ओढां का बहुचर्चित पैक्स घोटाले का जिन्न पांच साल के बाद एक बार फिर फाइलों से बाहर निकल आया है। इस मामले में जांच के लिए डीएसपी विजिलेंस बृहस्पतिवार को ओढां पहुंचे और उन्होंने कोआपरेटिव सोसाइटी के उपभोक्ताओं से पूछताछ करते हुए उनके बयान दर्ज किए।
हालांकि जांच अधिकारी विजय पाल गोदारा ने यह कहते हुए कुछ भी बताने से इंकार किया कि अभी तक जांच चल रही है। इस मामले में आरोपी रहे तत्कालीन ब्रांच मैनेजर मोहनलाल ने एक शिकायत विजिलेंस विभाग को भेजते हुए जांच की मांग उठाई थी, जिसमें कहा गया था कि पैक्स मैनेजमेंट ने उनकी सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली राशि का कुछ हिस्सा रोक लिया है।
दर्ज जानकारी के अनुसार, वर्ष 2008-09 में मोहन लाल ने ओढां ब्रांच मैनेजर के पद पर रहते हुए पैक्स प्रबंधक गुरलाभ सिंह और सेल्समैन जगदीश के साथ मिलकर कई गांवों के किसानों व खेत मजदूरों को लोन दिया था। इसमें उन्होंने उक्त लोगों को 14 और 15 हजार रुपये देते हुए इनके नाम तकरीबन 70 से 80 हजार रुपये लोन दिखाया, जो रिकार्ड में सही साबित है।
इस पूरे मामले में 33 सदस्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा करते हुए तकरीबन 25 लाख रुपये का पैक्स को चूना लगाया गया। मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब असली नामों पर फ्ल्यूड मारकर उस पर फर्जी पात्रों के नाम और कुछ शिक्षकों के फर्जी खाते तैयार करने के मामले का खुलासा हुआ।
मामले की जांच हुई तो पैक्स विभाग ने ब्रांच मैनेजर मोहन लाल और गुरलाभ सिंह को निलंबित करते हुए उनसे डकारी गई राशि ब्याज समेत भरवा ली। कोआपरेटिव सोसाइटी विभाग के बोर्ड ने इस घपले की उच्चस्तरीय जांच करवाने के बाद ब्रांच प्रबंधक मोहन लाल, पैक्स प्रबंधक गुरलाभ सिंह, कैशियर जीतराम, क्लर्क दलीप मांझू, बलविंद्र सिंह क्लर्क, नुहियांवाली निवासी दयाराम बी ग्रेड को आरोपी मानते हुए सस्पेंड कर दिया था, जिनसे बाद में ब्याज समेत राशि भरवा ली थी। इस जांच के दौरान गुरलाभ की मौत हो गई थी और जीतराम व वेदपाल की जांच अभी चल रही है।
यूं हुई दोबारा जांच
वर्ष 2010 में तत्कालीन ब्रांच मैनेजर मोहन लाल सेवानिवृत्त हो गए, जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पीएफ, ग्रेच्युटी और कैश लीव आदि के रूप में मिलने वाले तकरीबन 15 लाख रुपये में से प्रबंधन ने 10 प्रतिशत राशि जुर्माने के रूप में काट ली। इसके बाद उन्होंने एक शिकायत विजिलेंस को भेजते हुए इस विषय पर जांच की मांग उठाई कि अन्य आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए सभी सुविधाएं बहाल कर दी गई, जबकि उन्हें फंसाते हुए इक्रीमेंट काट लिया।
घर से बुलाकर दिया गया था लोन
इस घपले में नुहियांवाली निवासी सारदूल राम, ओढां निवासी शीशपाल, सतपाल और बलवीर सहित काफी लोगों को राज्य चौकसी ब्यूरो के उपपुलिस अधीक्षक द्वारा नोटिस भेजते हुए जांच में शामिल होने की बात कही गई है। बृहस्पतिवार को नुहियांवाली, सालमखेड़ा व ओढां के उक्त खाताधारकों को हिसार के डीएसपी विजिलेंस विजय गोदारा ने नोटिस के आधार पर रेस्ट हाउस ओढां में बयान दर्ज करवाने के लिए बुलाया। किसान सारदूल नेहरा ने बताया कि उसका खाता पैक्स में है, जिसका वह सही लेनदेन कर रहा है। शीशपाल, सतपाल ओर बलवीर आदि का कहना था कि वर्ष 2009, 10 में सेल्समैन जगदीश ने उनसे यह कहकर अंगूठे लगवाए कि उन्हें 14-14 हजार रुपये बैंक ऋण देगा।
अगले ही दिन राशि दे दी गई। उसके बाद उन्हें नहीं पता कि उसने उनके नाम पर कितनी राशि डकारी। नुहियांवाली निवासी कालूराम गोदारा का कहना था कि उसने 28 सितंबर 2013 को 400 रुपये हिस्से के रूप में भरे थे, जबकि उसका लोन 2007 में पास दिखाया गया है। जिन उपभोक्ताओं ने डीएसपी को बयान दर्ज करवाएं है उन्होंने कहा है कि उन्हें तो सेल्समैन ही घर घर जाकर बुलाकर लाया था कि सरकारी स्कीम के तहत उन्हें 14-14 हजार रुपये दिए जाएंगे जो वापस नहीं करने।
अंगूठों का होगा मिलान : डीएसपी
डीएसपी विजयपाल गोदारा ने कहा कि मोहनलाल की तरफ से मिली शिकायत के आधार पर वे जांच करने आए हैं। जिनके नाम खाते हैं उनके बयान दर्ज किए गए हैं और जो अंगूठे व हस्ताक्षर उन्होंने कर्ज लेते समय लगाए हैं, उनसे मिलान किया जाएगा जिसके बाद पता चलेगा कि मोहन लाल दोषी है या उसे फंसाया गया है।