सिरसा। कोरोना महामारी का खतरा अभी टला नहीं है। जिला प्रशासन भी संक्रमण फैलने से रोकने के लिए हिदायतों का पालन करने के निर्देश जारी करता है और लोगों पर सख्ती भी बरतता है। लेकिन प्रशासन स्वयं कोरोना बचाव को लेकर बरती जा रही सावधानियों में लापरवाही बरत रहा है। जहां एक ओर सरकारी विभागों में मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियम टूटने लगे हैं। कार्यालयों के बाहर आम नागरिकों के हाथ धोने के लिए लगाए गए वॉश बेसिन खस्ता हाल में पहुंच गए हैं। प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। कोरोना के मामले बेशक, पहले के मुकाबले काफी कम हो गए हैं लेकिन अभी भी कोरोना का खतरा टला नहीं है।
जानिये....कहां कैसी है स्थिति
1. लघु सचिवालय : टंकी में पानी मिला लेकिन टूट चुकी टोंटियां, सफाई भी नहीं
कोरोना संक्रमण का सबसे अधिक खतरा लघु सचिवालय में था। यहां आम जन का सबसे ज्यादा आना जाना लगा रहता है। इसलिए लघु सचिवालय कैंपस में डीसी ऑफिस के बाहर पानी की टंकी रखकर बाकायदा वॉश बेसिन लगाया गया था। लेकिन अब इस ओर अधिकारियों ने ध्यान देना बंद कर दिया है। लघु सचिवालय के बाहर अस्थायी वॉश बेसिन की ना तो नियमित रूप से सफाई हो रही है और ना ही साज-संभाल हो रही है।
2. ई-दिशा केंद्र : पानी खत्म, सफाई का अभाव
लघु सचिवालय के सामने स्थित ई-दिशा केंद्र में भी ऐसा ही हाल पाया। यहां भी अस्थायी टंकी रखकर वॉश बेसिन लगाया गया है। टंकी में अब पानी खत्म हो चुका है और कोई भी कर्मचारी अब यहां पानी उपलब्ध करवाने की जहमत नहीं उठाता। हालांकि टोंटियां ठीक-ठाक हैं लेकिन सफाई का यहां भी अभाव है।
3. एसपी ऑफिस : यहां कर्मचारी धोते हैं झूठे बर्तन
एसपी ऑफिस के बाहर भी वॉश बेसिन स्थापित किया गया था। लेकिन अब इसका प्रयोग आमजन के हाथ धोने के नहीं बल्कि कर्मचारियों ने झूठे बर्तन आदि धोने के लिए शुरू कर दिया है। हालांकि ये अच्छी बात है। इस बहाने प्रतिदिन टंकी में पानी भी भरा जाता है और लेकिन सफाई का यहां भी अभाव नजर आया।
4. जन स्वास्थ्य विभाग : दिए तले अंधेरा वाली कहावत हो रही चरितार्थ
शहर के टाउन पार्क के पास स्थित जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन कार्यालय के बाहर लगे अस्थायी वॉश बेसिन की हालत सबसे ज्यादा खराब मिली। जन स्वास्थ्य विभाग सबसे ज्यादा दावे करता है और बड़ी-बड़ी बाते इस विभाग के अधिकारी करते हैं। लेकिन व्यवस्था में लचरपन भी सबसे ज्यादा यहां नजर आया। जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में लगे वॉश बेसिन की टोंटियां पूरी तरह टूट चुकी हैं और सफाई का भी अभाव है। हालांकि हो सकता है कि टंकी में पानी हो, लेकिन टोंटी खराब होने से इसका कोई लाभ नहीं।
5. बस स्टैंड : टूट चुकी टोंटी, स्टैंड भी खस्ताहाल, साबुन रखा हो इसकी तो बात ही छोड़िए
बस स्टैंड पर सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। लेकिन यहां भी लचर व्यवस्था देखने को मिली। टोंटी टूटी हुई है और नीचे की पाइप भी गायब हो चुकी है। पानी टंकी में है नहीं। ऐसी स्थिति में हाथ धोने के लिए साबुन की इच्छा करना ही बेमानी है।
वॉश बेसिन की हालत खराब तो सैनिटाइजर भी गायब
सभी सरकारी कार्यालयों में प्रशासन के आदेेश हैं कि सैनिटाइजर होने जरूरी हैं। लेकिन अब कहीं पर भी सैनिटाइजर नजर नहीं आता। डीसी ऑफिस के बाहर केवल एक जगह सैनिटाइजर नजर आया। इसके अलावा किसी भी अन्य विभाग के कार्यालय में सैनिटाइजर की व्यवस्था नहीं मिली।
अब कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम हो गया है। इसलिए कार्यालय के बाहर वॉश बेसिन की ज्यादा जरूरत नहीं है। किसी को हाथ धोने हों तो कार्यालय के भीतर आकर हाथ धो सकता है। अब इन अस्थायी वॉश बेसिन को चलाना, मतलब पानी की बर्बादी ही है।
-रणजीत सिंह मलिक, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग, सिरसा।