संवाद न्यूज एजेंसी
बडागुढ़ा (सिरसा)। खंड बडागुढ़ा की पंचायत समिति के वाइस चेयरमैन गुरदेव सिंह गुदर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। पंचायत समिति के 19 सदस्यों ने उनके खिलाफ मतदान किया जबकि एक मत रद्द हो गया। मतदान में वाइस चेयरमैन को मात्र दो मत ही मिल सके। हार से क्षुब्ध वाइस चेयरमैन और उनके समर्थक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्यालय से निकल गए। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से जबरन मत डलवाने का आरोप लगाया।
इस परिणाम से चेयरमैन मंजीत कौर की कुर्सी भी संकट में नजर आ रही है। आगामी 26 दिसंबर को आयोजित होने वाली बैठक में उनके खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव पारित हो सकता है।
कुछ दिन पूर्व पंचायत समिति सदस्यों ने चेयरमैन और वाइस चेयरमैन पर विकास कार्यों में अनदेखी एवं भेदभाव के आरोप लगाए थे। उन्होंने उपायुक्त के समक्ष अविश्वास जताकर उन्हें हटाने की मांग की थी। बहुमत साबित करने के लिए प्रशासन ने इस मुद्दे पर बैठक के लिए सोमवार का दिन तय किया था। तय दिन के अनुसार सोमवार को बडागुढ़ा के बीडीपीओ कार्यालय में एडीसी लक्षित सरीन की मौजूदगी में बैठक हुई।
इस दौरान मतदान भी करवाया गया। इस दौरान वाइस चेयरमैन गुरदेव सिंह अपने समर्थकों के साथ पहुंचे तो अन्य सदस्य भाजपा नेता राजेंद्र सिंह देसूजोधा की अगुवाई में कार्यालय में पहुंचे और मतदान किया। अब अविश्वास प्रस्ताव की रिपोर्ट ग्रामीण एवं पंचायत विभाग को भेजी जाएगी। इसके बाद विभागीय निदेशालय की ओर से नए चुनाव की तिथि तय की जाएगी।
दो इनसेट-
चेयरमैन के कुर्सी पर भी संकट, परीक्षण के लिए बैठक 26 को होगी
वाइस चेयरमैन गुरदेव सिंह गुदर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अब चेयरमैन मंजीत कौर सरां की कुर्सी भी खतरे की जद में है। पंचायत समिति के सदस्यों ने वाइस चेयरमैन के साथ ही चेयरमैन के खिलाफ भी अविश्वास जताया था। चेयरमैन के बहुमत परीक्षण की तारीख 26 दिसंबर तय की गई है। इस आधार पर 26 को बडागुढ़ा बीडीपीओ कार्यालय में बैठक होगी। इसमें चेयरमैन मंजीत कौर के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव पारित हो सकता है।
चाय के कप से उठा था विवाद
चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के खिलाफ चाय के कप से मुद्दा शुरू हुआ था। पंचायत समिति के सदस्य अंग्रेज सिंह, कुलवंत कौर, राम दत्त, कुलदीप सिंह, मंदीप कौर, रीना रानी, बबीता और सुनीता रानी आदि का कहना था कि चेयरमैन और वाइस चेयरमैन उन सभी से भेदभाव करते थे। उन्होंने कोई विकास कार्य भी नहीं करवाए। स्वयं कीमती कपों में चाय पीते थे लेकिन उन्हें डिस्पोजेबल कप में चाय दी जाती थी। समिति के सदस्यों का आरोप है कि चेयरमैन और वाइस चेयरमैन उन्हें पद की ताकत बताते और दिखाते थे, लेकिन वाइस चेयरमैन ने आज उनकी ताकत भी देख ली। अब 26 को चेयरमैन को भी सभी सदस्यों की एकजुटता की ताकत दिखेगी।