ट्रैक पर लावारिस पशुओं के आ जाने से सोमवार अल सुबह लालगढ़-गुवाहटी एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी डबवाली के पास हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई। तेज स्पीड में चल रही गाड़ी के यदि अचानक ब्रेक लगते तो वह पटरी से उतर सकती थी, जिससे कई यात्रियों को चोटें आती।
चालक ने स्पीड को धीरे-धीरे कम किया, इस दौरान दो अलग-अलग मामलों में ट्रेन की चपेट में आने से चार सांडों की मौत हो गई। आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि यहां पटरी पर अकसर लावारिस पशुओं की मौत होती रहती है, जिससे हादसे का भी अंदेशा है। इसके बावजूद पशुओं को ट्रैक से दूर रखने के इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।
सुबह करीब ढाई बजे शनि मंदिर के पास लावारिस पशुओं का झुंड ट्रैक पर खड़ा था। इसी दौरान संगरिया की ओर से आई लालगढ़-गुवाहटी एक्सप्रेस के चालक ने ट्रैक पर पशुओं को देखकर हॉर्न बजाना शुरू कर दिया, लेकिन पशु ट्रैक से नहीं हटे। चालक ने बिना ब्रेक लगाए गाड़ी की गति जारी रखी, जिससे तीन सांडों की मौत हो गई। टक्कर काफी जबरदस्त थी। एक सांड को गाड़ी करीब एक हजार फुट तक घसीटती ले गई, एक सांड उछलकर ट्रैक के एकओर दीवार से टकरा गया जिससेदीवार ढह गई। रेलगाड़ी डबवाली रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ गई।
रेल पटरी के बीचों-बीच दोबारा से लावारिस पशु जमा हो गए। हादसे के दौरान जोरदार धमाका हुआ था, जिसे सुनकर ट्रैक से करीब 200 फुट दूरी पर रह रहे लोगों में दहशत फैल गई। लोग घरों की छतों पर जा चढ़े। इसी बीच डबवाली रेलवे स्टेशन की ओर से आई एक तेज गति मालगाड़ी की चपेट में आकर एक सांड की और मौत हो गई।
ट्रेन उतर सकती थी पटरी से
रेलवे के कनिष्ठ अभियंता एसके पासवान ने बताया कि एक सांड के ट्रैक पर घसीटने की वजह से पअरी की 12 सील टूट गई, जिस वजह से ट्रेन पटरी से उतर सकती थी। इसे ठीक कर दिया गया है।
प्रशासन नहीं कर रहा सुनवाई
डबवाली के रेलवे अधीक्षक महेश सरीन ने कहा कि माह में कई बार ऐसेे हादसे हुए हैं। नगर पालिका प्रशासन और उपमंडलाधिकारी तक से कई बार मांग की है कि स्टेशन और ट्रैक के आसपास घूमने वाले लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशाला भेजा जाए, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।