सिरसा-रोड़ी। पिछले साल आई बाढ़ से सबक लेते हुए जिले के रोड़ी क्षेत्र व घग्गर के साथ लगते पंजाब सीमा पर तो बाढ़ बचाव के प्रबंध कर लिए गए हैं, लेकिन सिरसा प्रशासन अभी तक बाढ़ प्रबंधन को लेकर कोई काम नहीं कर पाया है। न ही घग्गर के साथ लगते गांवों के तटबंध मजबूत किए गए हैं, न ही ड्रेनों की सफाई कार्य हुआ है। जिससे घग्गर के किनारे खेती करने वाले किसान काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि पिछली बार की तरह कहीं उनकी फसलें इस बार घग्गर की भेंट न चढ़ जाए।
रोड़ी क्षेत्र के साथ लगते गांव मत्तड़, लहंगेवाला व रंगा के नजदीक से गुजरने वाली घग्गर नदी के तटबंध बिल्कुल जर्जर हो चुके हैं। दूसरी तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आदेश जारी किए हुए हैं कि पिछले साल जिस भी क्षेत्र में घग्गर में बाढ़ आने के बाद नुकसान हुआ था, वहां पर अधिकारी समय रहते ही तटबंधों को मजबूत करवाना सुनिश्चित करें। परंतु ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक किसी भी अधिकारी के द्वारा क्षेत्र के गांवों में पहुंच कर घग्गर के तटबंधों की स्थिति का जायजा नहीं लिया गया है।
बता दें कि जुलाई 2023 में जब भारी बारिश होने के कारण घग्गर अपने उफान पर थी, तो उस समय भी किसान ट्रैक्टरों व जेसीबी सहित तटबंध को मजबूत कर कर रहे थे। अगर इस बार फिर से घग्गर में उफान आता है, तो मत्तड़, लहंगेवाला व रंगा के खेतों में भारी नुकसान होने की आशंका है। पिछले साल आई बाढ़ के कारण जिले के 49 गांव बाढ़ से प्रभावित थे। उनमें 28 गांवों में हालात ज्यादा खराब थे। इनमें ये तीन गांव भी शामिल रहे हैं।
पंजाब क्षेत्र में तटबंध पिछले साल ही कर दिए थे मजबूत
वहीं दूसरी ओर पिछले साल जैसे ही पानी का स्तर कम हुआ तो पंजाब सरकार ने अपने आधार क्षेत्र में आने वाले घग्गर के तटबंधों को लोहे का जाल और मिट्टी के कट्टे लगा कर मजबूत कर दिया था। लेकिन सिरसा क्षेत्र में अधिकारियों ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।
गांव लहंगेवाला में पिछली बार आई बाढ़ के कारण काफी नुकसान हुआ था। हमने अपने स्तर पर ही बांध बनाकर गांव को बचाया था, लेकिन फसलों को फिर भी नहीं बचा पाए। मानसून आने वाला लेकिन घग्गर के कमजाेर तटबंधों को ठीक करने के लिए कोई कार्य नहीं हुआ है। जिससे डर है कि कहीं इस बार भी घग्गर उनकी फसलों को नुकसान न पहुंचा दे।
-सुखदेव सिंह, गांव लहंगेवाला।
घग्गर नदी जब भी उफान पर आती है, तो प्रशासनिक कार्य हमेशा से ही ढीले रहे हैं। 2010 में आई बाढ़ के दौरान भी गांव बाढ़ से प्रभावित हुआ था। ग्रामीणों को अपने स्तर पर बचाव कार्य करने पड़े थे और 2023 में भी यही हाल रहे। कोई प्रशासनिक मदद नहीं मिली। यहां तक की अपने स्तर पर ही ट्रैक्टरों से मिट्टी लाकर तटबंधों को मजबूत करना पड़ा था।
-हरदेव सिंह, गांव लहंगेवाला।
-पिछले साल जब घग्गर अपने उफान पर थी, तो उस समय गांव मत्तड़ से करीबन दो किलोमीटर दूर घग्गर के तटबंध पर कटाव हुआ था। उसे किसानों ने कड़ी मेहनत के बाद बंद कर दिया था। जिससे गांव मत्तड़ के एरिया में फसल व घरों सहित किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ था। उस समय प्रशासन ने भी सहायता की थी। कुछ दिनों बाद ही मानसून सीजन शुरू होने है, तो अभी तक उन तटबंधों को मजबूत करने के लिए प्रशासन की ओर से कोई भी कदम नहीं उठाए गए। चार-पांच महीने पहले गांवों में हुई जनसंवाद यात्रा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को गांव के नजदीक घग्गर में पत्थर लगवाने के लिए ज्ञापन सौंपा था।
-अजायब सिंह, सरपंच, गांव मत्तड़।
-बाढ़ बचाव को लेकर कार्य आरंभ किया जा रहा है। मनरेगा के तहत यह कार्य करवाए जाएंगे। जिसके तहत ओटू हेड से निकलने वाली सभी ड्रेनों की सफाई करवाई जाएगी। साथ ही ओटू हेड के गेट पर भी कार्य चल रहा है। पिछले साल भी बाढ़ के कारण कुछ बांधों को मजबूत करना पड़ा था। विभाग ने 5 करोड़ का अस्टीमेट तैयार किया है।
-अजीत हुड्डा, कार्यकारी अभियंता, घग्गर ब्रांच, सिंचाई विभाग, सिरसा।