सिरसा की राम कॉलोनी में उखाड़ी गई सड़क।
सिरसा। शहर में विकास कार्य अब आम जनता के लिए राहत के बजाय आफत का सबब बनते जा रहे हैं। नगर परिषद प्रशासन और पार्षदों के बीच इंटरलॉकिंग ब्लॉक और सीसी सड़कों के निर्माण को लेकर चल रही खींचतान का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
हालात यह हैं कि कई गलियों व सड़कों को खोदकर दिनों से अधूरा छोड़ दिया गया है जिससे लोग धूल, गड्ढों और बदहाल रास्तों से जूझने को मजबूर हैं। नगर परिषद ने शहर के कई क्षेत्रों में इंटरलॉकिंग ब्लॉकों से सड़कें बनाने की योजना तैयार की थी। विभाग का तर्क था कि ये सड़कें कम समय में बनती हैं और भविष्य में सीवर या पानी की पाइपलाइन बिछाने के लिए इन्हें आसानी से उखाड़कर दोबारा लगाया जा सकता है। इसी आधार पर टेंडर जारी हुए।
कई पार्षदों ने अपने वार्डों में इंटरलॉकिंग का विरोध करते हुए सीसी सड़कें बनाने की मांग उठाई। जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि सीसी सड़कें अधिक मजबूत और टिकाऊ होती हैं जिन्हें लंबे समय तक मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती। इस राजनीतिक दबाव के बाद परियोजनाओं में तकनीकी बदलाव शुरू हुए। अब नए सिरे से प्रशासनिक स्वीकृतियां लेने, लागत संशोधित करने और डिजाइन बदलने के चक्कर में कई कार्य बीच में ही लटक गए हैं।
राम कॉलोनी में ठेकेदार ने पिछले दस दिनों से मुख्य सड़क को खोदकर छोड़ रखा है जिससे स्थानीय निवासियों का निकलना दूभर हो गया है। यदि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच पहले ही तालमेल बिठा लिया जाता तो जनता को इस नरक से न गुजरना पड़ता। विकास कार्यों की सिर्फ योजना बनाना ही काफी नहीं है उन्हें समय सीमा के भीतर पूरा करना भी प्रशासनिक जिम्मेदारी है।