नोटबंदी के बाद से सिरसा में सैकेंड हैंड वाहन बाजार औंधे गिर गया है जिसके उठने के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। बाजार मेें न कोई वाहन बेचने वाला है और न ही कोई खरीददार दिख रहा है। इस धंधे में लगे लोगों को दुकानों का किराया और कर्मचारियों के वेतन के लाले पड़ेे हुए हैं।
सिरसा में हुडा कांप्लेक्स परिसर और जनता अस्पताल रोड पर पुराने वाहन खरीदे और बेचे जाती हैं तो डबवाली में पुरानी जीपों को नया लुक देकर बेचा जाता है जिनकी पूरे देश में ज्यादा मांग होती है। 8 नवंबर की रात से हुई नोटबंदी से इस बाजार को हिलाकर रख दिया है। 90 प्रतिशत कारोबार नोटबंदी की भेंट चढ़ गया है। जिन्होंने कुछ वाहन लाकर दुकानों के आगे खड़े किए थे वे आज भी खड़े हुए हैं। हुडा कांप्लेक्स परिसर स्थित कार डीलर एसोसिएशन के पदाधिकारी महेंद्र गोस्वामी, सतनाम सिंह, अनिल मेहता, रॉकी, पूर्व प्रधान सतपाल शर्मा का कहना है कि शहर में करीब 100 लोग इस व्यापार से जुडे़ हैं।
उन्होंने बताया कि नवंबर से लेकर जनवरी तक उनका पीक सीजन होता है क्योंकि फसल मंडी में बिक चुकी होती हैं और लोगों के पास पैसा होता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग ही पुराने वाहन ज्यादा खरीदते हैं पर इस बार तो नोटबंदी ने उनका दिवाला ही निकालकर रख दिया है। उन्होंने बताया कि वे लोग दिल्ली, गुुरग्राम और उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों से वाहन खरीदकर लाते हैं जिन्हें यहां आकर बेचा जाता है या जिले के कुछ लोग जो अपने पुराने वाहन बेचना चाहते हैं वे उनके बाजार में लाकर खड़ा कर देते हैं जिसकी बिक्री पर उन्हें कमीशन मिलता है।
उन्होंने बताया कि कार बाजार में मारुति और हुंडई के पुराने वाहनों की सबसे ज्यादा मांग होती है और इसी को लेकर इस बार बाहर से वाहन भी खरीदे गए थे पर नोटबंदी ने सारे अरमानों पर पानी फेरकर रख दिया है। महेंद्र गोस्वामी ने बताया कि नोटबंदी से पहले प्रतिदिन 10 से 15 वाहन बिक जाते थे पर अब तो पांच-छह दिन में एक ही वाहन मुश्किल से बिकता है। उन्होंने बताया कि यह धंधा कैश में ही होता था पर इस बार तो कोई चेक देने तक को तैयार नहीं है क्योंकि लोगों के पास पैसा नहीं है। उन्होंने बताया कि आज बाजार में न तो वाहन बेचने वाला आ रहा है और न ही खरीदने वाला। अगर कोई ग्राहक आ भी जाता है तो भुगतान कैसे करें यह किसी की समझ में नहीं आता। उन्होंने बताया कि अब तक दुकान के किराये से लेकर सारे खर्च घर से वहन करने पड़ रहे हैं।
दूसरी ओर जनता अस्पताल रोड पर बाइक बाजार है जहां पर जिलेभर से आई पुरानी बाइक बेची और खरीदी जाती हैं। जनता अस्पताल ऑटो मार्केेट एसोसिएशन के प्रधान इंद्रजीत और उनके पुत्र साहिल कुमार का कहना है कि नोटबंदी के बाद यह व्यापार तबाह सा हो गया है। लोगों के पास कैश नहीं है तो बैंक से उन्हें कैश नहीं मिल रहा, खरीददार चेक से भुगतान करने से गुरेज करता है। उन्होंने बताया कि चेक के नाम पर ग्राहक सौदा की रद करके चल देता हैै। उन्होंने बताया कि इस रोड पर करीब 20 दुकानें हैं तो ये व्यापार कर रही है। दुकानदार देवीलाल, संजय कुमार, महेंद्र सैनी, कुलवंत सिंह ने बताया कि मुख्य बाजार तो संडे को ही लगता है। पहले एक दिन में कम से कम सौ बाइक बिक जाया करती थी पर अब ग्राहक नहीं दिख रहा है। उन्होंने बताया कि अगर कैश की ऐसी ही किल्लत रही तो धंधा ठप हो जाएगा।