सिरसा। शहर के रानियां रोड बाइपास स्थित महिला बहुतकनीकी संस्थान में शिक्षकों की ओर से छात्राओं को नाटा यानी नेशनल एप्टीटयूट टेस्ट इन आर्किटेक्चर की निशुल्क तैयारी करवाई जाएगी। अब जिले की छात्राओं को मुंबई, दिल्ली व कोटा नहीं जाना पड़ेगा। नाटा की कक्षा शिक्षक शाम के समय में पॉलिटेक्निक की कक्षाओं के बाद लगाएंगे। बहुतकनीकी संस्थान के छह शिक्षक अपनी सेवाएं देंगे।
नाटा का आयोजन काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर द्वारा वर्ष में दो बार करवाया जाता है। यह परीक्षा वह उम्मीदवार देते हैं, जो आर्किटेक्ट बनना चाहते हैं। नाटा एक नेशनल लेवल की परीक्षा है। इसके अंतर्गत उम्मीदवारों का चयन उनके स्कोर के आधार पर किया जाता है। अगर किसी विद्यार्थी का सपना अच्छे कॉलेज या फिर विश्वविद्यालय में आर्किटेक्चर को पढ़ना है, तो उसे नाटा की प्रवेश परीक्षा पास करनी अनिवार्य है। यह परीक्षा विद्यार्थी बारहवीं पास करने के बाद दे सकते हैंं। ऐसे में महिला बहुतकनीकी संस्थान में शिक्षकों ने नाटा की तैयारी करवाने का निर्णय लिया है। आईटीआई के प्राचार्य का दावा है कि उनके पास ऐसी फैकल्टी है, जो छात्राओं को नाटा की तैयारी करवा सकती हैं। अगर ये पायलट प्रोजेक्ट सफल हो जाता है तो सिरसा ही नहीं अपितु पंजाब, राजस्थान, यूपी व अन्य देशों की छात्राओं को भी इसका लाभ मिल सकेगा।
भारत के इन कॉलेजों में ही है नाटा की तैयारी के सेंटर
- सर जेजे कॉलेज आफ आर्किटेक्चर, मुंबई
- डिपार्टमेंट ऑफ आर्किटेक्चर आईआईटी रुड़की
- चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर चंडीगढ़
- डिपार्टमेंट ऑफ आर्किटेक्चर एनआईटी कालीकट
- सुशांत स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड आर्किटेक्चर गुरुग्राम
- फैकल्टी ऑफ आर्किटेक्चर एंड एकिस्टिक्स जेएमआई
- फैकल्टी ऑफ आर्किटेक्चर मणिपाल यूनिवर्सिटी
हर साल 100 से ज्यादा विद्यार्थी नाटा की तैयारी के लिए जाते हैं बाहर
जिले के करीब 70 से 100 विद्यार्थी हर साल नाटा की तैयारी करने के लिए बाहर जाते हैं। ऐसे में इन विद्यार्थियों को अपने गृह क्षेत्र में ही अब तैयारी करने का अवसर मिलेगा। हर साल नाटा की परीक्षा फरवरी, मार्च व अप्रैल में होती है। निर्धारित तिथि के अनुसार विद्यार्थियों की कक्षाएं लगाई जाएंगी। शिक्षक नाटा की कक्षा शाम के समय में पॉलिटेक्निक की कक्षाओं के बाद लगाएंगे।
हमारे पास ऐसा स्टॉफ है, जो छात्राओं को नाटा की तैयारी करवा सकता है। जिले के विद्यार्थियों को नाटा की तैयारी करने के लिए बड़े शहरों में जाना पड़ता है। उन्हें अधिक पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। शिक्षकों द्वारा उन्हें निशुल्क में नाटा की तैयारी करवाई जाएगी। - शंकर कुमार शर्मा, प्राचार्य, महिला बहुतकनीकी संस्थान सिरसा।
ये एक प्रकार का पायलट प्रोजेक्ट है, जो आईटीआई की शिक्षा से अलग है। जिसे बहुतकनीकी संस्थान नहीं बल्कि शिक्षकों की ओर से शुरू किया जा रहा है। इसके दौरान शिक्षक अपने अतिरिक्त समय में छात्राओं को इसका प्रशिक्षण देंगे। वहीं छात्राओं की हर प्रकार की उलझन भी इस प्रोजेक्ट द्वारा ही सुलझाई जाएंगी।
- प्रमोद कंबोज, वरिष्ठ प्राध्यापक वास्तुकला, महिला बहुतकनीकी संस्थान सिरसा।