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Sirsa News: मंडियों में मजदूरों की कमी बन रही बाधा, उठान धीमी

Sun, 19 Apr 2026 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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मंडी में उठान नहीं होने के कारण पड़ी गेहूं की बोरिया।
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- सिरसा मंडी में खड़े 20 में से 12 ट्रक खड़े थे खाली, व्यवस्था बनाने में फेल हो रही एजेंसी
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फोटो -
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले की मंडियों में उठान की गति बेहद धीमी है। मंडियों में गेहूं ही गेहूं नजर आ रहा है। कहीं बोरियों में पड़ा है तो कहीं खुले में तिरपाल डालकर छोड़ दिया गया है। अधिकारियों की सक्रियता भी उठान की गति बढ़ाने में नाकाम हो रही है।

उठान को लेकर सबसे अहम बात यह है कि पोर्टल या सर्वर को आधार बना दिया गया है लेकिन जब रविवार को उठान के दिन मंडी का दौरा किया गया तो मंडी में 20 ट्रक नजर आए। इनमें से महज सात से आठ में ही लोडिंग थी बाकी ट्रक खाली नजर आ रहे थे।
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मंडी में इस बारे में पता करने पर सामने आया कि मजदूरों की कमी से ट्रकों की भराई नहीं हो रही है। भराई नहीं होने के कारण ट्रक मंडी में खड़े हैं। रविवार होने के कारण सर्वर की समस्या शून्य रही। मुख्य मंडी के अलावा खरीद केंद्रों के भी यही हाल हैं। -
मंडियों में उठान नहीं होने के कारण एडिशनल अनाजमंडी व कपास मंडी में आढ़तियों ने खुले पड़े गेहूं पर तिरपाल डालकर ढक दिया है ताकि गेहूं खराब न हो और ज्यादा सूखे भी नहीं। उठान नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार मंडी में सही तरह से उठान होने की सूरत में एक दिन में 21000 बैग उठान की क्षमता है जबकि मंडी में तीन लाख के आसपास बैग पड़े हैं।
आढ़तियों के अनुसार, मंडी में गेहूं की आवाज को महज कुछ ही दिन बचे हैं। अगले सप्ताह के बाद आवक घट जाएगी लेकिन धीमी गति से होने वाले उठान से गोदामों में माल नहीं लगेगा और किसानों को पेमेंट में देरी होगी।
सही मायने में 15 अप्रैल का बोरियों में भरा हुआ गेहूं भी अभी तक उठा नहीं है। चार दिन बीत चुके हैं और दो से तीन दिन और बीत जाने की उम्मीद है। ऐसे में किसान के खाते में कब पैसा आएगा और कब वह अपनी कपास या अन्य बिजाई करेगा। किसानों को अपने बच्चों के एडमिशन आदि का खर्च भी देना होगा। सरकार को उठान में तेजी लानी चाहिए ताकि किसानों को समय पर उनका पैसा मिल सके।
पोर्टल भी बना 15 प्रतिशत किसानों के लिए आफत
सरकार ने किसानों की फसल खरीद को लेकर पोर्टल सिस्टम लागू कर दिया। 15 प्रतिशत किसान ऐसा रह गया जिन्हें जानकारी ही नहीं थी क्योंकि ग्रामीण स्तर पर ग्रामीण सचिव से लेकर पंचायतों तक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और किसानों को जागरूक नहीं किया गया है।
इस कारण मजबूरन किसानों को 2425 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिना एमएसपी के गेहूं बेचना पड़ रहा है। 160 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, कई किसानों को नॉमिनी बनाने की जानकारी नहीं थी। सीएचसी वालो ने भी गंभीरता नहीं दिखाई और किसान को जागरूक नहीं किया।
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सरकार ने पोर्टल को बंद कर दिया जबकि पहली बार लागू हुई इस व्यवस्था को लेकर पोर्टल खुला रखना चाहिए थे। इस कारण भी कई किसान अपने माता पिता के नाम की फसल को बेच नहीं पाए।
मौसम में दिखा बदलाव
रविवार शाम को मौसम में बदलाव देखने को मिला। बादलवाही होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई क्योंकि मंडियों में बड़े स्तर पर खुले में गेहूं पड़ा है। -
कोटस
एजेंसी को भी उठान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, आढ़तियों को भी मजदूरों की व्यवस्था कर ढुलाई करवाने के आदेश दिए हैं।
-वीरेंद्र मेहता, मार्केट कमेटी सचिव
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