बरसात नहीं होने से 25 फीसदी खेतों में धान की रोपाई प्रभावित
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संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। मानसून मौसम में पर्याप्त बारिश नहीं होने से रानियां क्षेत्र की जीवन नगर बेल्ट में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। लगातार कम वर्षा और घग्गर नदी में बरसाती पानी नहीं पहुंचने से धान उत्पादक किसान गंभीर संकट में हैं। खेतों में पानी की कमी के कारण धान की फसल सूखने लगी है जबकि बड़ी संख्या में खेत अब भी रोपाई का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि एक सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो हजारों एकड़ में खड़ी फसल बर्बाद हो सकती है।
जीवन नगर क्षेत्र के बणी, करीवाला, ढाणी शोभा सिंह, धर्मपुरा, संतोखपुरा, दमदमा, हरिपुरा, जगजीत नगर, अमृतसर, संत नगर, जीवन नगर, ढाणी लहरांवाली, भड़ोलियांवाली, नाईवाला, दलीप नगर, बालासर, सुरजीतपुर थेड़ी, नाकोड़ा, मस्तानगढ़ और हिम्मतपुरा समेत दो दर्जन से अधिक गांवों में बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है।
इस बार सामान्य से काफी कम बारिश होने और घग्गर नदी में पानी नहीं आने से सिंचाई संकट गहरा गया है। खेतों की नमी खत्म हो रही है और कई जगह मिट्टी में दरारें पड़ने लगी हैं। किसानों के अनुसार धान की फसल पर प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च हो चुका है।
इसमें खेत की तैयारी, बीज, खाद, सिंचाई, डीजल, मजदूरी और निराई-गुड़ाई का खर्च शामिल है। इसके बावजूद क्षेत्र के करीब 25 प्रतिशत खेतों में अब तक धान की रोपाई नहीं हो सकी है। जिन खेतों में रोपाई की गई है, वहां भी पानी के अभाव में पौधे पीले पड़ने लगे हैं।
हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कुछ किसानों ने नुकसान बढ़ते देखकर धान की फसल पर हल चलाकर उसे मिट्टी में मिला दिया है। वहीं, कई किसान अब कम पानी में तैयार होने वाली बाजरा जैसी फसलों की बुवाई कर रहे हैं ताकि कम से कम कुछ आय सुनिश्चित हो सके।
किसान सुखविंदर सिंह, नवतेज सिंह, बलदेव सिंह, कश्मीर सिंह, जसविंदर सिंह, गुरसाहब, कुलदीप, लालचंद और बुध सिंह ने बताया कि क्षेत्र में भाखड़ा नहर का पानी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा। मजबूरी में किसान ट्यूबवेलों पर निर्भर हैं जिससे भूजल स्तर तेजी से गिरने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि भाखड़ा नहर के माध्यम से तत्काल पर्याप्त सिंचाई पानी उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रभावित किसानों को राहत दी जाए और फसल खराब होने की स्थिति में उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द सिंचाई की व्यवस्था नहीं हुई तो इस बार धान उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
ओढ़ां क्षेत्र में झमाझम बारिश से मिली राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
ओढ़ां। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे आमजन को सोमवार देर शाम हुई झमाझम बारिश ने बड़ी राहत दी। तेज हवाओं के साथ करीब एक घंटे तक हुई जोरदार बारिश से मौसम पूरी तरह बदल गया और तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
बारिश के बाद लोगों ने राहत की सांस ली जबकि किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान लौट आई। ओढ़ां, जंडवाला जाटान, बनवाला, रत्ताखेड़ा और राजपुरा सहित कई गांवों में अच्छी बारिश हुई। वहीं, दूसरी ओर मलिकपुरा और आसपास के कुछ गांवों में बादल तो छाए लेकिन बारिश नहीं होने से किसान मायूस नजर आए।
क्षेत्र में कहीं अच्छी बारिश तो कहीं सूखे जैसे हालात रहने के कारण लोगों के बीच कहीं बरसे, कहीं तरसे की चर्चा दिनभर होती रही। लगातार हुई बारिश के कारण गांवों की गलियां पानी से लबालब भर गईं और कई स्थानों पर जोहड़ जैसा दृश्य देखने को मिला।
खेतों में भी पानी भर गया जिससे लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रही फसलों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है। पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण कपास, धान और अन्य खरीफ फसलें प्रभावित हो रही थीं तथा किसानों को सिंचाई के लिए बोरवेलों पर निर्भर रहना पड़ रहा था।
ऐसे में यह बारिश किसानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है। हालांकि, बारिश के साथ चली तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर नरमे की फसल झुक गई तथा पशुओं के लिए खेतों में खड़ा हरा चारा भी बिछ गया, जिससे किसानों को आंशिक नुकसान उठाना पड़ा।
इसके बावजूद अधिकांश किसानों का मानना है कि बारिश से होने वाला लाभ नुकसान की तुलना में कहीं अधिक है और इससे फसलों की बढ़वार में तेजी आएगी। मौसम में आए इस बदलाव से आमजन को भी भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली।