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स्थानीय निवासी बोले, अभियान नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। शहर में बेसहारा पशुओं और आवारा कुत्तों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। गलियों में सांड़ों के झुंड और सड़कों पर घूमते आवारा कुत्ते लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर परिषद के दावों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए अकेले बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर सांड़ों के आपस में भिड़ने से अफरा-तफरी की स्थिति बनती है। वहीं, कुत्तों के झुंड राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को दौड़ाते हैं। शहर की एकता नगरी, आदर्श नगर, राजीव नगर, बस स्टैंड रोड और बठिंडा रोड की गलियों में बेसहारा पशुओं का जमावड़ा देखा जा रहा है।
शाम के समय कई पशु सड़कों के बीच बैठ जाते हैं जिससे वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा बढ़ जाता है। रात के समय आवारा कुत्तों के झुंड भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। डबवाली शहर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेसहारा पशुओं की समस्या बनी हुई है। दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।
बेसहारा पशुओं और कुत्तों से हुए हादसे
पिछले दिनों गांव गंगा के पास और 5 सितंबर को गीदड़खेड़ा-गंगा रोड पर बेसहारा पशुओं के कारण सड़क हादसे हुए थे। इन हादसों में दो बाइक सवार युवकों की मौत का मामला सामने आया था। सिरसा रोड और चौटाला रोड सहित आसपास के मार्गों पर भी पशुओं के अचानक सड़क पर आ जाने से हादसे हो रहे हैं। वहीं, गांव बिज्जुवाली और देसूजोधा में कुछ माह पहले आवारा कुत्तों के काटने से एक-एक महिला की मौत भी हुई थी। ग्रामीणों ने प्रशासन से कुत्तों की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय निवासी तेजभान, सुरेश कुमार, अमित कुमार, जयकिशन, जसवंत सिंह, महेश कुमार, जसवीर सिंह, रामकुमार, प्रताप सिंह, जगदीश राय, राजेंद्र कुमार, विकास और रोहताश सहित अन्य लोगों ने नगर परिषद से स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि नगर परिषद को सिर्फ अभियान चलाने के बजाय समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। रात के समय कम रोशनी वाले मार्गों पर पशु दिखाई नहीं देते जिससे हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। लोगों ने शहर और मुख्य मार्गों से बेसहारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजने की मांग की है।
नगर परिषद का अभियान जारी
नगर परिषद अध्यक्ष टेकचंद छाबड़ा ने बताया कि बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चल रहा है। गोशाला या नंदीशाला में जगह मिलने पर पशुओं को वहां भेजा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए काफी संख्या में नसबंदी करवाई जा चुकी है। इसके अलावा, कुत्तों को पकड़ने का ठेका भी दिया गया है और उन्हें शेल्टर होम में रखा जा रहा है। छाबड़ा ने शहरवासियों को परेशानी नहीं आने देने और समस्या का जल्द समाधान कराने का आश्वासन दिया।