बंदी रक्षक तैनात रहे। जेल में बहनों को प्रवेश करवाने की जिम्मेदारी डिप्टी जेलर अमित पातड़, महिला कांस्टेबल व वार्डनों की थी। सिरसा जेल में सात सौ से अधिक बंदी हैं।