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Sirsa News: पेंशन की टेंशन...सिस्टम के कोड़े ने तोड़ दी बुढ़ापे की लाठी

Sat, 14 Feb 2026 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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सिरसा में जिला समाज कल्याण विभाग में पेंशन दुरुस्त करवाने को लेकर लगी भीड़।
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सिरसा। परिवार पहचान पत्र योजना को लागू हुए पांच साल हो गए हैं लेकिन अभी भी इसकी प्रक्रिया में खामियां सामने आ रही हैं। कई मौकों पर प्रशासनिक अधिकारी और सरकार प्रतिनिधि भी इसे स्वीकार कर चुके हैं। इन दिनों सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग झेल रहे हैं जिनकी बुढ़ापा पेंशन को रोक दिया गया। आय सत्यापन के मानकों में एक के बाद एक संशोधन करने से मामला पेचीदा हो चला है।
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बुजुर्गों का कहना है कि वे उस गलती का खामियाजा भुगत रहे हैं जो उनके स्तर पर हुई ही नहीं है। 70 से 90 वर्ष तक के बुजुर्ग कभी समाज कल्याण विभाग, कभी पीपीपी कार्यालय तो कभी सीएससी सेंटर के चक्कर काटने पर मजबूर हैं। सीधे तौर पर आज तक सिंगल विंडो सिस्टम नहीं बनाया गया है। नतीजतन आय सत्यापन के नाम पर प्रदेश में 36 हजार बुजुर्गों की पेंशन रोक दी गई।
अकेले सिरसा जिले में 1400 लाभार्थियों का आंकड़ा सामने आया है। विरोध के स्वर बुलंद होने और प्रदर्शन शुरू होने पर एक बार के लिए तो पेंशन जारी कर दी गई है। लेकिन बुजुर्गों का कहना है कि आय सत्यापन की प्रक्रिया पुन: जरूर होगी। यह किस रूप में होगी और कौन सा विभाग करेगा। इसके लिए कोई गाइड लाइन जारी नहीं हुई है।
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अधिकारियों के अनुसार सीएससी सेंटर के पास परिवार पहचान पत्र यानी पीपीपी के तहत क्या दस्तावेज लिए जाएंगे। यह सूची होती है। उसके उपरांत भी बुजुर्गों की पेंशन के बड़े स्तर पर खामियां छोड़ दी जाती है। पूर्व में बने परिवार पहचान पत्र के सत्यापन में यही खामियां सामने आई हैं। जिसके लिए दो माह में चार हजार से ज्यादा बुजुर्ग जिला प्रशासन के परिवार पहचान पत्र कार्यालय में दस्तावेज दुरुस्त करवा चुके हैं।
ये पांच है मुख्य कारण बुजुर्गों की पेंशन रोकने के

1.फसल खरीद का पैसा खाते में जमा होना- किसानों का मेरी फसल मेरा ब्यौरा के माध्यम से फसल बेचने का पैसा खाते में आता है। इससे आय 3 लाख रुपये सालाना से ऊपर दर्ज कर ली जाती है।

2.खाते में दूसरे का पैसा जमा होना-कई बार बुजुर्गों के पेंशन खाते में पैसे का लेन देन कर दिया जाता है। आढ़ती या परिवार के सदस्य ऐसा कर देते हैं। इसे आय मानकर बुजुर्ग की पेंशन रोक दी जाती है।

3.पीपीपी में बैंक खाता जुड़ा न होना- कई लोगों के बैंक खाते ही परिवार पहचान पत्र में अटैच नहीं थे। यह करवाना जरूरी होता है।

4.पीपीपी में जन्म तिथि सत्यापित न होना- जन्म तिथि का पीपीपी में वेरीफिकेशन करवाना जरूरी है।

5.रिटर्न भरा होना- कई बार संबंधित व्यक्ति द्वारा सिविल स्कोर अच्छा करने के मकसद से पूर्व में आईटीआर भरी होती है, जिससे उसे टैक्स पेयर मान लिया जाता है जबकि वह करदाता श्रेणी में नहीं होता है।





तीन योजना का डाटा अपडेशन, पेंशन व बीपीएल पर भारी

प्रदेश सरकार द्वारा तीन सरकारी मेरी फसल मेरा ब्यौरा, परिवार पहचान पत्र और किसान कार्ड के डाटा को लगातार अपडेट किया जाता है। जैसे मेरी फसल मेरा ब्योरा के तहत पैसा आना व भूमि उसके पास कितनी है। वहीं, किसान कार्ड के दौरान व्यक्ति या किसान ने कितनी भूमि दिखाई है। जब इन सब से परिवार पहचान पत्र के डाटा का मिलान होता है तो व्यक्ति की आय में बढ़ोतरी हो जाती है। यही बार है कि बार बार अपडेशन बुजुर्गों की पेशन से लेकर बीपीएल तक पर भारी पड़ रही है। सरकार का सत्यापन सभी के लिए सिरदर्द बन गया है।





सरकारी योजना के लिए यह सत्यापित होना जरूरी

1. जन्म तिथि

2. बैंक का खाता

3. जाति

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पीपीपी में जन्मतिथि सत्यापित करवाने के दस्तावेज

जन्म प्रमाण पत्र

स्कूल एसएलसी

पांच साल पुराने वोटरकार्ड की कॉपी

दसवीं की मार्कशीट

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प्रदेश भर में 35 से 36 हजार बुजुर्गों की पेंशन रोकी गई थी। जिले के अंदर 1400 के आसपास लाभार्थियों की पेंशन रुकी थी। सभी की पेंशन जारी कर दी गई है। दस्तावेजों में कमी के चलते ऐसा हुआ था। परिवार पहचान पत्र के वेरीफिकेशन में यह कमी सामने आई थी।

-सत्यवान ढिलौड, जिला समाज कल्याण अधिकारी।



परिवार पहचान पत्र बनवाते समय या अपडेट करवाते समय दस्तावेजों का ध्यान रखना जरूरी है। दस्तावेजों की कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहीं कारण है कि 2 माह में 4 हजार बुजुर्ग अपने दस्तावेज दुरुस्त करवाने के लिए पहुंचे हैं। जिनके दुरुस्त किए गए है।
-रविंद्र कुमार, पीपीपी इंचार्ज



बुजुर्ग बोले

उसकी पेंशन रोक दी गई है। पहले आ रही थी। अब कारण क्या है। उन्हें पता ही नहीं है। -बचन कौर(75) नुहियांवाली
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कोई फैमिली आईडी में दिक्कत आई है। इसको लेकर उनकी पेंशन बंद कर दी गई है। कार्यालय में चक्कर लगाए हैं। उन्होंने सीएससी से दस्तावेज जमा करवाने काे कहा है। -बलदेव सिंह यादव (85), ओढां
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