करीब डेढ़ शताब्दी पूर्व घटित 1857 के गदर से भी पहले बसा गांव चौटाला आज नया इतिहास लिखेगा। पहली बार महिला के हाथ में गांव की चौधर आएगी। वीआईपी सहित 11057 मतदाता इतिहास के साक्षी बनेंगे। जिसमें 5931 पुरुष मतदाताओं के साथ-साथ 5126 महिलाएं भी शामिल हैं।
उपमंडल डबवाली के अंतर्गत पड़ने वाले इस गांव की माटी ने जहां 10 स्वतंत्रता सेनानी पैदा किए हैं। वहीं देश को एक उपप्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री भी दिया है।
हरियाणा की राजनीति में तो इस गांव का खास योगदान रहा है। प्रदेश में अभी तक ऐसी विधानसभा का गठन नहीं हुआ है जब इस गांव का कोई व्यक्ति विधायक बन कर विधानसभा में नहीं पहुंचा हो। नेताओं की नर्सरी कहे जाने वाला यह गांव प्रदेश को दो मुख्यमंत्री, पांच सांसद तथा तेरह विधायक दे चुका है।
जुल्म से टक्कर लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों में चौ. देवी लाल, उनके बडे़ भाई साहब राम, खूब राम, लेखराम, गंगा राम गोठिया, खेता राम पंडित, हुक्माराम, डूंगर राम पंडित, तुलसी राम बनियां आदि शामिल है। इनमें से चौ. देवीलाल भारत के उपप्रधानमंत्री रहे हैं।
साहब राम के नाम से गांव में एक स्टेडियम बनाया गया है जहां अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय आयोजन होते हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व उपप्रधानमंत्री चौ. देवीलाल के बडे़ भाई साहब राम ही यहां से सबसे पहले विधायक बनें। उसके बाद चौ. देवीलाल दो बार विधायक व फिर राज्यसभा सदस्य बने।
चौ. देवीलाल वीपी सिंह सरकार में उपप्रधानमंत्री बने। चौ. देवीलाल के पुत्र प्रताप सिंह व ओमप्रकाश बाद में विधायक बनें। रणजीत सिंह सांसद बने।
इनके अलावा जय नारायणवर्मा, बृजलाल गोदारा व मनीराम भी विधायक रहे हैं। चौ. ओमप्रकाश चौटाला के पुत्र अजय सिंह भी सांसद बने। उनकी पत्नी नैना सिंह चौटाला अब डबवाली की विधायक हैं। जबकि बेटा दुष्यंत चौटाला हिसार से सांसद हैं। अभय चौटाला ऐलनाबाद के विधायक हैं।
इतिहास पर नजर
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह गांव करीब डेढ़ शताब्दी पूर्व घटित 1857 के गदर से भी पहले का बसा हुआ है। वे बताते हैं कि पूर्व में यहां पर एक विशाल पेड़ हुआ करता था जिसकी चार बड़ी-बड़ी टहनियां चार दिशाओं में फैली हुई थी।
चार डालों वाले इसी वृक्ष के कारण इसका नाम चौ-डाला पड गया जो बाद में चौटाला हो गया। इस गांव के कुओं का पानी काफी मीठा हुआ करता था इसलिए आसपास संगरिया, भगतपुुर के अलावा दूर दराज के लोग भी यहां पर पानी लेने आया करते थे।
अब तक रहा पुरुषों का राज रहा
गांव चौटाला के पहले सरपंच स्वतंत्रता सेनानी खूब राम जाखड़ थे। उनके बाद रूप राम कड़वासरा सरपंच बने। वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए।
उनकी जगह पुन: गांव की कमान खूब राम जाखड़ के हाथों में आ गई। वर्ष 1995 में विनोद सिहाग गांव के सरपंच बने। वर्ष 1995-2000 की अवधि के दौरान प्रेम सिहाग को भी सरपंच बनाया गया था।
वर्ष 2000 में चौटाला सरकार के समय गांव में पहली बार सर्वसम्मति से सरपंच का चुनाव हुआ। जिससे एक बार फिर स्वतंत्रता सेनानी जाखड़ को गांव का सरपंच बनने का मौका मिला। वर्ष 2005 में कृष्ण बिश्नोई के हाथ में गांव की बागडोर आ गई। वर्ष 2010 में हुए चुनाव में आत्मा राम छिंपा को गांव की कमान संभालने का मौका मिला।
अब तो घूंघट हटाना होगा
इतना लंबा सफर तय होने के बावजूद आज तक किसी महिला के हाथ में गांव की कमान नहीं आई थी। नेताओं के गांव के रूप में जाने वाले गांव चौटाला राजस्थान से सटा होने के कारण बागड़ी, हिंदी बाहुल्य गांव है। हरियाणवी संस्कृति के साथ-साथ इस गांव में राजस्थानी संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
आधी दुनिया घूंघट में नजर आती है। इस बार सरपंच की दौड़ में पांच महिलाएं हैं। महिला के हाथ में चौधर आने से इतिहास के साथ महिलाओं को भी बदलने का मौका मिलेगा। उम्मीद है कि घूंघट हटाकर महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी। महिला के हाथ में चौधर आने से नई क्रांति का सूत्रपात होगा।
वीआईपी करेंगे मतदान
पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की पत्नी स्नेहलता, इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला, कांग्रेस नेता केवी सिंह, युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अमित सिहाग, भाजपा नेता आदित्य चौटाला के साथ-साथ कई दिग्गजों का वोट गांव चौटाला में है। वीआईपी भी गांव चौटाला के इतिहास के साक्षी बनेंगे।
शिक्षा के मामले में पिछड़ा हुआ है गांव
क्रांतिकारियों तथा नेताओं का गांव होने के बावजूद चौटाला महिला अधिकारों तथा शिक्षा के मामले में पूरी तरह से पिछड़ा हुआ है।
कुछ समय पूर्व साक्षर भारत मिशन के तहत गांव में निरक्षरों की गणना की गई थी। करीब चार हजार ग्रामीण अंगूठा टेक पाए गए थे। इसमें सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की थी।