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Sirsa News: फास्ट फूड का बिगड़ गया जायका, डीजल भट्ठी की बढ़ी मांग

Sun, 15 Mar 2026 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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जितेंद्र पकौड़े पर ग्राहक का इंतजार करते हुए विक्रम। संवाद
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कॉमर्शियल गैस किल्लत से रेहड़ियों पर अब नजर नहीं आते है पराठे खिलाने वाले, चाय की चुस्की भी हुई कम
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- किसान रसोई हुई बंद तो मजदूरों को उठानी पड़ रही परेशानी

फोटो 22 से 28

संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर में कॉमर्शियल सिलिंडर सप्लाई बंद होने का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। सालों पुरानी दुकानों पर जहां भीड़ की कमी नहीं थी। अब चुनिंदा ग्राहक नजर आते हैं। 25 से 35 प्रतिशत तक व्यापार पर असर पड़ा है। वहीं, बाजार भी सुनसान नजर आ रहे हैं। फास्ट फूड से लेकर मिठाई की दुकानों पर असर है।

बाजार में आई कमी, जहां गांवों में सरसों की कटाई का असर बताया जा रहा है। वहीं, गैस सिलिंडर की लाइनों का असर भी देखने को मिल रहा है। बड़े स्तर पर दुकानदार डीजल की भट्ठी लगाकर अपने व्यवसाय को बचा रहे हैं। वहीं, गैस भट्ठी के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले ब्लोअर की मांग तेजी से बढ़ गई है। यह ब्लोअर पंजाब और दिल्ली से सप्लाई होता है। ऐसे में ग्राहकों से ही मिस्त्री ब्लोअर लेकर आने की मांग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इंडक्शन की मार्केट में मांग बढ़ने के साथ ही रेट में इजाफा हो गया है। स्टॉक की कमी देखने को मिल रही है।
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प्रशासन से मांगी पुलिस सुरक्षा
कुछ ग्रामीण एरिया में गैस सप्लाई को लेकर एजेंसियों को परेशानी उठानी पड़ रही हैं। इसको लेकर जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी से शुक्रवार देर शाम को एजेंसी संचालकों ने बैठ कर कर्मचारियों की सुरक्षा की मांग की थी। क्योंकि वेदवाला व एक दो अन्य गांवों में गैस की गाड़ियों को घेर लिया गया था। इस कारण एजेंसी ने अपनी गाड़ियां वापस बुला ली थीं। इंडेन गैस एजेंसी संचालक सूरज बंसल ने बताया कि गैस की कमी नहीं है। लोग भयभीत हो रहे हैं। गांवों में सप्लाई पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। प्रशासन से पुलिस सुरक्षा व सहयोग की मांग की हैं। प्रशासन सहयोग करेगा तो गांवों में भी नियमित रूप से सप्लाई रहेगी।
जितेंद्र से लेकर भानु के पकौड़े का घटा व्यापार

सिरसा में शिव चौक से वाल्मीकि चौक के बीच भानु और जितेंद्र के पकौड़े मशहूर है। गुरु-चेले की ये दुकानें जायके लिए जानी जाती हैं। मौजूद समय में कॉमर्शियल सिलिंडर की कमी का असर दोनों पर पड़ रहा है।

नीरज कुमार ने बताया कि 1950 में यह दुकान दादा भानु प्रसाद ने शुरू की थी। उन्हीं के नाम पर दुकान का नाम भानु पकौड़े वाला है। कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिलने के कारण परेशान आई है। एक दिन शाम को सिलिंडर खत्म हो गए तो दुकान बंद करनी पड़ी। अगले दिन किसी तरह से डीजल भट्ठी की व्यवस्था की। एक भट्ठी का और ऑर्डर दिया हुआ है। सिलिंडर के मुकाबले डीजल भट्ठी में कुछ दिक्कत आती है। अब मजबूरी है। लाइट जाने पर ब्लोअर बंद हो जाता है तो उसके लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ती है। इस माहौल में 25 से 35 प्रतिशत काम प्रभावित हुआ है।

वहीं, जितेंद्र पकौड़े के संचालक विक्रम ने बताया कि जितेंद्र नाम पिता जी का था। उनके नाम पर ही यह पकौड़े की दुकान है। अब काम आधा रह गया है। आज आपके सामने खाली बैठा हूं जबकि पहले समय ही नहीं रहता था। लोग गैस सिलिंडर की लाइनों में लगे हुए हैं। कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं तो डीजल भट्ठी बनवाने का ऑर्डर दिया है। 15 हजार रुपये में वह पड़ेगी और ब्लोअर हमें लाकर देना होगा। मार्केट में ब्लोअर उपलब्ध ही नहीं हैं।
गलियों से गायब हुए फूड कोर्ट व रेहड़ियां
शहर की गलियों में अब दिन के समय फूड कोर्ट नजर नहीं आते हैं। चाय की टपरी भी सुनसान हो गई हैं। कभी युवा जहां बर्गर, चाउमीन का मजा लेते थे, अब कॉमर्शियल गैस किल्लत के चलते बंद हो गई हैं। घरेलू सिलिंडर का प्रयोग वे कर नहीं सकते हैं क्योंकि विभाग की कार्रवाई पर सिलिंडर जब्त हो जाएगा। इससे उनका नुकसान होगा। मौजूदा समय में 70 प्रतिशत रेहड़ी वालों का काम प्रभावित हुआ है। कॉलेजों के आसपास लगने वाले फूड कोर्ट भी गायब हो गए हैं। वहां अब महज गोल गप्पे की रेहड़ी ही नजर आती है।
संस्थाओं के लिए निशुल्क भोजन खिलाना बना चुनौती
नागरिक अस्पताल में चल रही निशुल्क भोजन की सुविधा अब चूल्हे पर आ गई हैं। सिलिंडर न मिलने की सूरत में लकड़ी का प्रयोग करना पड़ रहा है। यदि आगामी दो से तीन दिनों में सिलिंडर की सुविधा प्रशासन नहीं देता है तो यह सुविधा बुरी तरह से प्रभावित होती। ऐसे में नागरिक अस्पताल में बड़े स्तर पर तामीरदार व मरीज भोजन की सुविधा से वंचित रह जाएंगे। वहीं, अरोड वंश चौक के पास बनी हरि भोजन लंगर सेवा पर भीड़ बढ़ गई है। जहां पहले प्रतिदिन 200 से 250 लोग आते थे। अब 350 के आसपास पहुंच गए हैं। गरीब व जरूरतमंद लोग यहां पर खाना खा रहे हैं। संस्थान के लोगों ने बताया कि सिलिंडर को लेकर बड़े स्तर पर दिक्कत आई है। जो बचे हुए थे उनसे एक या दो दिन का काम चल जाएगा। उसके बाद कोयला व लकड़ी का प्रयोग करना पड़ेगा।
मंडी में किसान रसोई हुई बंद, मजदूर हुए परेशान
किसान भवन में बनाई हुई रसोई पर ताला लगा हुआ था। गैस सिलिंडर नहीं मिलने के कारण रसोई को बंद कर दिया गया। इस कारण कम दामों पर मजदूरों को भोजन उपलब्ध नहीं हो पा रहा हैं। सरसों मंडी में पहुंचने लगी है तो जल्द ही गेहूं का सीजन शुरू हो जाएगा। इस सुविधा के बंद होने पर मजदूरों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वे निशुल्क भोजन वितरण वाली संस्थाओं में जाकर भोजन कर रहे हैं।
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कोट्स
गैस एजेंसियों के पास स्टॉक की कमी नहीं है। लोगों को धैर्य बनाकर रखना होगा। एजेंसी संचालकों ने गांवों में गाड़ियों की सुरक्षा की मांग की है। इसको लेकर उपायुक्त को अवगत करवा दिया गया है। उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार उसी प्रकार की व्यवस्था की जाएगी। अभी स्थिति सामान्य है । कालाबाजारी पर टीमें नजर जमाए हुए हैं।
-हरविर सिंह, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक
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