बच्चों के छोटे होने पर चार से पांच लोगों को हर दम उनका ख्याल रखना पड़ता है। बच्चों के भूख का समय अलग अलग होता है। एक के रोने से दूसरा उठा जाता है। इस तरह से दिन रात बच्चों को संभालने में परिजन लगे हुए है। बच्चों की देखरेख में ही परिजनों के दिन रात निकल रहे है। बता दें कि एक साल पहले रज्जो बाई की शादी टीटू खेड़ा के सोनू के साथ हुई थी। सोनू खेतीबाड़ी और मजदूरी का काम करता है।
रज्जों की उम्र 24 साल के करीब है। ऐसे में पहली डिलिवरी चार बच्चों की होना जोखिम से कम नहीं था। सोनू ने बताया कि चार जून को अस्पताल से सभी को छुट्टी मिली है। बच्चों में दो बेटे और दो बेटियां है। पूरा परिवार उनकी देखभाल कर रहा है। रज्जो की डिलिवरी 14 मई को नागरिक अस्पताल में हुई थी। उस दौरान बच्चों को चिकित्सकों ने अपनी मॉनिटरिंग में निकू में रखा था। ताकि बच्चों की जान को कोई खतरा न हो। हालांकि नागरिक अस्पताल में ऑपरेशन से बच्चों के होने पर रज्जो को भी कुछ दिक्कत हुए थी। नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों ने उसे भी बेहतर उपचार दिया।
सोनू ने बताया कि नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों का पूर्ण सहयोग मिला। चिकित्सकों ने कभी उन्हें कोई दिक्कत नहीं होने दी। कभी मन में ही नहीं आया कि चार बच्चों का जन्म होना है, निजी अस्पताल में ले जाए। चिकित्सकों ने हमारा हौंसला बढ़ाया और आज चारों बच्चें और मां सभी सुरक्षित है।
सोनू ने बताया कि रज्जो के गर्भवती होने पर दो बार नागरिक अस्पताल में जांच करवाई थी। चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड की सलाह दी। अल्ट्रासाउंड में तीन बच्चों की पुष्टि हुई।साथ ही उन्होंने आशंका जताई की चार बच्चे भी हो सकते है। इसके बाद निजी अस्पताल में जांच करवाई और अल्ट्रासाउंड करवाए। जिसके बाद चार बच्चों की पुष्टि हई। इतना पता चलने के बाद रज्जो का काम करना पूरी तरह से बंद कर दिया गया। हर वक्त उसकी देखभाल में मां और परिवार के लोग लगे रहते। सोनू ने बताया कि उसके परिवार में उसकी मां राज रानी, भाई कर्ण, बहन सुनीता और परदादी गुड्डी देवी है।
चिकित्सक राहुल गर्ग के अनुसार अस्पताल में हर कोई रज्जो की डिलिवरी का इंतजार कर रहा था। अस्पताल स्टॉफ से लेकर वहां पर एडमिशन महिलाएं और उनके परिजन सभी ऑपरेशन पर नजरें जमाए हुए थे। इसलिए ऑपरेशन हमारे लिए है चैलेंज बन गया था। ऑपरेशन थियेटर के बाद लोगों का जमावड़ा था। ऑपरेशन थियेटर में एक बच्चें के लिए दो नर्सरों को तैनात किया गया था। बच्चों के स्वस्थ्य जन्म लेने की सूचना जैसे ही ऑपरेशन थियेटर के बाहर पहुंची तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था।
नागरिक अस्पताल के गायनोकॉलोजिस्ट डा राहुल गर्ग ने बताया कि चार बच्चों का जन्म के दौरान मां और बच्चों दोनों की जान को खतरा होता है। जब गर्भ में दो से तीन बच्चे होते है तो समय से पहले डिलिवरी होने का खतरा बना रहता है। रज्जो के गर्भ में चार बच्चे थे। 31-32 सप्ताह का गर्भ था। इस दौरान खून का रिसाव ज्यादा होने का खतरा बढ़ जाता है । जिससे मां के अंदर खून की कमी होती है। रज्जो ने जांच बच्चों को जन्म दिया था। उनका वजन 1.200 से 1.300 ग्राम था। सभी को नर्सरी में रखा गया था। रज्जो को छुट्टी दे दी थी। बाद में ऑपरेशन को लेकर कुछ दिक्कत हो गई थी। बाद में उसका उपचार किया गया और वह स्वस्थ्य हो गई। -डा. राहुल गर्ग, गायनोकॉलोजिस्ट, सिविल अस्पताल सिरसा।