अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले मंगलवार को जिले भर से आए किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर रोष प्रदर्शन किया और बाद में लघु सचिवालय में मुख्य गेट के बाहर डेरा डाल जमकर नारेबाजी की। सुरक्षा को लेकर पुलिस बल पूरी तरह से चौकस रहा।
प्रदर्शनकारियों ने मांगें पूरी न होने को लेकर अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई और भविष्य में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित अलग अलग ज्ञापन सीटीएम डॉ. वेद बैनीवाल को सौंपे, साथ ही किसानों की समस्याओं को लेकर जल्द डीसी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित करने पर विचार-विमर्श हुआ।
आरोप : बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने को फसल बीमा योजना लागू
अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले मंगलवार को जिले भर से आए किसान बरनाला रोड स्थित चौ. देवीलाल पार्क में एकत्रित हुए। यहां पर उन्होंने धरना देकर सरकार की किसान विरोधी नीतियों को लेकर नारेबाजी की।
इसके बाद जिला प्रधान सुरजीत सिंह के नेतृत्व में किसान प्रदर्शन करते हुए बरनाला रोड से स्टेडियम होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों को देखते ही पहले से तैनात पुलिस बल ने गेट पर सुरक्षा घेरा डाल दिया और किसी को अंदर नहीं जाने दिया। ऐसे में किसान गेट के सामने सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।
इस मौके पर पूर्व विधायक हरपाल सिंह ने कहा कि खेती में बढ़ते लागत मूल्य से किसान कर्जदार हो गया है, ऐेसे में प्रतिदिन करीब 52 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना से किसानों को कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि बीमा कंपनियों को ही लाभ पहुंचाने के लिए इसे लागू किया गया है।
आरटीआई के तहत सूचना नहीं दी तो जाएंगे कोर्ट
उन्होंने कहा कि सरकार ने गेहूं के आयात से टैक्स हटाकर बडे़ अनाज व्यापारियों के लिए मुनाफे का रास्ता खोल दिया है। जिला प्रधान सुरजीत सिंह ने कहा कि जिले में लावारिस पशुओं की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनती जा रही है।
सरकार के संरक्षण में पल रहे संगठन तथाकथित गो भक्त बनकर इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने खाद, बीज पानी, कीटनाशक के मामले में किसानों को कंपनियों के भरोसे सौंप दिया। इस मौके पर राजकुमार शेखुपुरिया ने कहा कि नरमा के मुआवजे को लेकर आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी, लेकिन नहीं दी गई, क्योंकि इसमें तीन पटवारी और दो तहसीलदार लपेटे में आ रहे हैं। अगर सूचना नहीं दी तो कोर्ट में जाएंगे। इसके बाद उन्होंने मौके पर ज्ञापन लेने पहुंचे सीटीएम को खरी-खरी सुनाई।
सीटीएम ने यह दिया आश्वासन
नगराधीश ने कहा कि जिन आठ गांव के किसानों को मुआवजा नहीं मिला है, उनके नाम लिखकर दिए जाएं, इस बारे में डीआरओ से इस बारे में कहा जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि नहरी पानी के वितरण को लेकर चेंज किए गए शेडयूल के बारे में सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता से बातचीत की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लावारिस पशुओं के चलते गांवों में भाईचारा खराब हो रहा है और स्थिति कभी भी विस्फोटक हो सकती है। इस समस्या को प्रशासन मजाक में कतई न लें। इसके बाद तय हुआ कि किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उपायुक्त की बैठक कर समस्याओं को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना समाप्त कर दिया। इस मौके पर राजेंद्र बालासर, ओपी सुथार, गुरटैक सिंह, सतनाम धनूर, जोहरी लाल, बलविंद्र बालासर, गुरदत्त बाजेका, सेवक सिंह, जंटा सिंह, सरपंच बूटा सिंह, राजीव कुमार, रमेश सहारण, रणजीत सिंह घोड़ावाली और लक्ष्मण सिंह हस्सू ने विचार व्यक्त किए।